लाल सागर में हूतियों की बढ़ती पकड़, दो और रणनीतिक द्वीपों पर कब्जे से समुद्री मार्ग पर दबाव

लाल सागर में हूतियों की बढ़ती पकड़, दो और रणनीतिक द्वीपों पर कब्जे से समुद्री मार्ग पर दबाव

यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में दो और रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यमन सरकार के अनुसार हूतियों ने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर अपने लड़ाके तैनात किए हैं। दोनों द्वीप बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह हूतियों ने लाल सागर के तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और रणनीतिक मायून द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित किया था। इन क्षेत्रों में पहले सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना की मौजूदगी थी। लगातार बढ़ते कब्जे से लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर हूतियों का प्रभाव बढ़ने की आशंका है। बाब-अल मंदेब जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम है। इसी मार्ग से गुजरने वाले जहाज आगे स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी के अनुसार पिछले 24 घंटे में सऊदी अरब ने हूती ठिकानों पर 58 हवाई हमले किए हैं। दूसरी ओर, हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा करते हुए लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इससे दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया है। हूतियों का द्वीपों पर कब्जा ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्र में पहले से ही समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बना हुआ है। रणनीतिक द्वीपों और बंदरगाहों पर नियंत्रण से हूतियों को लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने और अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसके जवाब में सऊदी अरब की ओर से हवाई कार्रवाई बढ़ाए जाने की बात कही गई है। इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि लाल सागर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस के परिवहन के लिए यह इलाका महत्वपूर्ण है। इसी बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी क्षेत्रीय तनाव सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि ओमान की ओर से ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रस्तावित चर्चा को सऊदी अरब के दबाव के कारण स्थगित किया गया। ईरान ने युद्ध के शुरुआती दौर में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। होर्मुज में तनाव के बाद सऊदी अरब ने कच्चे तेल के निर्यात के लिए लाल सागर से जुड़े बाब-अल मंदेब मार्ग के इस्तेमाल को बढ़ाया था। ऐसे में हूतियों का इस क्षेत्र में लगातार बढ़ता प्रभाव सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति और कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को दावा किया कि सऊदी अरब ने ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच होर्मुज को लेकर प्रस्तावित बैठक को फिलहाल रद्द करने की मांग की थी। इस पूरे घटनाक्रम से मध्य-पूर्व के दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों—बाब-अल मंदेब और होर्मुज—को लेकर बढ़ते तनाव की तस्वीर सामने आती है।

रणनीतिक द्वीपों पर कब्जे से बढ़ी चिंता

ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीप बाब-अल मंदेब के करीब स्थित हैं और लाल सागर में रणनीतिक महत्व रखते हैं। इससे पहले मोखा और मायून पर नियंत्रण की खबरों के बाद हूतियों की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत होने की बात कही जा रही है। इन इलाकों पर सैन्य मौजूदगी बढ़ने से समुद्री यातायात की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

लाल सागर और बाब-अल मंदेब मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो तेल और गैस की ढुलाई महंगी और जोखिमपूर्ण हो सकती है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। होर्मुज में तनाव के साथ यह स्थिति ऊर्जा बाजार के लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *