नकली सीमेंट कांड: 13 दिन बाद भी नमूने जांच को नहीं भेजे, प्लॉट मालिक का नही लगा सुराग
इस्पात नगर में 2019 से चल रहा था वेयरहाउस, KDA से 2014 में आवंटित हुआ था 625 वर्गमीटर का प्लॉट; दो करोड़ रुपये महीने की डैमेज सीमेंट सप्लाई का दावा
कानपुर। इस्पात नगर में डैमेज सीमेंट को ब्रांडेड कंपनियों की बोरियों में भरकर बेचने के मामले में पुलिस की जांच अब तक प्लॉट मालिक तक नहीं पहुंच सकी है। 625 वर्गमीटर का यह प्लॉट वर्ष 2014 में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) से आवंटित हुआ था, जबकि यहां वर्ष 2019 से सीमेंट का वेयरहाउस संचालित हो रहा था। छापेमारी के 13 दिन बाद भी डैमेज सीमेंट के नमूने जांच के लिए नहीं भेजे गए हैं। वहीं, वेयरहाउस संचालक सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता समेत तीन आरोपी अब भी फरार हैं।
पुलिस का कहना है कि प्लॉट मालिक की जानकारी जुटाने के लिए केडीए को पत्र भेजा गया है। जांच में सामने आया कि डैमेज सीमेंट को ब्रांडेड कंपनियों की बोरियों में भरकर उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था। पुलिस अब सीमेंट की खरीद-फरोख्त, इससे जुड़ी फर्मों और इसके इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।
2014 में KDA से आवंटित हुआ था प्लॉट
इस्पात नगर स्थित 625 वर्गमीटर के प्लॉट पर डैमेज सीमेंट का कारोबार चल रहा था। जांच में पता चला कि प्लॉट वर्ष 2014 में केडीए से आवंटित हुआ था। वर्ष 2019 से यहां सीमेंट का वेयरहाउस संचालित हो रहा था। अडानी ग्रुप के रीजनल मैनेजर ने भी गोदाम में सीमेंट का कारोबार होने की पुष्टि की है।
हालांकि, प्लॉट का मालिक कौन है और इस कारोबार में उसकी क्या भूमिका रही, इसका पता अब तक नहीं चल सका है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मालिक की जानकारी जुटाने के लिए केडीए को पत्र भेजा गया है।
छापेमारी के 13 दिन बाद भी जांच को नहीं भेजे नमूने
अडानी ग्रुप की कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की स्पेशल टीम ने 14 अक्तूबर को इस्पात नगर स्थित फैक्टरी में छापा मारा था। यहां ब्रांडेड कंपनियों के नाम वाली बोरियों में एक्सपायरी सीमेंट भरकर सप्लाई किए जाने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने मौके से मुंशी राहुल को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद लालबंगला निवासी वेयरहाउस संचालक धीरज गुप्ता, नीरज गुप्ता, मेरठ निवासी निशांत मित्तल और उसके पिता सुनील मित्तल के खिलाफ पनकी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने निशांत को मेरठ से गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उसे एक लाख रुपये के बांड पर जमानत मिल गई। धीरज, नीरज और सुनील अब भी फरार हैं।
हर महीने दो करोड़ रुपये की डैमेज सीमेंट सप्लाई का दावा
पुलिस जांच में सामने आया कि मेरठ निवासी निशांत नीलामी में स्क्रैप के दाम पर डैमेज सीमेंट खरीदता था। वह इसे नीरज और धीरज को सप्लाई करता था। निशांत के मुताबिक, वह हर महीने करीब 30 हजार बोरी डैमेज सीमेंट कानपुर भेजता था। पुलिस के अनुसार, इस सीमेंट की करीब दो करोड़ रुपये की सप्लाई हर महीने उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में की जा रही थी।
जांच में यह भी सामने आया कि एमकॉम कर चुके निशांत ने त्रिदेव एंटरप्राइजेज के नाम से फर्म बनाई थी। इस फर्म के बिलों की जांच में 17 से अधिक फर्मों को डैमेज सीमेंट सप्लाई किए जाने की जानकारी मिली है।
17 से अधिक फर्मों तक पहुंची सीमेंट
जांच में मुस्कान ट्रेडर्स, अयाना एंटरप्राइजेज, श्री सांवरिया सेठजी ट्रेडिंग कंपनी, देवेंद्र सिंह चौहान, गंगा ट्रेडिंग कंपनी, रियासत कांट्रेक्टर, चंचल एंटरप्राइजेज, दिया एंटरप्राइजेज, हरेंद्र एंटरप्राइजेज, बिरज ट्रेडर्स, तिवारी ट्रेडर्स, डीपी डेवलपर्स, अग्रवाल सीमेंट ट्रेडर्स, कृनाल कंस्ट्रक्शन, शारदा ट्रेडर्स और शिवायु इंडस्ट्रीज समेत 17 से अधिक फर्मों के नाम सामने आए हैं।
पुलिस अब इन फर्मों की भूमिका और उनके कारोबार की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सीमेंट कहां-कहां सप्लाई हुई और उसका इस्तेमाल किन भवनों या सरकारी परियोजनाओं में किया गया।
इन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
- सात साल से चल रहे कारोबार में कितनी डैमेज सीमेंट बेची गई?
- सीमेंट खरीदने वाली 17 से अधिक फर्मों के मालिक कौन हैं और ये कहां संचालित हैं?
- प्लॉट का मालिक कौन है और कारोबार में उसकी क्या भूमिका थी?
- छापेमारी के दौरान बिल लेकर कौन फरार हुआ था?
- सीमेंट का इस्तेमाल किन भवनों और सरकारी परियोजनाओं में किया गया?


