पुलिस स्मृति दिवस पर पीएम मोदी और सीएम योगी ने शहीदों को किया नमन, बोले- बलिदान हमेशा रहेगा याद
नई दिल्ली/लखनऊ। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने पुलिस बल के साहस, समर्पण और नागरिकों की सुरक्षा में उसके योगदान को याद करते हुए कहा कि शहीद जवानों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। यह दिवस उन पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
पीएम मोदी ने सराहा पुलिसकर्मियों का साहस और समर्पण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संदेश जारी कर कहा कि पुलिस स्मृति दिवस उन पुलिसकर्मियों को नमन करने का अवसर है, जो कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों से मुकाबला करने, आपात परिस्थितियों में लोगों की सहायता करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पालन के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहस, अटूट प्रतिबद्धता और सेवा भावना को याद किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों का समर्पण देश की स्मृतियों में हमेशा बना रहेगा। पुलिसकर्मी अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और समाज की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत कठिनाइयों की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
सीएम योगी बोले- नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शहीद पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा, समाज में शांति और नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य की राह पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों का शौर्य और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में माफिया और अराजक तत्वों का प्रभाव था। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना को याद करते हुए कहा कि वहां कानून की रक्षा करते हुए पुलिस अधिकारियों को अपने प्राण गंवाने पड़े थे।
योगी ने कहा कि आज नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। प्रदेश को उपद्रव से उत्सव की ओर ले जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की स्वतंत्रता मिली है। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में शांति, सुरक्षा और कानून का शासन बनाए रखना है।
2.26 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, प्रशिक्षण क्षमता में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री ने पुलिस बल को मजबूत बनाने के लिए किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, प्रदेश में 2.26 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता में दस गुना वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में साइबर थाने और महिलाओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के उद्देश्य से प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य पुलिस को अधिक आधुनिक, सक्षम और जवाबदेह बनाना है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराधों की रोकथाम और महिलाओं की सुरक्षा पुलिस व्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है।
अपराधियों की संपत्ति जब्ती का भी किया उल्लेख
सीएम योगी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत 88,973 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने इसे अपराध और संगठित आपराधिक गतिविधियों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई का हिस्सा बताया।
प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस की जवाबदेही, संसाधनों और तकनीकी क्षमता में सुधार पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए अपराधों की रोकथाम के साथ निष्पक्ष जांच, समय पर कार्रवाई और आम नागरिकों के विश्वास को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
शहीदों के परिवारों के त्याग को याद रखने का संकल्प
पुलिस स्मृति दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि उन परिवारों को याद करने का भी दिन है, जिन्होंने देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खोया। कर्तव्य के दौरान शहीद हुए जवानों के परिवारों का त्याग भी सम्मान का अधिकारी है। पुलिसकर्मियों की सेवा और बलिदान से जुड़ी स्मृतियां समाज को सुरक्षा के महत्व का एहसास कराती हैं।
इस अवसर पर पुलिस बल के योगदान को सम्मान देने के साथ सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण बनाने का संकल्प भी दोहराया गया। नागरिकों की सुरक्षा, अपराधों पर नियंत्रण और कानून के प्रति विश्वास कायम रखने में पुलिस की भूमिका केंद्रीय है।
21 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?
राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस जवानों की स्मृति को समर्पित है। उस घटना में जवानों ने कठिन परिस्थितियों में साहस का परिचय देते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
तब से यह दिन देशभर में उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई। पुलिस स्मृति दिवस उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशसेवा को याद करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी का भी संदेश देता है।


