भारत में पाकिस्तान-बांग्लादेश के गैर-मुस्लिमों पर सख्ती, वीजा लेना होगा
पहले हिंदू-सिख समेत 6 समुदायों को छूट थी; बदलाव के 5 पॉइंट्स

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को इमिग्रेशन नियमों में नए संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसमें पाकिस्तानी नागरिकों और भारतीय मूल के कुछ विदेशियों को पासपोर्ट रिन्यू कराने से राहत देने के साथ भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।
1. पाकिस्तानी नागरिकों के सामने वापस नहीं जाने की शर्त
पुराना नियम: पाकिस्तान का पासपोर्ट एक्सपायर होने पर उसे रिन्यू कराना जरूरी था। इसके लिए पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) की जरूरत पड़ती थी। CNIC नहीं होने पर लोगों को परेशानी होती थी।
नया नियम: 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत आए कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने से छूट दी गई है। यह राहत उन लोगों को मिलेगी, जो भारत में स्थायी रूप से रहने आए थे और CNIC नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें लिखित आश्वासन देना भी शामिल है कि वे दोबारा पाकिस्तान नहीं लौटेंगे।
2. मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोगों को राहत
पुराना नियम: मलेशिया या सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोगों को पासपोर्ट एक्सपायर होने पर उसे रिन्यू कराना पड़ता था।
नया नियम: 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले मलेशिया या सिंगापुर के पासपोर्ट पर भारत लौटे कुछ भारतीय मूल के लोगों को पासपोर्ट रिन्यू कराने से छूट दी गई है। यह छूट उन लोगों को मिलेगी, जिनका पासपोर्ट एक्सपायर हो चुका है और संबंधित देशों के नियमों के कारण वे उसे रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं।
भारतीय मूल का विदेशी नागरिक कौन होगा:
- ऐसा व्यक्ति, जो अब किसी दूसरे देश का नागरिक है, लेकिन उसका भारत से पुराना संबंध है।
- जिसके पास पहले भारत का पासपोर्ट था।
- जिसके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी का जन्म भारत में हुआ था और वे यहीं स्थायी रूप से रहते थे।
इस छूट के दायरे में पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल और चीन के नागरिक शामिल नहीं होंगे।
3. भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियम स्पष्ट किए
पुराना नियम: 2025 के आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों को एक-दूसरे के देशों में सीधे आने-जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा से छूट दी गई थी।
नया नियम: इन तीनों देशों के नागरिक जमीन या हवाई रास्ते से सीधे एक-दूसरे के यहां यात्रा करते समय वीजा मैनुअल में बताए गए पहचान पत्रों में से कोई एक दिखा सकेंगे। इमिग्रेशन अधिकारी जरूरत पड़ने पर उनसे अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकेंगे।
हालांकि, कुछ स्थितियों में पासपोर्ट और वीजा जरूरी होंगे-
- भारतीय नागरिक नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश (नेपाल और भूटान को छोड़कर) से आते या जाते हैं, तो उनके पास वैध पासपोर्ट होना चाहिए। उन्हें तय इमिग्रेशन पोस्ट से ही प्रवेश और निकास करना होगा।
- नेपाल और भूटान के जिन नागरिकों ने चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से यात्रा शुरू की हो या वहां से होकर आए हों, उन्हें वैध पासपोर्ट और वीजा रखना होगा।
4. श्रीलंकाई तमिल और तिब्बतियों को मिली छूट बरकरार
श्रीलंकाई तमिल: सितंबर 2025 के आदेश में 9 जनवरी 2015 या उससे पहले भारत में शरण लेने वाले रजिसटर्ड श्रीलंकाई तमिलों को पासपोर्ट और वीजा के सामान्य नियमों से छूट दी गई थी। नए आदेश में भी यह छूट जारी रखी गई है।
तिब्बती नागरिक: कुछ तिब्बतियों को भी पासपोर्ट और वीजा से छूट जारी रहेगी। इनमें वे लोग शामिल हैं, जो 1959 से 30 मई 2003 के बीच काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से परमिट लेकर भारत आए थे।
इसके अलावा 30 मई 2003 के बाद भारत-नेपाल सीमा के तय इमिग्रेशन पोस्ट से विशेष परमिट लेकर आए तिब्बती भी इसमें शामिल हैं। हालांकि, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना और उसका सर्टिफिकेट लेना होगा।
5. सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों को भी छूट
CAA और नए इमिग्रेशन आदेश, दोनों 6 गैर-मुस्लिम समुदायों से जुड़े
नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 और नए इमिग्रेशन आदेश, 2026 का संबंध पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों से है। इनमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।
हालांकि, दोनों का मकसद अलग है। CAA के तहत पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का रास्ता मिलता है, जबकि नया इमिग्रेशन आदेश उन्हें पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से छूट देता है।


