शिक्षा आयोग में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 अभ्यर्थियों से 80 लाख की ठगी का आरोप
एलडीसी, चपरासी और माली के पदों पर नियुक्ति का दिया भरोसा, तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
कानपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 अभ्यर्थियों से करीब 80 लाख रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवाओं को एलडीसी (लोअर डिवीजन क्लर्क), चपरासी और माली के पदों पर नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया गया। इसके लिए उनसे शैक्षिक प्रमाणपत्रों समेत जरूरी दस्तावेज लिए गए और नियुक्ति पत्र दिलाने के नाम पर रकम वसूली गई। लंबे समय तक नियुक्ति नहीं मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नेहरू नगर निवासी शरद अवस्थी ने पुलिस कमिश्नर के जनशिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत की थी। उनका आरोप है कि आरोपियों ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में ऊंचे पदों पर संपर्क होने का दावा किया। इसी भरोसे पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में बताया गया और उनसे रुपये लिए गए।
रिश्तेदार को आयोग में ज्वाइंट सेक्रेटरी बताया
शरद अवस्थी के मुताबिक, वह वर्ष 2011 से नारायन सिनेमा और सत्यम सिनेमा में प्रबंधक व प्रॉपर्टी केयरटेकर के रूप में काम कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा से हुई। आरोप है कि नीरज ने अपने ममिया ससुर अरविंद नारायन शुक्ला को माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में ज्वाइंट सेक्रेटरी बताया।
शिकायत के अनुसार, नीरज ने अपनी चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति होने का दावा करते हुए राज्यपाल कोटे से सीधी भर्ती कराने की बात कही। अभ्यर्थियों को बताया गया कि नियुक्ति की प्रक्रिया सात चरणों में पूरी होगी। इस दौरान उनसे हलफनामा, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षिक प्रमाणपत्र और पासपोर्ट साइज फोटो समेत अन्य दस्तावेज लिए गए।
नियुक्ति पत्र और वेतन के नाम पर मांगे रुपये
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अभ्यर्थियों से नियुक्ति पत्र मिलने से पहले ढाई लाख रुपये और वेतन शुरू होने के बाद बाकी ढाई लाख रुपये देने को कहा गया था। शरद अवस्थी का आरोप है कि उनके बेटे यशवर्धन और बेटी अर्चिता को एलडीसी पद पर नियुक्त कराने के नाम पर जुलाई से सितंबर 2025 के बीच ढाई लाख रुपये लिए गए।
वहीं, उनके परिचित शान अली ने अपने भतीजे मोहम्मद सोहेल को लिपिक पद पर नौकरी दिलाने के लिए जून 2025 में दो लाख रुपये दिए। शिकायत में ज्ञानेंद्र दुबे का भी नाम है, जो कथित तौर पर खुद को संयुक्त सचिव का निजी सहायक बताता था।
नियुक्ति पत्र बांटने की तारीख बताकर टालते रहे
शरद अवस्थी के मुताबिक, अभ्यर्थियों को लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय और प्रयागराज स्थित आयोग में बुलाकर आवेदनों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें बताया गया कि पांच सितंबर 2025 को लोक भवन में मुख्यमंत्री नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। हालांकि, निर्धारित तारीख पर नियुक्ति पत्र नहीं मिले। इसके बाद तारीख बदलने की बात कहकर अभ्यर्थियों को टालने का आरोप है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी तरह करीब 43 अभ्यर्थियों से लगभग 80 लाख रुपये वसूले गए। नौकरी मिलने की उम्मीद में रकम देने वाले अभ्यर्थियों को जब नियुक्ति नहीं मिली तो उन्होंने आरोपियों से जवाब मांगा। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने बताया कि पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर के जनशिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत की थी। मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, रुपये के लेन-देन और नियुक्ति दिलाने के दावों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही ठगी की रकम, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और कथित नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के अधीन है।


