नगर निगम टेंडर घोटाला: एसआईटी के सामने गोविंद शर्मा ने खोले कई राज
पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर वसूली के आरोप, 40 प्रतिशत कमीशन बांटने का दावा; हॉट मिक्स प्लांट और बैंक खातों का मांगा ब्योरा
कानपुर। नगर निगम में टेंडर और फर्मों से जुड़े कथित घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के सामने ठेकेदार गोविंद शर्मा से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आई हैं। नोटिस मिलने के बाद दूसरी बार स्वरूप नगर थाने पहुंचे गोविंद शर्मा से एसआईटी ने करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान टीम ने उससे 20 से अधिक सवाल पूछे। पूछताछ में गोविंद ने पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े कई आरोप लगाए और नगर निगम में कथित कमीशन व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।
हालांकि, गोविंद शर्मा इस बार भी टेंडर और बैंक खातों से संबंधित मांगे गए दस्तावेज लेकर नहीं पहुंचा। उसने तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए एसआईटी से दो-तीन दिन का समय मांगा है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेज मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर वसूली का आरोप
सूत्रों के अनुसार पूछताछ में गोविंद शर्मा ने आरोप लगाया कि पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन का इस्तेमाल कथित तौर पर वसूली के लिए किया जाता था। उसका दावा है कि कई विकास कार्यों के लिए संबंधित पार्षदों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना पड़ता था और इसके लिए कथित रूप से पैसे की मांग की जाती थी।
गोविंद ने एसआईटी को बताया कि यदि कोई सड़क दो अलग-अलग वार्डों से होकर गुजरती है तो दोनों वार्डों के पार्षदों से एनओसी लेना जरूरी होता था। उसके आरोप के मुताबिक एसोसिएशन के माध्यम से भुगतान किए जाने के बाद ही एनओसी दी जाती थी।
उसने यह भी दावा किया कि नगर निगम में बड़ी संख्या में विकास कार्य उन वार्डों में होते थे, जहां पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े पार्षद थे। एसआईटी ने इन आरोपों को जांच के दायरे में शामिल किया है।
टेंडर की रकम में 40 प्रतिशत बंटने का दावा
पूछताछ में गोविंद शर्मा ने नगर निगम के टेंडरों में कथित कमीशन व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगाए। उसके अनुसार टेंडर की कुल रकम का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा पार्षदों से लेकर मुख्य अभियंता स्तर तक के अधिकारियों के बीच बांटा जाता था। उसने दावा किया कि ठेकेदार करीब 20 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था और बची रकम से विकास कार्य कराया जाता था।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी अब गोविंद शर्मा द्वारा बताए गए नामों और आरोपों की जांच दस्तावेजों, बैंक खातों और नगर निगम के रिकॉर्ड से करने की तैयारी में है।
हॉट मिक्स प्लांट की मशीनरी और दस्तावेज मांगे
एसआईटी ने पूछताछ के दौरान गोविंद शर्मा से उसके हॉट मिक्स प्लांट के बारे में भी जानकारी ली। टीम ने पूछा कि प्लांट के संचालन के लिए उसके पास कौन-कौन सी मशीनरी उपलब्ध है। इसके अलावा प्लांट से संबंधित अभिलेख, उनके नवीनीकरण के रिकॉर्ड और नगर निगम में ठेकेदार फर्म के पंजीकरण के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई।
पुलिस ने उसकी फर्म के दस्तावेजों के साथ बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिकॉर्ड, आयकर संबंधी दस्तावेज और उसके द्वारा कराए गए कार्यों के गुणवत्ता प्रमाणपत्र भी मांगे हैं। इसके अलावा नगर निगम के किन अधिकारियों और कर्मचारियों से उसका संपर्क रहा और कथित गड़बड़ी में किसकी भूमिका रही, इस संबंध में भी सवाल पूछे गए।
दस्तावेज लेकर नहीं पहुंचा गोविंद
एसआईटी ने पहले ही गोविंद शर्मा को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। दूसरी बार बयान दर्ज कराने के दौरान भी वह मुकदमे और वित्तीय लेनदेन से संबंधित सभी अभिलेख लेकर नहीं पहुंचा। उसने अपनी तबीयत खराब होने की बात बताते हुए दो से तीन दिन का समय मांगा है।
एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के अनुसार गोविंद शर्मा को नोटिस देकर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। उससे फर्म, हॉट मिक्स प्लांट, वित्तीय लेनदेन और कराए गए कार्यों से संबंधित प्रमाणपत्र व अन्य अभिलेख मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि गोविंद ने कुछ दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं और उन्हें दो-तीन दिन में देने की बात कही है।
रंगदारी के मुकदमे में भी आरोपी है गोविंद
नगर निगम में टेंडर और फर्मों से जुड़े मामले में पुलिस ने पहले कई एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें नगर निगम अधिकारियों की ओर से फर्मों के खिलाफ स्वरूप नगर थाने में मुकदमे दर्ज कराए गए थे। वहीं ठेकेदार सनी सिंह की तहरीर पर फजलगंज थाने में गोविंद शर्मा, रज्जन बाजपेई और संदीप जैन के खिलाफ रंगदारी का मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस रज्जन बाजपेई और संदीप जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं गोविंद शर्मा गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत ने उसे जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक दी थी।
बैंक खातों और निगम रिकॉर्ड से होगी आरोपों की पड़ताल
अब एसआईटी की जांच में गोविंद शर्मा के बयानों के साथ उसके बैंक खातों, फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड, जीएसटी और आयकर दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम में जारी टेंडरों, एनओसी, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों-पार्षदों की भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जाने की बात सामने आई है।
एसआईटी यह भी जांचेगी कि गोविंद शर्मा द्वारा लगाए गए कमीशन और वसूली के आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी या वित्तीय साक्ष्य मौजूद है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों में शामिल लोगों की भूमिका और पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

