विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच पर सवाल
आरोपी बहू के अधिवक्ता का दावा- फोरेंसिक जांच को भेजा मोबाइल सात दिन बाद भी रहा एक्टिव, डीसीपी बोले- किस नंबर की बात है, जांच कराएंगे
कानपुर। करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल में बंद आरोपी बहू शालू मिनोचा के अधिवक्ता ने पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता का दावा है कि पुलिस ने शालू का मोबाइल कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया था, इसके बावजूद घटना के करीब सात दिन बाद तक मोबाइल एक्टिव रहा। शनिवार सुबह इंस्टाग्राम पर मोबाइल का लास्ट सीन 10:03 बजे तक दिखाई देने का दावा किया गया है।
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने वीडियो जारी कर सवाल उठाया कि यदि मोबाइल पुलिस की कस्टडी में है तो उसे कौन संचालित कर रहा है और उसके जरिए चैट या वीडियो बाहर कैसे आ रहे हैं। उन्होंने इन तथ्यों की जांच मुकदमे के विवेचक से कराने की मांग की है।
डीसीपी बोले- मोबाइल की होगी जांच
मामले में डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस को शालू के एक मोबाइल की जानकारी थी, जिसे कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उसमें दो नंबर एक्टिव हैं। अधिवक्ता किस मोबाइल नंबर के एक्टिव होने की बात कह रहे हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मोबाइल नंबरों की जानकारी को लेकर भी सवाल
अधिवक्ता ने यह सवाल भी उठाया कि शालू के नाम पर कितने मोबाइल नंबर एक्टिव हैं, इसकी जानकारी पुलिस ने अब तक क्यों नहीं जुटाई। उनका कहना है कि मोबाइल नंबरों की जानकारी और उनकी गतिविधियों की जांच इस मामले में अहम हो सकती है।
हत्या के बाद बैंक और दुकान जाने की जांच की मांग
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने शालू के पति सुब्रत की गतिविधियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पांच सितंबर की रात पिता विनीत मिनोचा की हत्या के बाद सुब्रत बैंक और बिरहाना रोड स्थित अपनी दुकान पर गए थे। उनका कहना है कि इन गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की पूरी कड़ी सामने आ सके और किसी निर्दोष को न फंसाया जाए।
बहन ने कहा- दो नंबर एक ही मोबाइल में थे
शालू की बहन सोनिया मेहरोत्रा के मुताबिक, शालू के पास दो मोबाइल नंबर थे और दोनों सिम एक ही हैंडसेट में इस्तेमाल होते थे। उनका कहना है कि पूछताछ के लिए पूरे परिवार को थाने बुलाया गया था। बाद में शालू को छोड़कर परिवार के अन्य सदस्यों को वापस भेज दिया गया, जबकि पुलिस ने शालू का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया था।
पुलिस जांच पर भरोसा जताया था परिवार ने
दो दिन पहले शालू की बहन सोनिया मेहरोत्रा और भाई धीरज अरोड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस कर पुलिस की जांच पर भरोसा जताया था। परिवार का कहना था कि विवेचना में शालू की बेगुनाही सामने आएगी। अब अधिवक्ता की ओर से मोबाइल एक्टिव होने समेत अन्य तथ्यों को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद मामले की जांच को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर और उसके एक्टिव होने से जुड़े दावे की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

