1200 मीटर की सड़क का 120 दिन चलना भी मुश्किल! पुरानी सड़क पर ही डामरीकरण, गुणवत्ता पर उठे सवाल
बिधनू में मझावन से नमक फैक्ट्री तक बन रही सड़क में मानकों की अनदेखी के आरोप, वर्षों से जर्जर मार्ग की मरम्मत से लोगों को थी बड़ी उम्मीद
कानपुर। बिधनू ब्लॉक में मझावन से नमक फैक्ट्री तक करीब 1200 मीटर लंबी सड़क का डामरीकरण कराया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से ठेकेदार के माध्यम से कराए जा रहे इस कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। वर्षों से जर्जर सड़क से परेशान लोगों को उम्मीद थी कि नई सड़क बनने के बाद उन्हें आवागमन में राहत मिलेगी और लंबे समय तक खराब रास्ते से निजात मिलेगी। लेकिन निर्माण कार्य के तरीके को लेकर उठ रहे सवालों ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुरानी जर्जर सड़क को उखाड़कर या उसकी खराब सतह का उचित उपचार करने के बजाय उसी के ऊपर डामर से सनी गिट्टियों की परत बिछाई जा रही है। आरोप है कि मलबा हटाने और सड़क की सतह तैयार करने के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, तो नई सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, सड़क निर्माण में पुरानी सतह को हर स्थिति में पूरी तरह उखाड़ना अनिवार्य नहीं होता। यदि मौजूदा सड़क की संरचना मजबूत है और तकनीकी जांच के बाद उसके ऊपर नई परत बिछाने का प्रावधान स्वीकृत है, तो ऐसा किया जा सकता है। लेकिन यदि सड़क की सतह जगह-जगह से टूट चुकी है, गड्ढे हैं, आधार कमजोर है या पानी भरने की समस्या है, तो केवल ऊपर से डामर और गिट्टी डालना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। ऐसे में खराब हिस्सों की मरम्मत, आवश्यकतानुसार पुरानी परत हटाने और आधार को मजबूत करने की जरूरत होती है।
क्या कहते हैं सड़क निर्माण के मानक?
सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सड़क की स्थिति, यातायात का दबाव, मिट्टी की क्षमता, प्रस्तावित निर्माण की मोटाई और स्वीकृत तकनीकी डिजाइन को ध्यान में रखा जाता है। पीडब्ल्यूडी के संबंधित कार्य में लागू अनुबंध और तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार ही निर्माण कराया जाना चाहिए। बिटुमिनस सड़कों के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के विनिर्देशों में सतह की तैयारी, प्राइम कोट, टैक कोट, डामर मिश्रण बिछाने, रोलर से दबाव देने और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
“MoRTH के आधिकारिक तकनीकी विनिर्देश और दिशा-निर्देश”/

1. पुरानी सड़क की जांच और सतह की तैयारी जरूरी
नई परत बिछाने से पहले इंजीनियर को मौजूदा सड़क की स्थिति का आकलन करना चाहिए। सड़क पर गड्ढे, दरारें, उखड़ी हुई गिट्टी, धंसाव या पानी जमा होने जैसी समस्याओं की पहचान जरूरी है। आवश्यकता के अनुसार खराब हिस्सों को काटकर हटाया जाता है, गड्ढों की मरम्मत की जाती है और कमजोर आधार को ठीक किया जाता है। यदि पुरानी सड़क पर नई परत बिछाने का निर्णय लिया गया है, तो उसका तकनीकी औचित्य और स्वीकृत डिजाइन होना चाहिए।
2. गिट्टी और आधार की मजबूती
सड़क की मजबूती केवल ऊपर बिछाई गई काली परत पर निर्भर नहीं करती। इसके नीचे की मिट्टी, ग्रैन्युलर सब-बेस और बेस कोर्स भी महत्वपूर्ण होते हैं। जहां परियोजना के डिजाइन में इन परतों का प्रावधान हो, वहां निर्धारित सामग्री, मोटाई और संघनन का पालन किया जाना चाहिए। कमजोर आधार पर बनाई गई सड़क में दरारें, धंसाव और गड्ढे बनने की आशंका बढ़ सकती है।
3. डामर बिछाने से पहले प्राइम कोट और टैक कोट
तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार अलग-अलग सतहों पर प्राइम कोट या टैक कोट की जरूरत पड़ सकती है। प्राइम कोट तैयार दानेदार आधार पर लगाया जाता है, जबकि टैक कोट पुरानी बिटुमिनस सतह और नई परत के बीच उचित जुड़ाव बनाने में मदद करता है। सतह की सफाई, सामग्री की निर्धारित मात्रा और समान रूप से छिड़काव महत्वपूर्ण हैं। कौन-सा कोट और कितनी मात्रा इस्तेमाल होगी, यह संबंधित कार्य के स्वीकृत डिजाइन और अनुबंध पर निर्भर करता है।
4. डामर और गिट्टी का सही मिश्रण
सड़क में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी निर्धारित गुणवत्ता और आकार की होनी चाहिए। डामर की मात्रा, गिट्टी की ग्रेडिंग और मिश्रण का अनुपात तकनीकी डिजाइन के अनुरूप होना जरूरी है। जहां हॉट-मिक्स का प्रावधान हो, वहां मिश्रण तैयार करने, उसे कार्यस्थल तक पहुंचाने और बिछाने के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखना भी जरूरी है। केवल गिट्टियों पर डामर डाल देना हर प्रकार के बिटुमिनस सड़क निर्माण का विकल्प नहीं है।
5. रोलर से उचित दबाव और निर्धारित मोटाई
डामर मिश्रण बिछाने के बाद उपयुक्त रोलर से उसका संघनन किया जाता है। इससे परत में खाली जगह कम होती है और आवश्यक घनत्व प्राप्त करने में मदद मिलती है। रोलिंग का तरीका, तापमान, परत की मोटाई और संघनन का स्तर संबंधित तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार होना चाहिए। सड़क की वास्तविक मोटाई और घनत्व की जांच किए बिना केवल ऊपर से देखने पर उसकी गुणवत्ता का सही आकलन नहीं किया जा सकता।
6. पानी की निकासी और सड़क का ढाल
सड़क की उम्र बढ़ाने में जल निकासी की अहम भूमिका होती है। सड़क का निर्धारित क्रॉस-फॉल, किनारों की ऊंचाई और नालियों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि बारिश का पानी सड़क पर जमा न हो। यदि पानी सड़क की परतों में प्रवेश करता है या लंबे समय तक जमा रहता है, तो सड़क जल्दी खराब हो सकती है। इसलिए निर्माण के दौरान सतह की समतलता और ढाल की जांच भी जरूरी है।
1200 मीटर सड़क की गुणवत्ता की जांच कैसे हो?
इस सड़क के निर्माण में लगाए जा रहे सरकारी धन का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर निरीक्षण करना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
- स्वीकृत एस्टीमेट और कार्यादेश: सड़क की लंबाई, चौड़ाई, निर्धारित मोटाई, निर्माण की विधि और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का विवरण देखा जाए।
- मौके पर माप: सड़क की लंबाई, चौड़ाई और विभिन्न परतों की मोटाई का मापन कराया जाए।
- सामग्री की जांच: गिट्टी की गुणवत्ता, डामर की निर्धारित मात्रा और मिश्रण के तकनीकी मानकों की जांच की जाए।
- संघनन की जांच: जहां लागू हो, वहां निर्धारित परीक्षणों से परत का घनत्व और मजबूती सुनिश्चित की जाए।
- गुणवत्ता रजिस्टर: निर्माण के दौरान किए गए परीक्षणों और उनके परिणामों का रिकॉर्ड देखा जाए। उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था में परीक्षणों तथा गैर-अनुपालन की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण रजिस्टर का प्रावधान दिया गया है।
अधिकारियों की निगरानी पर भी खड़े हुए सवाल
सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। संबंधित विभाग के अभियंताओं को स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार काम की निगरानी करनी चाहिए। यदि निर्माण के दौरान मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार सुधार कराया जाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित सामग्री और सड़क की परतों के नमूने लेकर परीक्षण भी कराया जा सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण करें और यह स्पष्ट करें कि पुरानी सड़क की सतह को किस तकनीकी आधार पर बरकरार रखा गया है। साथ ही, सड़क की निर्धारित मोटाई, डामर की मात्रा और इस्तेमाल की जा रही गिट्टी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।


