साड़ी में नंगे पैर 1600 मीटर दौड़ी कविता, खाकी पहन बच्चों का भविष्य संवारने का सपना

साड़ी में नंगे पैर 1600 मीटर दौड़ी कविता, खाकी पहन बच्चों का भविष्य संवारने का सपना

पति की मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाली महिला की कहानी ने जीता लोगों का दिल, रोज सुबह चार बजे उठकर करती हैं दौड़ की तैयारी

रिपोर्ट- सत्यम शुक्ला

रामगढ़। हौसला मजबूत हो तो अभाव भी रास्ते की दीवार नहीं बन सकता। झारखंड के रामगढ़ जिले में इन दिनों एक ऐसी ही महिला की कहानी चर्चा में है, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद होमगार्ड बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए मैदान में उतर गई। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की कविता देवी साड़ी पहनकर और नंगे पैर 1600 मीटर की दौड़ में शामिल हुईं। तेज धूप और पैरों में जूते न होने के बावजूद उन्होंने दौड़ पूरी की। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग उनके जज्बे और संघर्ष को सलाम कर रहे हैं।

कविता के लिए यह सिर्फ एक दौड़ नहीं है। उनके सामने अपने दो बच्चों का भविष्य है और परिवार को आर्थिक मजबूती देने की जिम्मेदारी भी। पति की बीमारी के कारण मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। पति के इलाज में काफी पैसा खर्च होने के कारण परिवार पर कर्ज भी चढ़ गया। इसके बाद कविता ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खुद काम करने और बच्चों का भविष्य संवारने का फैसला किया।

सुबह चार बजे उठकर करती हैं दौड़ की तैयारी

कविता के संघर्ष की तस्वीर सिर्फ वायरल वीडियो में नजर आने वाली कुछ मिनट की दौड़ तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक वह रोज सुबह करीब चार बजे उठती हैं और दौड़ का अभ्यास करती हैं। इसके बाद घर के कामकाज निपटाने के साथ मजदूरी भी करती हैं। बताया गया है कि वह ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती हैं। यानी सुबह की दौड़ से लेकर दिनभर की मेहनत तक उनका हर कदम अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद से जुड़ा है।

कविता के पास महंगे ट्रैक सूट, रनिंग शूज या प्रशिक्षण की दूसरी सुविधाएं नहीं हैं। यही वजह है कि जिस साड़ी में वह रोजमर्रा के घरेलू और कामकाजी जीवन की जिम्मेदारियां निभाती हैं, उसी में दौड़ की तैयारी भी करती हैं। रामगढ़ के मैदान में जब वह अन्य अभ्यर्थियों के साथ दौड़ीं तो उनका यह अंदाज लोगों का ध्यान खींचने लगा।

नंगे पैर दौड़ीं तो मोबाइल में कैद हो गया पूरा नजारा

रामगढ़ शहर के सिद्धो-कान्हू स्टेडियम परिसर में होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए ट्रायल रन आयोजित किया गया था। चार अक्टूबर को आयोजित इस ट्रायल में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे थे। महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसी दौरान कविता साड़ी पहनकर नंगे पैर मैदान में दौड़ती नजर आईं। वहां मौजूद लोगों ने उनका वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक निर्धारित समय 10 मिनट था और कविता ने 1600 मीटर की दूरी करीब छह मिनट में पूरी की। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में कविता के हवाले से बताया गया है कि शुरुआती अभ्यास में वह करीब आठ मिनट में दूरी पूरी करती थीं और अब उनका समय करीब सात मिनट तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि वह लगातार अपनी दौड़ और फिटनेस पर मेहनत कर रही हैं।

पति की मौत के बाद अकेले संभाली परिवार की जिम्मेदारी

कविता की जिंदगी में मुश्किलें एक के बाद एक आती रहीं। पति दीपक महतो की बीमारी के कारण मौत हो गई। इलाज के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति और कमजोर हुई। बाद में परिवार के एक अन्य सदस्य की भी बीमारी से मौत हो गई। दो छोटे बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कविता के सामने रोजमर्रा का जीवन चलाना ही बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद उन्होंने सरकारी नौकरी का सपना देखा।

उनका मानना है कि अगर वह होमगार्ड की नौकरी हासिल कर लेती हैं तो परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है और बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सकेगी। यही उम्मीद उन्हें हर सुबह मैदान तक खींच लाती है।

साड़ी में दौड़ने वाली अकेली कविता नहीं

  • रामगढ़ में इन दिनों होमगार्ड भर्ती की तैयारी कर रही कई महिलाएं साड़ी पहनकर ही दौड़ का अभ्यास कर रही हैं। कई महिलाओं के पास ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स शूज खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। इसके बावजूद वे मैदान में पहुंच रही हैं और अभ्यर्थियों के साथ दौड़ रही हैं।
  • एक रिपोर्ट में 30 वर्षीय सुनीता कुमारी का भी जिक्र है, जो साड़ी पहनकर दौड़ की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह ट्रैक सूट और महंगे रनिंग शूज खरीद सकें। इसके बावजूद उन्होंने दौड़ को अपनी तैयारी में बाधा नहीं बनने दिया।
  • यानी रामगढ़ के मैदान में साड़ी में दौड़ती महिलाएं सिर्फ एक वायरल वीडियो का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की उन महिलाओं की तस्वीर हैं, जो सरकारी नौकरी को अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने का रास्ता मान रही हैं।

284 पदों पर होनी है होमगार्ड की भर्ती

रामगढ़ जिले में 284 होमगार्ड पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। जिला प्रशासन की ओर से जारी भर्ती से संबंधित आधिकारिक सूचना भी उपलब्ध है। रिपोर्टों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के तहत शारीरिक दक्षता परीक्षा में 1600 मीटर दौड़ के साथ अन्य शारीरिक मानकों की जांच भी होगी। भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए करीब 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था ने ग्रामीण इलाकों की महिला अभ्यर्थियों में इस भर्ती को लेकर उम्मीद बढ़ाई है। कई महिलाओं के लिए यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने का मौका है।

दौड़ के बाद मदद को आगे आए लोग

कविता को नंगे पैर साड़ी में दौड़ता देखकर वहां मौजूद लोगों ने उनका वीडियो बनाया। वीडियो वायरल होने के बाद उनकी कहानी लोगों तक पहुंची। इसके बाद स्थानीय रनिंग ग्रुप और प्रशिक्षण से जुड़े लोगों ने कविता के हौसले को सम्मान दिया। रिपोर्ट के अनुसार एक रनिंग एकेडमी से जुड़े लोग उनके घर भी पहुंचे और उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप जर्सी और जूते दिए, ताकि आगे की तैयारी में उन्हें कुछ सुविधा मिल सके। जिस महिला के पास दौड़ने के लिए जूते तक नहीं थे, उसके संघर्ष को देखकर लोगों का मदद के लिए आगे आना इस कहानी का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है।

अब असली परीक्षा भर्ती मैदान में होगी

कविता ने ट्रायल में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करके अपनी शारीरिक क्षमता का परिचय जरूर दिया है, लेकिन असली परीक्षा भर्ती प्रक्रिया के दौरान होगी। इसके लिए वह लगातार तैयारी कर रही हैं। उनके सामने एक तरफ आर्थिक मजबूरियां हैं तो दूसरी तरफ परिवार की जिम्मेदारियां। फिर भी वह हर सुबह मैदान में पहुंचती हैं। उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जिस साड़ी में वह घर और मजदूरी की जिम्मेदारियां निभाती हैं, उसी में उन्होंने दौड़ को अपना हथियार बना लिया। पैरों में जूते नहीं थे, लेकिन आंखों में अपने बच्चों के भविष्य का सपना था। कविता की यह दौड़ सिर्फ 1600 मीटर की दूरी नहीं है। यह उस संघर्ष की तस्वीर है, जिसमें एक मां अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए गरीबी, जिम्मेदारियों और संसाधनों की कमी से लड़ते हुए आगे बढ़ रही है। अब नजर 24 अक्टूबर से शुरू होने वाली होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पर है। अगर कविता का चयन होता है तो उनके लिए यह सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि संघर्ष से निकली एक नई शुरुआत होगी।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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