नसड़ा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति, विशाल भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु
कथाव्यास पंडित रमन शुक्ल ने बताया भागवत कथा का आध्यात्मिक महत्व, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का दिया संदेश

नर्वल (कानपुर नगर)। नर्वल क्षेत्र के नसड़ा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधि-विधान के साथ समापन हुआ। कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। भारतीय थल सेना में कार्यरत जितेंद्र सिंह एवं आनंद सिंह के संयोजन में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम की प्रथम बेला में कथाव्यास पंडित रमन जी शुक्ल ने सात दिनों तक चली श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक यात्रा है। कथा के माध्यम से मनुष्य को धर्म, कर्म, प्रेम, करुणा, त्याग और सेवा का महत्व समझने का अवसर मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं उनके उपदेशों का श्रवण व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा का नियमित श्रवण मन को शांति प्रदान करने तथा विचारों में सकारात्मकता लाने का माध्यम है। सात दिनों तक कथा सुनने से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करने, अपने आचरण में सुधार लाने और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में सदाचार, प्रेम और परोपकार को स्थान देता है, तब उसके व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है।
उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मनुष्य को जीवन के विभिन्न पहलुओं का बोध कराती हैं। कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की भावना विकसित होती है। भक्ति व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ती है, ज्ञान उसे सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता देता है, जबकि वैराग्य जीवन में मोह-माया के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म के सिद्धांतों को अपनाते हुए जरूरतमंदों की सहायता और समाज की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
पंडित रमन शुक्ल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति को अपने कर्मों पर विचार करने और जीवन में सुधार लाने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से भगवान का स्मरण और भक्ति करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कथा से प्राप्त शिक्षाओं को केवल आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में भी उतारें। परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव और जरूरतमंदों के प्रति सहयोग की भावना ही धार्मिक शिक्षाओं का वास्तविक उद्देश्य है।
कथा के सातों दिनों में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया। इनमें पूर्व विधायक लाल सिंह तोमर, सरसौल प्रधान संघ के अध्यक्ष रोहित तोमर, सवायजपुर प्रधान रतन राठौर, दीपू भदौरिया, अतुल सिंह तोमर तथा नर्वल थानाध्यक्ष सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे। कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर भी गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता और आपसी सहयोग की भावना भी देखने को मिली।
नसड़ा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति ने क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन का समापन भक्ति, सेवा और सद्भाव के संदेश के साथ हुआ।


