वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित की मंजूरी
न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को लेकर लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया है। यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करने से जुड़ा था। यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हुआ। इसके पक्ष में 152 वोट पड़े, जबकि सिर्फ अमेरिका, इजरायल और पैराग्वे ने इसके खिलाफ वोट दिया। चार अन्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। इसी के साथ यह तय हो गया है कि महमूद अब्बास अब संयुक्त राष्ट्र महासभा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करेंगे।
दरअसल, अमरीका ने फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीजा देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अमरीका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए वीजा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब अमरीका और ईरान के बीच युद्ध अब सातवें महीने में पहुंच चुका है। यह दूसरी बार होगा जब महमूद अब्बास संयुक्त राष्ट्र महासभा को वीडियो के जरिए संबोधित करेंगे। पिछले साल भी वीजा नहीं मिलने के बाद उन्होंने इसी तरह महासभा को संबोधित किया था। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने दोहराया कि फिलिस्तीन अपने साथ-साथ इजरायल के भी शांति और सुरक्षा के साथ रहने के अधिकार को मानता है। उन्होंने कहा कि हमें वीजा नहीं दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र के सामने सबसे बड़े मुद्दों में से एक, यानी फिलिस्तीनी लोग और उनका नेतृत्व, यहां मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे यहां पूरी मजबूती से मौजूद हैं। मंसूर ने कहा कि फिलिस्तीनी लोग तब तक अपनी बात रखते रहेंगे, जब तक उनके मुताबिक फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर इजरायल का गैरकानूनी कब्जा खत्म नहीं हो जाता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति के मुताबिक दो-देश समाधान लागू नहीं हो जाता।
यूएस ने अपने फैसले का किया बचाव
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की उप-स्थायी प्रतिनिधि टैमी बरुस ने अब्बास को वीजा नहीं देने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने फिलिस्तीनी पक्ष पर आतंकवाद को पूरी तरह न छोडऩे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हम इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ (फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन, जिसका प्राधिकरण पर नियंत्रण है) आतंकवाद को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के छोड़ें। फिलिस्तीन को एक देश के रूप में पूरी मान्यता नहीं मिली है और संयुक्त राष्ट्र में उसे ऑब्जर्वर यानी पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है।

