कानपुर में बनेगा सरकारी जमीनों का डिजिटल लैंड बैंक, एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी
ग्राम समाज, नजूल और सीलिंग की जमीनों की होगी डिजिटल मैपिंग, अतिक्रमण पर निगरानी होगी आसान
कानपुर। कानपुर में सरकारी जमीनों का ब्योरा अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। जिला प्रशासन जिले की ग्राम समाज, नजूल, सीलिंग और अन्य सरकारी जमीनों का डिजिटल लैंड बैंक तैयार कराएगा। इसके लिए खाली सरकारी भूमि की डिजिटल मैपिंग कराई जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने से सरकारी जमीनों की उपलब्धता का पता लगाने, विकास परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि चिह्नित करने और अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों की जांच में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर, लखनऊ से डिजिटल मैपिंग का विस्तृत परियोजना प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। प्रस्ताव में परियोजना की तकनीकी रूपरेखा, अनुमानित लागत, आवश्यक संसाधनों और जनपद में जीआईएस विशेषज्ञ की तैनाती से संबंधित विवरण मांगा गया है।
एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा सरकारी जमीनों का ब्योरा
जिले में विभिन्न विभागों के कार्यालयों, आवासीय भवनों और अन्य सरकारी परियोजनाओं के लिए समय-समय पर भूमि की आवश्यकता होती है। वर्तमान में उपयुक्त सरकारी जमीन चिह्नित करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटानी पड़ती है। डिजिटल लैंड बैंक तैयार होने से उपलब्ध सरकारी भूमि का समेकित विवरण एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगा। इससे संबंधित विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप जमीन की पहचान कर सकेंगे। भूमि चिह्नांकन और आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में भी सहायता मिलेगी।
अवैध कब्जों की शिकायतों की जांच होगी आसान
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों से संबंधित शिकायतें जनता दर्शन, तहसील दिवस और आईजीआरएस के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचती रहती हैं। डिजिटल मैपिंग से संबंधित भूमि की स्थिति और उपलब्धता का विवरण व्यवस्थित तरीके से प्राप्त किया जा सकेगा। इससे शिकायत में उल्लिखित जमीन की पहचान करने और संबंधित अभिलेखों के आधार पर जांच आगे बढ़ाने में प्रशासन को मदद मिलेगी। साथ ही सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की निगरानी करने में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
तकनीकी प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ेगी योजना
जिला प्रशासन ने परियोजना की तकनीकी और वित्तीय रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर, लखनऊ से प्रस्ताव मिलने के बाद योजना के क्रियान्वयन से संबंधित आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। डिजिटल लैंड बैंक बनने से सरकारी जमीनों के प्रबंधन, विकास कार्यों के लिए भूमि की उपलब्धता और अतिक्रमण संबंधी शिकायतों के निस्तारण में तकनीक का उपयोग बढ़ने की उम्मीद है।

