द्वेष, मोह और ईर्ष्या से ऊपर उठकर सद्कर्मों से जीवन को सार्थक बनाएं : वेदाचार्य योगेन्द्र याज्ञिक
कानपुर। आर्य समाज गोबिन्द नगर के तत्वावधान में आयोजित वेद प्रचार महोत्सव में गुरूवार को होशंगाबाद से पधारे प्रख्यात वेदाचार्य योगेन्द्र याज्ञिक ने जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि सद्कर्म, सत्य, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से स्वयं के साथ-साथ समाज के कल्याण के लिए है।
उन्होंने कहा कि द्वेष, मोह, ईर्ष्या, अहंकार और अनावश्यक संघर्ष मनुष्य के जीवन की ऊर्जा को नष्ट करते हैं। इसके विपरीत सकारात्मक सोच, संयम, आत्मचिंतन और परोपकार की भावना व्यक्ति के जीवन को सार्थक एवं प्रेरणादायी बनाती है। मनुष्य को अपने सीमित जीवनकाल का सदुपयोग करते हुए ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे परिवार, समाज और राष्ट्र को लाभ मिले।
वेदाचार्य योगेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि वेद मनुष्य को जीवन जीने की ऐसी वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि प्रदान करते हैं, जिसमें ज्ञान के साथ कर्म, आत्मअनुशासन के साथ सेवा और आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय है। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाए तो उसके जीवन का प्रभाव पूरे समाज पर दिखाई दे सकता है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे वैदिक विचारों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारें। सत्य बोलना, ईमानदारी से कार्य करना, दूसरों के प्रति सद्भाव रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में प्रेम एवं भाईचारे का वातावरण बनाना ही जीवन की वास्तविक उपलब्धि है।
कार्यक्रम में वीरा चोपड़ा, शुभ कुमार वोहरा, चन्द्रकान्ता गेरा,वीरेन्द्र मल्होत्रा,डॉ. संतोष अरोड़ा, प्रकाश वीर आर्य,अनिल चोपडा, शकुंतला मेंहदीरत्ता, श्याम प्रकाश शास्त्री सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वैदिक विचारों एवं जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

