किताबों की खुशबू और साहित्यिक सुरों के बीच आज संपन्न होगा राष्ट्रीय पुस्तक मेला
लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में सजा 23वां पुस्तक मेला अंतिम दिन भी रहेगा आकर्षण का केंद्र, विमोचन, सम्मान समारोह और साहित्यिक आयोजनों ने बढ़ाई रौनक
लखनऊ। किताबों की दुनिया, साहित्यिक संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से गुलजार 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला रविवार को संपन्न हो जाएगा। बलरामपुर गार्डन में आयोजित इस मेले के अंतिम दिनों में पुस्तक प्रेमियों की भीड़ बढ़ी। लखनऊ के अलावा दूसरे शहरों से भी पाठक, लेखक, साहित्यकार और कलाकार यहां पहुंचे। किताबों के स्टॉल पर युवाओं की मौजूदगी ने आयोजकों और पुस्तक विक्रेताओं का उत्साह बढ़ाया। पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह और साहित्यिक कार्यक्रमों ने मेले को विशेष पहचान दी। पूरे आयोजन के दौरान लोगों को अपनी पसंद की किताबें तलाशने, लेखकों से मिलने और साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिला।
दूर-दराज से पहुंचे पुस्तक प्रेमी, युवाओं में खास उत्साह
पुस्तक मेले में इस बार अलग-अलग शहरों से आए पाठकों की भागीदारी देखने को मिली। बीकानेर से 26 पुस्तकों के रचयिता शिवशंकर सैनी विशेष रूप से मेले में पहुंचे। बाराबंकी के रंगकर्मी सुधीर भी तीसरी बार पुस्तक मेले का हिस्सा बने। वहीं, सीतापुर से आए केशव अपने मित्रों राघवेंद्र और नरेश के साथ करीब नौ हजार रुपये की किताबें खरीदकर ले गए। इन उदाहरणों से मेले में पुस्तकों के प्रति पाठकों की रुचि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बदायूं से आईं कवयित्री सोनरूपा विशाल ने भी साहित्यिक आयोजनों में हिस्सा लिया। पुस्तक विक्रेताओं के मुताबिक, इस बार युवाओं ने किताबों में विशेष दिलचस्पी दिखाई। विभिन्न विषयों की पुस्तकों को देखने, पसंदीदा लेखकों की रचनाएं खरीदने और नई किताबों के बारे में जानकारी लेने के लिए युवा स्टॉलों पर पहुंचते रहे। इससे यह संकेत मिला कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बावजूद छपी हुई किताबों के प्रति पाठकों का आकर्षण बना हुआ है।
विमोचन और सम्मान समारोह ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
राष्ट्रीय पुस्तक मेले में साहित्यिक गतिविधियों के साथ सम्मान समारोह और पुस्तक विमोचन भी प्रमुख आकर्षण रहे। आयोजन के दौरान चिकित्सकों, शिक्षाविदों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। ऐसे कार्यक्रमों ने साहित्य, शिक्षा और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को एक मंच पर आने का अवसर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र की पुस्तक ‘दिल्ली दरबार’ और डॉ. अभिनव दीक्षित की ‘हिडेन वेटलैंड्स’ भी चर्चा में रहीं। पुस्तकों के माध्यम से पाठकों को अलग-अलग विषयों पर विचार करने और नई जानकारियां हासिल करने का अवसर मिला। पुस्तक विमोचन जैसे कार्यक्रम लेखकों को पाठकों तक अपनी रचनाएं पहुंचाने का मंच देते हैं। वहीं, सम्मान समारोह साहित्य और ज्ञान के क्षेत्र में किए गए कार्यों को पहचान दिलाने का माध्यम बनते हैं। इन गतिविधियों ने मेले के अंतिम चरण को भी खास बनाया।
साहित्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी जागरूकता
पुस्तक मेले में साहित्यिक आयोजनों के अलावा सामाजिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। एमिटी विश्वविद्यालय की ओर से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर लगाया गया। इस पहल के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और इससे जुड़े विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
किसी पुस्तक मेले का उद्देश्य केवल किताबों की बिक्री तक सीमित नहीं होता। ऐसे आयोजन पाठकों को ज्ञान, विचार और सामाजिक मुद्दों से जोड़ने का अवसर भी देते हैं। साहित्यिक चर्चाओं के साथ जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन मेले के दायरे को व्यापक बनाता है। इससे अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को अपनी रुचि के अनुसार गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलता है।
अंतिम दिन तक बनी रही रौनक
बलरामपुर गार्डन में आयोजित 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले ने पाठकों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान किया। अलग-अलग शहरों से आए लोगों की भागीदारी, पुस्तकों की खरीदारी, विमोचन समारोह और साहित्यिक गतिविधियों ने आयोजन को यादगार बनाया। खास तौर पर युवाओं की मौजूदगी ने पुस्तक विक्रेताओं को उत्साहित किया।
रविवार को मेले का समापन होने के साथ ही यहां सजे पुस्तक स्टॉल और साहित्यिक गतिविधियां समाप्त हो जाएंगी, लेकिन पाठकों के लिए नई किताबों और विचारों की तलाश जारी रहेगी। ऐसे आयोजन पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने, लेखकों को पाठकों से जोड़ने और साहित्यिक संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

