5600 करोड़ की साइबर ठगी में बैंककर्मियों की भूमिका पर शक, सर्वेयर ने फर्जी दस्तावेजों पर दिलाया 1.75 करोड़ का लोन

कानपुर। 18 राज्यों के लोगों से करीब 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। बोगस फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक खातों और उनमें हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन के बाद पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी के इस बड़े नेटवर्क में कुछ बैंककर्मी भी शामिल हो सकते हैं। एक बड़े सरकारी बैंक के सर्वेयर की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। आरोप है कि उसने गिरोह के सदस्य आरिफ को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1.75 करोड़ रुपये का लोन दिलाया और इसके बदले 20 लाख रुपये रिश्वत ली। संबंधित सर्वेयर वर्तमान में हरदोई में तैनात बताया जा रहा है।
14 बैंकों के 77 खाते मिले संदिग्ध
पुलिस ने गिरोह से जुड़े करीब 10 हजार बैंक खातों की पड़ताल की। इनमें 14 बैंकों के 77 खाते संदिग्ध मिले हैं। इन्हें सीज कराने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक इन खातों में करीब 5600 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ खातों से रकम निकालकर हवाला के जरिए इधर-उधर की गई।
जांच में तीन खातों में 200 करोड़ रुपये से अधिक, छह खातों में 100 करोड़ से ज्यादा, आठ खातों में 50 से 100 करोड़ और 41 खातों में एक से 50 करोड़ रुपये तक जमा होने की जानकारी मिली है।
एक खाते में सर्वाधिक 295.31 करोड़ रुपये मिले हैं, जो एसके इंटरप्राइजेज के नाम बताया जा रहा है। वहीं मोहम्मद अमान के नाम से खुले खाते में करीब 279 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। इसके अलावा हजारों ऐसे खाते भी मिले हैं, जिनमें एक से 50 लाख रुपये तक जमा किए गए।
86 शिकायतों में शाहजेब का नाम
पुलिस के अनुसार गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाता था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 86 शिकायतों में भी शाहजेब वारिस का नाम सामने आया है।
पुलिस ने शाहजेब को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। कानपुर लाने के बाद उसके साथी सलमान को भी पकड़ा गया। पूछताछ में शाहजेब को गिरोह का सरगना बताया गया है। उससे पूछताछ के आधार पर 14 साइबर ठगों के नाम सामने आए हैं। इनमें दो पहले से जेल में बंद हैं।
होटल से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
गिरोह का सदस्य इकलाख सेवानिवृत्त दारोगा का बेटा बताया जा रहा है। उसकी और उसके साथी आरिफ की लोकेशन मुंबई में मिली है। इकलाख ने कानपुर में लीज पर होटल ले रखा था और वहीं से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करता था।
जांच के मुताबिक इकलाख लोगों को लोन दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों से बोगस फर्में पंजीकृत कराकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। इकलाख के पांच खातों में करीब 41 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है।
ससुर पर भी मदद करने का आरोप
पुलिस जांच में इकलाख के ससुर की भूमिका भी सामने आई है। वह भी दारोगा रह चुका है और पूर्वी जोन के एक थाने में तैनात रहा है। आरोप है कि ससुर की मदद से स्क्रैप कारोबारियों, टेनरी संचालकों और स्लाटर हाउस फर्मों के खाते हासिल किए गए और उनमें ठगी की रकम मंगाई गई।
इकलाख के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से वर्ष 2024 में महज आठ दिन के भीतर 180 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। उस समय पुलिस की पूछताछ में इकलाख ने जीएसटी, शेयर ट्रेडिंग और अन्य कारोबार से जुड़े लेनदेन की जानकारी दी थी। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया था। अब इसी पुराने लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
19 अगस्त को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस ने 19 अगस्त को मोहम्मद शादाब की शिकायत पर साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज किया था। शादाब ने आरोप लगाया था कि शाहजेब वारिस, सलमान और आरिफ ने उनसे 25 लाख रुपये की ठगी की। जांच आगे बढ़ने पर मामला एक बड़े साइबर नेटवर्क तक पहुंच गया और अलग-अलग राज्यों में हुई ठगी तथा हजारों बैंक खातों का खुलासा हुआ।
इन राज्यों तक फैला ठगी का जाल
पुलिस के मुताबिक ठगी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हरियाणा तक फैला था।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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