सामूहिक विवाह सम्मेलन में 87 जोड़ों ने थामा एक-दूजे का हाथ, अनाथ बेटियों के जीवन में भी आई खुशियों की बहार
हादसे में माता-पिता और तीन बहनों को खोने वाली लक्ष्मी ने भी लिए सात फेरे, मामी ने किया कन्यादान; तीन मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह

कानपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बिधनू के कठेरूवा स्थित गेस्टहाउस में आयोजित विवाह सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को पतारा ब्लॉक के 87 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। वैवाहिक समारोह में तीन मुस्लिम जोड़े भी शामिल रहे। पूरे आयोजन में कहीं वैदिक मंत्रोच्चार गूंजा तो कहीं निकाह की रस्में अदा की गईं। नए जीवन की शुरुआत कर रहे जोड़ों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। वहीं, कई ऐसे जोड़ों की शादियां भी हुईं, जिनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में विवाह समारोह उनके लिए भावुक कर देने वाला पल बन गया।
कार्यक्रम में सबसे पहले सभी जोड़ों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराई गई। इसके बाद हिंदू जोड़ों को विवाह वेदियों पर बैठाकर पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्में संपन्न कराईं। वर-वधू ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरों के साथ जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। वहीं, मुस्लिम जोड़ों का काजी ने इस्लामिक रीति-रिवाज से निकाह कराया। शासन की योजना के तहत आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में अलग-अलग परिवारों और सामाजिक पृष्ठभूमि के जोड़े एक साथ वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत के साक्षी बने।
समारोह की मुख्य अतिथि घाटमपुर विधायक सरोज कुरील ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी मिलन होता है। दांपत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति विश्वास, सम्मान और सहयोग बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने नवदंपतियों को जीवन की चुनौतियों का मिलकर सामना करने और परिवार को प्रेम के साथ आगे बढ़ाने की सीख दी। पतारा ब्लॉक प्रमुख कोमल सिंह ने भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की।
मलबे में उजड़ गया था परिवार, अब लक्ष्मी के जीवन में लौटी खुशियां

विवाह सम्मेलन में सबसे भावुक कर देने वाला प्रसंग घाटमपुर के हिरनी गांव की लक्ष्मी की शादी का रहा। बीते छह सितंबर को तेज बारिश के दौरान उसका मकान भरभराकर ढह गया था। हादसे के वक्त परिवार के सदस्य मकान के अंदर थे और मलबे में दबने से लक्ष्मी के पिता मुकेश ठाकुर और उसकी तीन छोटी बहनों माया, नीतू और पल्लवी की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे में परिवार की बड़ी बेटी लक्ष्मी ही जीवित बची थी। एक ही पल में उसका पूरा परिवार बिखर गया था। जिन लोगों के साथ उसने जिंदगी के सपने देखे थे, वे सभी उससे हमेशा के लिए बिछड़ गए।
समय बीतने के साथ परिवार और रिश्तेदारों ने लक्ष्मी को संभाला और उसके नए जीवन की शुरुआत कराने का फैसला किया। शनिवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में लक्ष्मी का विवाह उपेंद्र सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी सिहरी, भोगनीपुर, मूसानगर के साथ संपन्न हुआ। पिता और बहनों की अनुपस्थिति में लक्ष्मी का कन्यादान उसकी मामी सविता ने किया। विवाह की रस्मों के दौरान यह पल मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला रहा। एक ओर लक्ष्मी अपने नए जीवन की शुरुआत कर रही थी तो दूसरी ओर उसके परिवार की कमी भी इस खास मौके पर साफ महसूस हुई।
पिता का साया उठने के बाद पिंकी ने शुरू किया नया सफर

सम्मेलन में संचितपुर निवासी पिंकी का विवाह शाहजहांपुर निवासी अतीक पुत्र गयाप्रसाद के साथ हुआ। पिंकी के पिता परशुराम की बीमारी के चलते करीब छह वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां मां रामश्री और अन्य सदस्यों के कंधों पर आ गई थीं। परिवार में पिंकी का एक भाई और दो बहनें हैं। सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से पिंकी ने भी वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। इस मौके पर परिवार के लोगों ने नवदंपती को आशीर्वाद देकर उनके सुखद भविष्य की कामना की।
स्वर्गीय पिता की बेटी रंजना भी विवाह बंधन में बंधी

डूडौली, डेरापुर निवासी सचिन कुमार पुत्र रामकृष्ण का विवाह स्वर्गीय रामदास की बेटी रंजना के साथ हुआ। रंजना के पिता का बीमारी के चलते 27 अक्टूबर 2025 को निधन हो गया था। पिता की अनुपस्थिति के बीच रंजना ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। वहीं, कानपुर नगर के आजाद नगर निवासी राहुल कुमार पुत्र गोकरण प्रसाद ने पतारा ब्लॉक के इटर्रा निवासी बेटा लाल की बेटी दीपिका के साथ सात फेरे लिए। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
तीन मुस्लिम जोड़ों का काजी ने कराया निकाह
सामूहिक विवाह सम्मेलन में तीन मुस्लिम जोड़े भी शामिल रहे। इनमें आर्या का निकाह हासिम के साथ, हाशिमी खातून का निकाह मोहम्मद साजिद के साथ और आसिफा का निकाह आरिफ अली के साथ संपन्न हुआ। काजी ने मुस्लिम जोड़ों का निकाह इस्लामिक रीति-रिवाज से कराया। इस तरह एक ही आयोजन स्थल पर हिंदू और मुस्लिम जोड़ों ने अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार वैवाहिक जीवन की शुरुआत की।
अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ आयोजन
कार्यक्रम के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी विनय उत्तम, खंड विकास अधिकारी शिव नरेश, एडीओ आईएसबी विक्रम शर्मा, एडीओ समाज कल्याण पल्लवी सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। अधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं दीं। सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से 87 जोड़ों ने नए जीवन की शुरुआत की।


