अब 6 हजार वर्गमीटर तक जमीन का लैंड यूज बदलेगा केडीए बोर्ड
शासन की मंजूरी के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर, नई व्यवस्था से आवेदकों को मिलेगी राहत; शुल्क में भी 5 से 50 फीसदी तक कमी
कानपुर। जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज) बदलवाने के लिए अब लोगों को शासन स्तर पर फाइल भेजे जाने और मंजूरी के लिए महीनों इंतजार करने से राहत मिलेगी। शासन ने छह हजार वर्गमीटर तक क्षेत्रफल वाली जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) बोर्ड को दे दिया है। अब इस सीमा तक के मामलों में केडीए बोर्ड ही आवेदन पर निर्णय ले सकेगा। इस संबंध में शासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद छह हजार वर्गमीटर तक की जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदकों को शासन के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं छह हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली जमीन के मामलों में पहले की तरह शासन से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
महीनों लंबित रहती थीं फाइलें
अब तक भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े आवेदन पहले केडीए बोर्ड के सामने रखे जाते थे। बोर्ड से संस्तुति मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाता था। शासन स्तर पर फाइलों के निस्तारण में कई बार लंबा समय लग जाता था। इससे आवेदकों को अनुमति मिलने तक इंतजार करना पड़ता था और निर्माण या विकास संबंधी योजनाएं भी प्रभावित होती थीं।नई व्यवस्था में छह हजार वर्गमीटर तक के मामलों का निर्णय केडीए बोर्ड स्तर पर ही होने से प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होने की उम्मीद है। इससे आवेदकों को बार-बार शासन स्तर पर फाइल की स्थिति जानने या अनुमति के लिए चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
एक प्रतिशत की शर्त भी लागू
शासन ने अधिकार देने के साथ भू-उपयोग परिवर्तन पर एक महत्वपूर्ण शर्त भी लगाई है। इसके तहत किसी मौजूदा भू-उपयोग की कुल जमीन में से अधिकतम एक प्रतिशत तक ही भू-उपयोग परिवर्तन बोर्ड के स्तर से किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था से भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। संबंधित आदेश और अधिसूचना केडीए को प्राप्त हो गई है।
शुल्क में भी 5 से 50 फीसदी तक राहत
भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया के साथ शासन ने इसके लिए देय शुल्क में भी राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों में पांच से 50 प्रतिशत तक की कमी की गई है। इससे लैंड यूज बदलवाने वाले आवेदकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।पहले भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का भुगतान चार तिमाही किस्तों में एक वर्ष के भीतर करना होता था। इस पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू था। अब आवेदक चार तिमाही किस्तों में शुल्क का भुगतान एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) से एक प्रतिशत अधिक वार्षिक दर पर कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर आवेदक केडीए उपाध्यक्ष को आवेदन देकर भुगतान की अवधि को एक वर्ष तक और बढ़वा सकेंगे।
ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक सुविधाओं की जमीन रहेगी सुरक्षित
नई नियमावली में पर्यावरण और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी जमीन को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। ग्रीन बेल्ट यानी सड़क के किनारे या दो सड़कों के बीच पौधों, पेड़ों और हरियाली के लिए निर्धारित पट्टी के भू-उपयोग में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसी तरह मास्टर प्लान में सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित जमीन को भी दूसरे उपयोग में परिवर्तित नहीं किया जा सकेगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), पावर स्टेशन, बिजलीघर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क जैसी सुविधाओं के लिए निर्धारित जमीन शामिल है।
मास्टर प्लान के प्रावधानों का रखना होगा ध्यान
अधिकारियों के मुताबिक जिस भू-उपयोग की श्रेणी में जमीन को परिवर्तित किया जाना है, मास्टर प्लान में उस श्रेणी के लिए निर्धारित कुल क्षेत्रफल के एक प्रतिशत से अधिक भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदन नहीं होने चाहिए। भू-उपयोग परिवर्तन नियमावली में तीसरा संशोधन करने के बाद वर्ष 2026 में नई व्यवस्था जारी की गई है। शासन के इस फैसले से जहां प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की उम्मीद है, वहीं शुल्क में कमी से जमीन मालिकों और विकास कार्यों से जुड़े आवेदकों को आर्थिक राहत भी मिलेगी।

