सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइन…

सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइन…

सलमान की फिल्म पर पड़ेगा असर; हिंसा, ड्रग्स और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती

भारतीय फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को फिल्म सर्टिफिकेशन के नियमों में बदलाव किया है। नई गाइडलाइन ने 1991 में बनाए गए पुराने नियमों की जगह ली है। हालांकि सेंसरशिप के पुराने प्रावधानों को पूरी तरह बदला नहीं गया है, लेकिन क्रिएटिव फ्रीडम, सामाजिक बदलाव, उम्र के हिसाब से रेटिंग और कंटेंट से जुड़े नियमों को नए तरीके से स्पष्ट किया गया है।

नई गाइडलाइन में फिल्ममेकर्स को हिंसा, ड्रग्स, धूम्रपान, यौन हिंसा और महिलाओं के चित्रण को लेकर खास सावधानी बरतने को कहा गया है। साथ ही बच्चों और कमजोर वर्गों के चित्रण से जुड़े नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।

जानिए नई गाइडलाइन, किन फिल्मों पर पड़ेगा असर?

1. क्रिएटिव फ्रीडम और सेंसरशिप में संतुलन

नई गाइडलाइन के मुताबिक सेंसर बोर्ड को यह ध्यान रखना होगा कि फिल्मों में सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारी का पालन हो, लेकिन इसके नाम पर कलाकारों की रचनात्मक आजादी को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाए। यानी सेंसरशिप और क्रिएटिव फ्रीडम के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

2. हिंसा और अपराध का महिमामंडन नहीं

फिल्मों में हिंसा या अपराध को बढ़ावा देने या उसका महिमामंडन करने से बचना होगा। अपराध करने के तरीकों को इतनी विस्तार से दिखाने पर भी रोक होगी, जिससे लोगों को अपराध करने का तरीका मिल सके। बिना जरूरत की अत्यधिक हिंसा, क्रूरता और डरावने दृश्यों को भी कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

3. बच्चों से जुड़े कंटेंट पर सख्ती

बच्चों को हिंसा का शिकार, हिंसा करने वाला या जबरन हिंसा का गवाह बनाकर दिखाने वाले कंटेंट पर भी सख्ती की गई है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को दिखाने से भी बचने को कहा गया है।

4. दिव्यांग लोगों और जानवरों के साथ क्रूरता पर रोक

फिल्मों में जानवरों के साथ बिना जरूरत की क्रूरता दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने या उनके साथ दुर्व्यवहार दिखाने वाले कंटेंट को भी प्रतिबंधित किया गया है।

5. शराब, ड्रग्स और स्मोकिंग का महिमामंडन नहीं

फिल्मों में शराब पीने, ड्रग्स लेने या धूम्रपान को ग्लैमराइज करने से बचना होगा। नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक सब्सटेंस से जुड़े दृश्यों में निर्धारित एंटी-ड्रग चेतावनी दिखाना जरूरी होगा।

6. यौन हिंसा के ग्राफिक सीन नहीं

महिलाओं को अपमानजनक या नीचा दिखाने वाले कंटेंट पर भी रोक रहेगी। अगर कहानी के लिए यौन हिंसा दिखाना जरूरी है, तो उसे ग्राफिक या बेहद विस्तृत तरीके से नहीं दिखाया जा सकेगा। गाइडलाइन में यौन कंटेंट को भी जरूरत के मुताबिक सीमित रखने की बात कही गई है।

7. अश्लीलता और डबल मीनिंग डायलॉग पर भी नजर

फिल्मों में अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा और ऐसे डबल मीनिंग डायलॉग जो दर्शकों की ‘बेसर इंस्टिंक्ट्स’ को उकसाने वाले माने जाएं, उन पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहेंगे।

8. धर्म और समुदायों को लेकर सावधानी

किसी धर्म, नस्ल या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्दों या दृश्यों को दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा सांप्रदायिकता, अंधविश्वास, गैर-वैज्ञानिक सोच या ‘राष्ट्र-विरोधी’ विचारों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी प्रतिबंध रहेगा।

9. देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था

भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर रोक रहेगी। दूसरे देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रभावित करने वाली सामग्री को लेकर भी नियम लागू होंगे।

10. कोर्ट और मानहानि से जुड़े नियम

फिल्मों में मानहानिकारक सामग्री और अदालत की अवमानना से जुड़े कंटेंट पर भी रोक रहेगी। गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा कंटेंट जो अदालतों के प्रति अपमान, तिरस्कार या अनादर पैदा करता है या उनकी गरिमा को कमजोर करता है, वह अवमानना के दायरे में आ सकता है।

उम्र के हिसाब से भी होगा सर्टिफिकेशन

नई गाइडलाइन में U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ कैटेगरी को शामिल किया गया है। हालांकि ये कैटेगरी भी पूरी तरह नई नहीं हैं; इन्हें पहले ही 2024 के सर्टिफिकेशन और 2025 में गाइडलाइन में शामिल किया जा चुका था।

सलमान खान की फिल्म पर पड़ सकता है असर

सलमान खान जल्द ही फिल्म मातृभूमि में नजर आने वाले हैं। ये फिल्म भारत-चीन की झड़प पर बनी है, जिसमें जाहिर तौर पर चीन के खिलाफ कुछ सीन दिखाए जाएंगे, लेकिन नई गाइडलाइन से फिल्म पर बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि अब फिल्मों में ऐसे देशों के खिलाफ सीन नहीं रखे जा सकते, जिनसे भारत के संबंध अच्छे हैं। फिल्म पहले ही विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर है, पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, लेकिन आपत्ति होने पर इसे बदलकर मातृभूमि कर दिया गया है। फिल्म का ट्रेलर जारी होने के बाद इसकी काफी आलोचना हुई थी। इसे अब तक सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिला है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है। इस नई टीम में सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, एक्टर सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली सिनेमा के दिग्गज एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी का नाम प्रमुख है। नया बोर्ड सिनेमाग्राफ एक्ट के तहत 3 साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगा।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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