फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का हिंसक प्रदर्शन
पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन हिंसक हो गया है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कई जगह झड़प हुई, जिसमें करीब 1000 लोगों के घायल होने की खबर है। लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान ग्रेनेड फटने से हुए धमाके में 15 वर्षीय एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका हाथ उड़ गया। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले पिछले सप्ताह 14 वर्षीय ईडन नाम के छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की घटना सामने आई थी। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और उसे बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। हालात बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और प्रदर्शन के दौरान पांच हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें करीब 90 प्रतिशत नाबालिग छात्र बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने छात्रों की शिकायतों को जायज बताते हुए आंदोलन को शांत करने की कोशिश की है। सरकार ने मंत्रियों को छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर काम करने और अक्तूबर 2026 के अंत तक समाधान से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाना, जर्जर भवनों की मरम्मत करना, कक्षाओं में छात्रों की संख्या नियंत्रित करना और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की मांगों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए शिक्षण व्यवस्था को सामान्य बनाया जाए और हिंसा पर भी रोक लगाई जाए। लगातार बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन ने कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है। आंदोलन के हिंसक होने के कारण अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है और सरकार पर जल्द ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है।
400 से 500 स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित
फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था सामान्य नहीं होने के कारण करीब 400 से 500 उच्च विद्यालयों में कक्षाएं पूरी या आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हिंसा में शिक्षा विभाग के 85 कर्मचारी भी घायल हुए हैं। मंत्री ने मौजूदा स्थिति को अभूतपूर्व बताया है। प्रशासन अब प्रभावित स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है, ताकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जल्द से जल्द पढ़ाई बहाल की जा सके।
नाबालिग छात्रों की बड़ी भागीदारी
प्रदर्शनों में नाबालिग छात्रों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पांच हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत नाबालिग बताए जा रहे हैं। पुलिस कार्रवाई के दौरान छात्रों के घायल होने की घटनाओं ने भी विवाद को बढ़ाया है। सरकार ने छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर अक्टूबर के अंत तक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश देकर बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश की है। अब आंदोलन को शांत करना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लागू करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।

