कानपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी, 40 दिन में 9 की गई जान; 13 वर्षीय तेंदुआ मुराद की मौत
चार दिन से बीमार था तेंदुआ, पैर के घाव को बार-बार नोचने से बिगड़ी हालत; डलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट की आशंका, जांच के लिए IVRI भेजे गए सैंपल
कानपुर। चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 40 दिनों के भीतर नौ वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। बुधवार को 13 वर्षीय तेंदुए मुराद ने भी दम तोड़ दिया। वह पिछले चार दिनों से बीमार था और उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। आशंका जताई जा रही है कि डलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया। उसके शरीर के सैंपल जांच के लिए बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भेजे गए हैं।
पैर के घाव ने बिगाड़ी हालत
चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, तेंदुए मुराद के पैर में घाव हो गया था। वह बार-बार अपने पंजे के घाव को नोच रहा था। इससे घाव बढ़ता गया और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। पिछले चार दिनों से वह भोजन और पानी भी नहीं ले रहा था। बुधवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
2018 में मुरादाबाद से किया गया था रेस्क्यू
मुराद को करीब आठ साल पहले वर्ष 2018 में मुरादाबाद से रेस्क्यू करके कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। उस समय मुरादाबाद कैंट इलाके में एक तेंदुआ घुस आया था। उसने कई लोगों को घायल कर दिया था। करीब 24 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे पकड़ा जा सका था। मुरादाबाद से लाए जाने के कारण उसका नाम मुराद रखा गया था। चिड़ियाघर में वह दो अन्य तेंदुओं के साथ जंगल सफारी के पास बने बाड़े में रह रहा था।
मुराद की मौत के बाद कानपुर चिड़ियाघर में तेंदुओं की संख्या घटकर 27 रह गई है। इनमें 19 नर और आठ मादा तेंदुए शामिल हैं। इससे पहले यहां कुल 28 तेंदुए थे।
40 दिन में छह काले हिरणों समेत नौ वन्यजीवों की मौत
कानपुर चिड़ियाघर में पिछले करीब 40 दिनों से वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी है। सितंबर के अंतिम दिनों में काले हिरण की मौत से शुरू हुआ यह सिलसिला अक्टूबर तक जारी रहा। इस दौरान कुल छह काले हिरणों की मौत हो गई। इसके बाद लगातार हो रही मौतों ने चिड़ियाघर प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली स्थित IVRI से विशेषज्ञों की टीम ने चिड़ियाघर पहुंचकर जांच की थी। मृत हिरणों के पोस्टमार्टम के बाद विसरा और अन्य नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। शुरुआती जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई गई थी। यह संक्रमण टैबनिड फ्लाई यानी एक प्रकार की मक्खी के काटने से फैल सकता है।
87 में से 26 काले हिरणों का कराया गया वैक्सीनेशन
संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिड़ियाघर में मौजूद 87 काले हिरणों में से 26 का वैक्सीनेशन भी कराया गया था। हालांकि, अभी तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
लगातार हो रही मौतों के बीच अब 13 वर्षीय तेंदुए मुराद की मौत ने एक बार फिर चिड़ियाघर में वन्यजीवों के स्वास्थ्य, उनके उपचार और संक्रमण की रोकथाम को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। IVRI की जांच रिपोर्ट से ही मौतों के पीछे की वजहों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।


