दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकल्प है

दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकल्प है

खुशियों, उम्मीदों, प्रेम और सामाजिक सद्भाव के प्रकाश से रोशन हो हर घर-आंगन

वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस परिवार की ओर से विशेष संपादकीय

भारत त्योहारों और उत्सवों की भूमि है। यहां मनाया जाने वाला प्रत्येक पर्व अपने भीतर एक विशेष संदेश, परंपरा और जीवन दर्शन समेटे हुए है। इन्हीं पर्वों में दीपावली का स्थान सबसे विशिष्ट है। दीपावली केवल दीप जलाने, घर सजाने, मिठाइयां बांटने और आतिशबाजी करने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में उजाले, सकारात्मकता, सत्य, सद्भाव और नई उम्मीदों का संचार करने वाला महापर्व है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, विश्वास और उम्मीद का एक छोटा-सा दीपक भी बड़े से बड़े अंधकार को दूर करने की ताकत रखता है।

दीपावली का नाम आते ही मन में मिट्टी के दीयों की जगमगाहट, घरों के बाहर बनी रंगोलियां, फूलों से सजे दरवाजे, पूजा की थालियां, मिठाइयों की खुशबू और अपनों के साथ बिताए जाने वाले खुशनुमा पलों की तस्वीर उभर आती है। हर तरफ उत्साह और उल्लास का वातावरण दिखाई देता है। बच्चे नए कपड़े पहनकर खुशियां मनाते हैं, महिलाएं घरों को सजाती हैं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। यही सामूहिक उल्लास दीपावली को भारतीय संस्कृति का एक अनूठा पर्व बनाता है।

भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़ी है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध कर माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। घरों और गलियों में दीप जलाकर भगवान श्रीराम का स्वागत किया गया था। तभी से दीपावली को बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह प्रसंग आज भी हमें जीवन में मर्यादा, त्याग, सत्य और कर्तव्य के महत्व की याद दिलाता है।

दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व केवल एक परंपरा तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने और अपनी कमियों को दूर करने का अवसर भी देता है। जिस प्रकार हम अपने घरों की सफाई करते हैं, उसी प्रकार मन में मौजूद ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार और नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प भी लेना चाहिए। घर में दीप जलाने के साथ यदि मन में प्रेम, दया और करुणा का प्रकाश भी जलाया जाए, तभी दीपावली की सार्थकता पूरी होती है।

बाजारों की रौनक के बीच न भूलें त्योहार का वास्तविक उद्देश्य

दीपावली के आगमन से कई दिन पहले ही बाजारों में रौनक दिखाई देने लगती है। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़, कपड़ों और आभूषणों की खरीदारी, मिठाइयों की दुकानें, सजावटी सामान और रंग-बिरंगी रोशनी त्योहार के उत्साह को कई गुना बढ़ा देती हैं। व्यापारियों के लिए भी यह पर्व वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है। छोटे दुकानदारों, कुम्हारों, हस्तशिल्पियों, मिठाई विक्रेताओं और घरेलू उत्पाद बनाने वाले लोगों की आजीविका भी इस त्योहार से जुड़ी होती है।

लेकिन आधुनिकता और दिखावे की दौड़ में दीपावली का वास्तविक उद्देश्य कहीं पीछे नहीं छूटना चाहिए। आज कई बार त्योहार की खुशियां महंगे उपहारों, बड़ी खरीदारी और भव्य सजावट तक सीमित हो जाती हैं। समाज में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह पर्व कई बार खुशियों के बजाय आर्थिक दबाव का कारण बन जाता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हम अपनी खुशियों के साथ दूसरों की परिस्थितियों को भी समझें।

दीपावली पर स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों से खरीदारी करना भी समाज और अर्थव्यवस्था के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। मिट्टी के दीये खरीदकर हम उन कुम्हार परिवारों के जीवन में भी रोशनी ला सकते हैं, जिनकी मेहनत से हमारी परंपराएं जीवित हैं। स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहन देना केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम भी है।

जरूरतमंदों के घर तक पहुंचे दीपावली की खुशियां

किसी भी त्योहार की असली खूबसूरती तब बढ़ती है, जब उसकी खुशियां समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। हमारे आसपास ऐसे अनेक परिवार हैं, जिनके लिए नए कपड़े खरीदना, मिठाई लाना और घर में दीप जलाना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। कहीं आर्थिक तंगी है तो कहीं परिवार का कोई सदस्य बीमारी से जूझ रहा है। कहीं किसी घर में अपनों के बिछड़ने का दुख है तो कहीं अकेलेपन का अंधेरा।

ऐसे परिवारों के लिए हमारी छोटी-सी पहल भी बहुत बड़ी खुशी बन सकती है। किसी जरूरतमंद परिवार को राशन देना, बच्चों को कपड़े और मिठाई देना, बुजुर्गों के साथ समय बिताना या किसी गरीब की आर्थिक सहायता करना दीपावली का सबसे सुंदर उपहार हो सकता है। त्योहार का अर्थ केवल अपने घर को रोशन करना नहीं, बल्कि किसी दूसरे के जीवन में भी उम्मीद की किरण जगाना है।

समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि हर सक्षम व्यक्ति एक जरूरतमंद परिवार की दीपावली खुशहाल बनाने का संकल्प ले, तो समाज में कोई भी घर पूरी तरह अंधेरे में नहीं रहेगा।

पर्यावरण की सुरक्षा के साथ मनाएं सुरक्षित दीपावली

बदलते समय में दीपावली मनाने के तरीकों पर भी विचार करना जरूरी है। आतिशबाजी और पटाखों के कारण वायु तथा ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। इसका प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों, सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों और पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है, वहीं तेज आवाज कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है।

दीपावली खुशियों का त्योहार है, किसी की परेशानी बढ़ाने का नहीं। इसलिए हमें ऐसी दीपावली मनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जिसमें उत्सव का आनंद भी हो और पर्यावरण की सुरक्षा भी। मिट्टी के दीपक जलाना, घरों को प्राकृतिक सजावट से सजाना, स्वच्छता का ध्यान रखना और तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनाना हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

विशेष रूप से बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि त्योहार का आनंद दूसरों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखते हुए ही लेना चाहिए। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें ऐसी परंपराएं विकसित करनी चाहिए, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी गर्व के साथ अपना सकें।

सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देती है दीपावली

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और आपसी एकता है। यहां अलग-अलग धर्मों, भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं। त्योहार इस सामाजिक एकता को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। दीपावली हमें सिखाती है कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और प्रेम से ही समाज मजबूत बनता है।

आज के दौर में जब समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब आपसी विश्वास और सद्भाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव, सामाजिक दूरियां और आपसी वैमनस्य किसी भी समाज की प्रगति में बाधा बनते हैं। ऐसे समय में दीपावली का संदेश हमें एक-दूसरे के करीब आने, रिश्तों में मिठास घोलने और पुराने गिले-शिकवे भुलाने की प्रेरणा देता है।

हमें यह समझना होगा कि दीपावली का प्रकाश किसी एक घर, परिवार या वर्ग तक सीमित नहीं है। यह पूरे समाज को जोड़ने वाला उत्सव है। जब पड़ोसी एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, परिवार के सदस्य साथ बैठते हैं और लोग एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं, तभी त्योहार का वास्तविक स्वरूप सामने आता है।

अंधविश्वास और नकारात्मकता से दूर, सकारात्मक सोच अपनाने का पर्व

दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इनकी आराधना के पीछे जीवन में सुख-समृद्धि के साथ ज्ञान और विवेक की कामना भी छिपी है।

लेकिन समृद्धि का अर्थ केवल धन-संपत्ति नहीं होना चाहिए। वास्तविक समृद्धि वह है, जहां परिवार में प्रेम हो, बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, बुजुर्गों का सम्मान हो, महिलाओं को सुरक्षा और समान अवसर मिलें तथा समाज में जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता बनी रहे। धन के साथ संस्कार, सफलता के साथ विनम्रता और अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध भी जरूरी है।

हमें दीपावली को आत्ममंथन का अवसर बनाना चाहिए। अपने व्यवहार में सुधार, रिश्तों में विश्वास, समाज के प्रति जिम्मेदारी और देश के विकास में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए। यही वह प्रकाश है, जो केवल एक रात नहीं, बल्कि पूरे जीवन को रोशन कर सकता है।

लोकतंत्र में सकारात्मक पत्रकारिता की भी है अपनी जिम्मेदारी

एक जिम्मेदार समाचार संस्थान के रूप में वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस परिवार का मानना है कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज को बेहतर दिशा देने का भी माध्यम हैं। पत्रकारिता का दायित्व केवल घटनाओं और खबरों को पाठकों तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना भी है।

समाज में जहां अन्याय, भ्रष्टाचार, अपराध और अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाना पत्रकारिता का कर्तव्य है, वहीं अच्छे कार्यों, सामाजिक सहयोग, मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक बदलावों को सामने लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दीपावली के इस पावन अवसर पर हम सभी पाठकों से अपील करते हैं कि वे अपने आसपास खुशियों का वातावरण बनाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और सामाजिक एकता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।

आइए, इस दीपावली नया संकल्प लें

इस दीपावली पर हम केवल घरों में दीपक जलाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने जीवन में भी कुछ नए संकल्पों को स्थान दें। किसी से द्वेष न रखने, जरूरतमंद की मदद करने, पर्यावरण को सुरक्षित रखने, बुजुर्गों का सम्मान करने, बच्चों को बेहतर संस्कार देने और समाज में भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लें।

याद रखिए, अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक उसे चुनौती देने के लिए पर्याप्त होता है। उसी तरह समाज में फैली नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा सकारात्मक प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकता है। जरूरत केवल इतनी है कि हम शुरुआत स्वयं से करें।

दीपावली का पर्व हमें यही प्रेरणा देता है कि जीवन में कभी उम्मीद का दामन न छोड़ें। परिस्थितियां बदलती रहती हैं, समय के साथ कठिनाइयां भी दूर होती हैं, लेकिन जो व्यक्ति अपने भीतर विश्वास, प्रेम और मानवता का दीप जलाए रखता है, उसका जीवन सदैव प्रकाशमान रहता है।

*वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस परिवार की ओर से समस्त देशवासियों, सम्मानित पाठकों, विज्ञापनदाताओं, सहयोगियों, शुभचिंतकों और अपने सभी संवाददाता साथियों को दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं।*

ईश्वर से प्रार्थना है कि यह दीपावली सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। हर घर में खुशियों के दीप जलें, हर चेहरे पर मुस्कान हो, हर परिवार में प्रेम बना रहे और समाज में सद्भाव की रोशनी निरंतर फैलती रहे।

दीप से दीप जलता रहे, खुशियों का कारवां चलता रहे।
हर दिल में प्रेम का उजियारा हो, हर घर में सुख-समृद्धि का बसेरा हो।**

-शुभ दीपावली!

 वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस परिवार

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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