‘वरुण’ में दिखी भारत-फ्रांस की समुद्री ताकत, नौसेनाओं ने किया संयुक्त युद्धाभ्यास

‘वरुण’ में दिखी भारत-फ्रांस की समुद्री ताकत, नौसेनाओं ने किया संयुक्त युद्धाभ्यास

भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘वरुण’ ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और समुद्री सहयोग को एक बार फिर सामने रखा। फ्रांस के टूलॉन में आयोजित 24वें संस्करण में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल ने हिस्सा लिया। अभ्यास में फ्रांसीसी नौसेना के एनएच-90 हेलिकॉप्टरों और अटलांटिक-2 समुद्री गश्ती विमानों ने भी भाग लिया। समुद्री चरण के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं ने पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह युद्ध और वास्तविक फायरिंग से जुड़े विभिन्न अभ्यास किए। इसके अलावा हेलिकॉप्टरों के एक-दूसरे के युद्धपोतों पर उतरने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, संचार और संयुक्त रूप से अभियान चलाने की क्षमता को और मजबूत करना था। आईएनएस त्रिशूल 22 सितंबर को टूलॉन पहुंचा था, जहां फ्रांसीसी नौसेना ने उसका वाटर कैनन सलामी के साथ स्वागत किया। इसके बाद बंदरगाह चरण में दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच कई पेशेवर, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। अधिकारियों ने अपने-अपने परिचालन अनुभव साझा किए और एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा कर उनकी कार्यप्रणाली को समझा। इस दौरान भारतीय नौसैनिक अधिकारियों और चालक दल को फ्रांसीसी नौसेना की संचालन व्यवस्था तथा समुद्री अभियानों से जुड़ी क्षमताओं को करीब से देखने का अवसर मिला।

मार्सेई में आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर, अधिकारियों और चालक दल ने मजार्ग युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस स्मारक पर विश्व युद्धों के दौरान बलिदान देने वाले 205 भारतीय सैनिकों की स्मृति जुड़ी है। भारतीय दल की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करना दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सैन्य संबंधों और साझा विरासत की याद दिलाने वाला अवसर रहा। अभ्यास के दौरान भारतीय नौसैनिकों ने फ्रांसीसी युद्धपोत चार्ल्स द गॉल, फोरबिन और ला फाएत का भी दौरा किया। इन यात्राओं के दौरान विमानवाहक पोत संचालन, नौसैनिक विमानन और युद्धपोतों से संबंधित सुविधाओं की जानकारी हासिल की गई। इससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिला। ‘वरुण’ अभ्यास का उद्देश्य केवल युद्धक क्षमताओं का परीक्षण करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को व्यावहारिक स्तर पर मजबूत करना भी है। संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से दोनों नौसेनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में समन्वित कार्रवाई की प्रक्रियाओं का अभ्यास करती हैं। पनडुब्बी रोधी अभियानों और सतह युद्ध से जुड़े अभ्यास समुद्री क्षेत्र में संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को परखने का अवसर देते हैं। वहीं हेलिकॉप्टर संचालन से जुड़े अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच हवाई और समुद्री संसाधनों के बेहतर तालमेल में मदद करते हैं। इस अभ्यास के जरिए भारत और फ्रांस ने समुद्री सुरक्षा, परिचालन सहयोग और पेशेवर आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समुद्री चरण में इन गतिविधियों पर रहा जोर

‘वरुण’ के समुद्री चरण में दोनों देशों के युद्धपोतों और विमानों ने संयुक्त रूप से कई अभ्यास किए। इनमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह युद्ध और वास्तविक फायरिंग शामिल रही। हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग और संचालन से जुड़े अभ्यास भी किए गए। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग प्लेटफॉर्म और दलों के बीच समन्वय को परखना तथा संयुक्त अभियान की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना रहा।

बंदरगाह चरण में पेशेवर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

टूलॉन में बंदरगाह चरण के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों और कर्मियों ने पेशेवर अनुभव साझा किए। युद्धपोतों के दौरे, खेल गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए आपसी संपर्क बढ़ाया गया। भारतीय दल ने फ्रांसीसी युद्धपोतों की सुविधाओं का अवलोकन किया और विमानवाहक पोत संचालन तथा नौसैनिक विमानन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी हासिल की। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर समझ और आपसी तालमेल को बढ़ावा मिला।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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