KDA में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज

KDA में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज
चार भूखंडों की फर्जी फ्री-होल्ड रजिस्ट्री में लिपिक बर्खास्त, विवादित प्लॉट दोबारा आवंटित करने पर वरिष्ठ लिपिक निलंबित; 12 लाख की घूस के आरोप में अमीन का डिमोशन
कानपुर। कानपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के मामलों के बीच अब कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) में भी अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई हुई है। गुरुवार को केडीए ने तीन अलग-अलग मामलों में तीन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। चार भूखंडों की फर्जी फ्री-होल्ड रजिस्ट्री के मामले में लिपिक प्रदीप कुमार सविता को बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, विवादित प्रॉपर्टी को खाली दिखाकर दोबारा प्लॉट आवंटित करने के आरोप में वरिष्ठ लिपिक कश्यप कांत द्विवेदी को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 12 लाख रुपये की रिश्वत के आरोप में पूर्व में निलंबित अमीन संतोष कुमार को मूल वेतनमान पर स्थायी रूप से पदावनत किया गया है।
चार भूखंडों की फ्री-होल्ड रजिस्ट्री में गड़बड़ी
मुखर्जी विहार के चार भूखंडों की फ्री-होल्ड रजिस्ट्री में अनियमितता की शिकायत के बाद केडीए में जांच शुरू हुई थी। मामला भूखंड संख्या 5, 13 एचआईजी, 10 एचआईजी और 11 से जुड़ा था। आरोप था कि गलत जानकारी देकर और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर इन भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई।
मामले में पहले सहायक अभियंता अमनदीप तिवारी को जांच अधिकारी बनाया गया था। बाद में केडीए सचिव अभय कुमार पांडेय ने प्रकरण की दोबारा जांच की। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर केडीए वीसी ने लिपिक प्रदीप कुमार सविता को बर्खास्त कर दिया।
12 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
दूसरी कार्रवाई अमीन संतोष कुमार के खिलाफ हुई। केडीए में मुआवजे के भुगतान से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता को 1.38 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा मिलने के बाद संतोष कुमार पर उससे ब्लैंक चेक लेने और 12 लाख रुपये दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप लगा।
इसके बाद टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए दोबारा 12 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया गया। संतोष कुमार को मई 2025 में निलंबित किया गया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी बहाली हुई। जांच जारी रहने के बाद अब उन्हें अमीन के मूल वेतनमान पर स्थायी रूप से पदावनत कर दिया गया है।
विवादित प्लॉट को खाली दिखाकर किया दोबारा आवंटन
तीसरी कार्रवाई वरिष्ठ लिपिक कश्यप कांत द्विवेदी के खिलाफ हुई। आरोप है कि उन्होंने एक विवादित प्रॉपर्टी को खाली दिखाकर उसका दोबारा प्लॉट आवंटन कर दिया। इससे संपत्ति को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई।
मामले में केडीए ने उन्हें निलंबित कर दिया है। कश्यप कांत द्विवेदी पूर्व में केडीए के एक वीसी के निजी सहायक (पीए) भी रह चुके हैं।
एक ही दिन तीन मामलों में कार्रवाई से केडीए में हड़कंप मचा है। अधिकारियों की जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद की गई इन कार्रवाइयों को प्राधिकरण में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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