अधूरे दस्तावेजों पर फर्मों को पंजीकरण, मुख्य अभियंता पर कार्रवाई की तैयारी
नगर निगम टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप, जांच समिति की रिपोर्ट के बाद शासन को भेजी गई कार्रवाई की संस्तुति
कानपुर। नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर सामने आए कथित घोटाले की जांच अब मुख्य अभियंता मोहम्मद एसएफए जैदी तक पहुंच गई है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने शासन को पत्र भेजकर मुख्य अभियंता के तबादले के साथ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। रिपोर्ट में फर्मों के पंजीकरण से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक कई स्तरों पर अनियमितताओं की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है।
जांच में सामने आया कि कुछ फर्मों के पंजीकरण के दौरान जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं थे। इसके बावजूद उनके पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें टेंडर में शामिल होने का अवसर दिया गया। जांच समिति ने फर्मों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन नहीं किए जाने को भी गंभीर मामला माना है।
लखनऊ से बुलाए गए तीन ठेकेदारों को काम दिलाने का आरोप
जांच के दौरान मुख्य अभियंता पर आरोप लगा है कि उन्होंने लखनऊ से तीन ठेकेदारों को बुलाया और उन्हें नगर निगम के कार्य दिलाने में मदद की। टेंडर प्रक्रिया में इन फर्मों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। नगर आयुक्त अरपित उपाध्याय इससे पहले भी शासन को पत्र भेजकर मुख्य अभियंता को हटाने के लिए अनुरोध कर चुके हैं।
तीन कर्मचारी निलंबित, तीन का तबादला
टेंडर प्रकरण में नगर निगम के तीन कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह तथा अवर अभियंता अमनदीप सिंह और बलेंद्र कुमार को निलंबित किया गया है। वहीं लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद का तबादला किया जा चुका है।
एसआईटी और सीडीओ समिति कर रही जांच
प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी के साथ सीडीओ की अध्यक्षता में गठित समिति भी जांच कर रही है। जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया, फर्मों के पंजीकरण और अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने 25 अगस्त को पांच ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पांच फर्मों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया। मामले में संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं कथित मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है।
पांच फर्में ब्लैकलिस्ट
जांच के दायरे में दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला एंटरप्राइजेज समेत पांच फर्में शामिल हैं। इन फर्मों की टेंडर प्रक्रिया और नगर निगम से मिले कार्यों की भी जांच की जा रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ रही है। अब शासन स्तर से मुख्य अभियंता के खिलाफ कार्रवाई पर निर्णय लिया जाना है। प्रकरण में एसआईटी और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

