पाकिस्तानी नेवी जहाज अरब सागर में भारतीय युद्धपोत से टकराया
दिल्ली में पाक हाईकमिश्नर तलब, 15 साल पहले भी टकराए थे भारतीय-पाकिस्तानी वॉरशिप
नई दिल्लीः अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर हुई। घटना उत्तर अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई।
भारत के मुताबिक, नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय युद्धपोत के पास पाकिस्तानी जहाज तेज रफ्तार में आया और असुरक्षित तरीके से दिशा बदली। इसी दौरान दोनों जहाज टकरा गए। घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, टक्कर में शामिल पाकिस्तानी जहाज का नाम पीएनएस हुनैन है। यह पाकिस्तान नौसेना का यारमूक क्लास का समुद्री गश्ती जहाज है, जिसका इस्तेमाल समुद्र में निगरानी और गश्त के लिए किया जाता है। भारतीय नौसेना के जिस जहाज से इसकी टक्कर हुई, उसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इसके बाद भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज के व्यवहार को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर बताया।
दिशा बदलने के दौरान दोनों की टक्कर हुई
एएनआई के मुताबिक, भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत उत्तर अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज तेज रफ्तार से भारतीय जहाज के करीब आ गया।
पाकिस्तानी जहाज ने जिस तरह अपनी दिशा बदली, उसे असुरक्षित और गैर-पेशेवर बताया गया है। इसके बाद दोनों जहाजों के बीच दूरी लगातार कम होती गई और आखिर में वे आपस में टकरा गए।
टक्कर में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, अभी दोनों जहाजों के नाम और टक्कर की सही जगह की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस घटना से जुड़ा यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है…
भारत ने 35 साल पुराने समझौते का उल्लंघन बताया
भारत ने कहा कि पाकिस्तानी जहाज का यह कदम अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के आर्टिकल 10 के खिलाफ है।
दरअसल, दोनों देशों ने पहले से तय कर रखा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्र में उनके युद्धपोत और पनडुब्बियां एक-दूसरे के बहुत करीब नहीं आएंगी। इसका मकसद जहाजों की टक्कर और समुद्र में किसी दूसरी दुर्घटना से बचना है।
इस समझौते में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों को लेकर कई नियम बनाए गए हैं। इनमें सैन्य अभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की जानकारी पहले देने के नियम भी शामिल हैं। साथ ही, समुद्र में युद्धपोतों और पनडुब्बियों के बीच दूरी को लेकर भी नियम तय किए गए हैं।
आर्टिकल 10 के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत और पनडुब्बियां एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील यानी करीब 5.56 किलोमीटर से कम दूरी पर नहीं आ सकते।
दरअसल, समुद्र में जमीन की तरह कोई साफ सीमा रेखा दिखाई नहीं देती। दोनों देशों के युद्धपोत और पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आसपास के इलाकों में काम कर सकते हैं। ऐसे में अगर दो देशों के सैन्य जहाज अचानक एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाएं या उनकी दिशा एक-दूसरे की तरफ हो जाए, तो टक्कर या तनाव की स्थिति बन सकती है।
भारत ने पाकिस्तान से क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी चार्ज डी’अफेयर्स से कहा कि वह भारत की आपत्ति पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। भारत ने कहा कि समुद्र में सभी सैन्य जहाजों को सावधानी से काम करना चाहिए और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन करना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय चार्ज डी’अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने भारत की ओर से विरोध दर्ज कराने को कहा गया है।
2011 में टकराए थे भारतीय-पाकिस्तानी जहाज
भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। 2011 में भारतीय नौसेना के INS दोगावरी और पाकिस्तानी नौसेना के पीएनएस बाबर के बीच भी टक्कर की स्थिति बनी थी।
टक्कर को लेकर पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारतीय जहाज ने उसके काम में रुकावट डाली और खतरनाक तरीके से जहाज चलाया।
भारत ने इस आरोप को गलत बताया। भारत के मुताबिक, पीएनएस बाबर ने आईएनएस गोदावरी को दाईं तरफ से पार करने की कोशिश की और इसी दौरान उसके हेलिकॉप्टर डेक वाले हिस्से से टकरा गया। इस दौरान हेलिकॉप्टर का जाल क्षतिग्रस्त हुआ था।
भारत ने तब भी 1991 के समझौते के आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया था।
पीएनएस बाबर, सोमालियाई समुद्री लुटेरों से छुड़ाए गए एमवी सुएज जहाज को सुरक्षित ले जा रहा था। यह मिस्र के मालिकाना हक वाला जहाज था।
इसे सोमालियाई समुद्री लुटेरों ने बंधक बना लिया था। बाद में करीब 20 लाख डॉलर से ज्यादा की फिरौती दिए जाने के बाद जहाज और उसके 22 सदस्यीय चालक दल को छोड़ा गया था।

