अरामको मुख्यालय पर हूतियों का मिसाइल हमला, इमारत में लगी आग; रूस-चीन और ओमान युद्धविराम की कोशिश में जुटे

अरामको मुख्यालय पर हूतियों का मिसाइल हमला, इमारत में लगी आग; रूस-चीन और ओमान युद्धविराम की कोशिश में जुटे

रियाद। सऊदी अरब में जारी संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल सऊदी अरामको के दाहरान स्थित मुख्यालय पर हूती विद्रोहियों के बैलिस्टिक मिसाइल हमले की खबर है। हमले में मुख्यालय की ऊपरी तीन मंजिलों को भारी नुकसान पहुंचने और इमारत में आग लगने की सूचना है। इन मंजिलों पर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय बताए गए हैं। आग लगने के बाद इमारत से धुआं उठता दिखाई दिया और नुकसान बढ़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, हमले में हुए कुल नुकसान और हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सऊदी अरब की राजधानी रियाद और अल-खर्ज समेत कई अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी हूतियों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की खबर है। संघर्ष के कारण तेल प्रतिष्ठानों, हवाई यातायात और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच रूस, चीन और ओमान युद्धविराम कराने के प्रयासों में जुटे हैं। हूती राजनीतिक नेतृत्व की ओर से भी बातचीत के प्रयासों का स्वागत करने की बात कही गई है, लेकिन इसके लिए स्थायी शांति व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया है।

रियाद और अल-खर्ज भी निशाने पर

हूतियों के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार की रात किए गए हमलों में रियाद को बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। अल-खर्ज पर भी क्रूज मिसाइल से हमला किए जाने का दावा किया गया है। अल-खर्ज क्षेत्र में प्रिंस सुल्तान वायुसेना अड्डा और कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान स्थित हैं। इन ठिकानों की रणनीतिक अहमियत के कारण हमलों को सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

सऊदी अरब की ओर से इन हमलों में हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। हूतियों ने दावा किया है कि उनके हमले सना और यमन में तेल प्रतिष्ठानों पर सऊदी अरब की कार्रवाई के जवाब में किए गए। संगठन का कहना है कि उसने सऊदी अरब को पहले ही जवाबी कार्रवाई के बारे में चेतावनी दी थी। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

युद्धविराम के लिए रूस, चीन और ओमान सक्रिय

संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। हूती राजनीतिक शाखा के सदस्य मुहम्मद अल-बुखाती के अनुसार, ओमान दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है। रूस और चीन भी शांति स्थापित करने के प्रयासों में शामिल बताए गए हैं। हूती नेतृत्व ने कहा है कि युद्ध समाप्त कराने की हर गंभीर पहल का स्वागत किया जाएगा, लेकिन समझौता ऐसा होना चाहिए जो लंबे समय तक कायम रह सके।

इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संघर्ष में अमेरिका की संभावित भागीदारी पर विचार किए जाने की बात कही है। अमेरिका की भूमिका को लेकर इस बयान से क्षेत्रीय हालात पर अंतरराष्ट्रीय नजर और बढ़ गई है। यदि संघर्ष का विस्तार होता है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

तेल कारोबार और सऊदी अरब की प्रतिष्ठा पर असर

सितंबर से जारी हमलों ने सऊदी अरब के तेल, विमानन और पर्यटन क्षेत्रों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों की आशंका से ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। सऊदी अरब वैश्विक तेल बाजार में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए उसके ऊर्जा ढांचे पर किसी बड़े हमले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकता है।

सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिकी हथियारों का बड़ा खरीदार रहा है। इसके बावजूद हूती विद्रोहियों के हमलों को रोकने की चुनौती ने उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, संघर्ष की वास्तविक स्थिति और सैन्य नुकसान का आकलन करने के लिए स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी आवश्यक है।

रियाद एयरपोर्ट पर भी हताहतों की खबर

रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमलों में घायल कुछ लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद वहां हमलों में मरने वालों की संख्या 18 तक पहुंचने और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना दी गई। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। हवाई अड्डे जैसे नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमलों से आम लोगों की सुरक्षा और हवाई सेवाओं के संचालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।

यमन के तैज शहर में छह लाख लोगों पर खाद्य संकट

संघर्ष का असर यमन में आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, यमन के सरकारी नियंत्रण वाले तैज शहर में खाद्य संकट गहराने की आशंका है। शहर को हूती लड़ाकों की घेराबंदी का सामना करना पड़ रहा है और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी सैनिकों तथा हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष जारी है। इसके कारण बाहर से जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित होने की खबर है।

तैज में लगभग छह लाख लोगों के सामने खाद्य पदार्थों की कमी का खतरा बताया गया है। लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से भोजन, दवाओं और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे हालात में मानवीय सहायता पहुंचाना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है। युद्धविराम के प्रयासों की सफलता अब पूरे क्षेत्र के साथ यमन के प्रभावित नागरिकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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