नकली सीमेंट कांड: तीन साल में 10 लाख बोरियां खपाने का दावा, सीएम ग्रिड और लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंची सप्लाई
मेरठ के निशांत मित्तल से पूछताछ में खुलासा, डैमेज सीमेंट में भट्ठे की राख और केमिकल मिलाकर होती थी पैकिंग; 300 से 400 रुपये में बेचते थे बोरी

कानपुर। पनकी के इस्पात नगर में पकड़ी गई नकली सीमेंट फैक्ट्री के मामले में पुलिस की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मेरठ के आरोपी निशांत मित्तल से पूछताछ के आधार पर पुलिस का दावा है कि कंपनियों की डैमेज सीमेंट की बोरियां खरीदकर कानपुर भेजी जाती थीं। यहां सीमेंट को पीसकर उसमें ईंट भट्ठे की राख और केमिकल मिलाया जाता था। इसके बाद एसीसी और अंबुजा जैसी ब्रांडेड कंपनियों के नाम वाली बोरियों में भरकर बाजार में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक बोरियां खपाई गईं। इनमें सीएम ग्रिड परियोजना, लखनऊ एयरपोर्ट और दूसरे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई सीमेंट भी शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, सरकारी परियोजनाओं में इस सीमेंट के इस्तेमाल की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर अभी जांच की जा रही है।
डैमेज सीमेंट खरीदकर तैयार करते थे नकली माल
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, निशांत मित्तल ने पूछताछ में बताया कि कंपनियों की पानी से भीगी और कटी-फटी बोरियों को डैमेज घोषित किए जाने के बाद खरीदा जाता था। इसके बाद थोक में सीमेंट कानपुर भेजी जाती थी। निशांत का दावा है कि वह हर महीने करीब 15 हजार बोरियों की सप्लाई करता था। गुप्ता बंधुओं से उसे प्रति बोरी 15 से 20 रुपये तक का मुनाफा मिलता था।
पुलिस के अनुसार, कानपुर के नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहे थे। दोनों भाइयों की लालबंगला में फर्म है। उन्होंने पनकी के इस्पात नगर में करीब 10 साल से वेयरहाउस बना रखा था। आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप की आड़ में इस परिसर में नकली सीमेंट तैयार कर कई जिलों में भेजी जा रही थी।
भट्ठे की राख और केमिकल मिलाकर करते थे पैकिंग
पूछताछ में सामने आए कथित तरीके के मुताबिक, डैमेज सीमेंट को पहले पीसकर बुरादा बनाया जाता था। इसके बाद उसमें केमिकल और ईंट भट्ठे से निकली राख मिलाई जाती थी। तैयार मिश्रण को ब्रांडेड कंपनियों के ट्रेडमार्क वाली बोरियों में भरकर बाजार में उतारा जाता था। पुलिस का कहना है कि इन बोरियों की छपाई और पैकिंग की व्यवस्था नीरज और धीरज गुप्ता कराते थे। नकली सीमेंट की एक बोरी 300 से 400 रुपये में बेचे जाने का आरोप है। पुलिस अब बरामद सीमेंट और बोरियों के नमूनों की जांच कराने की तैयारी कर रही है, ताकि सीमेंट की वास्तविक संरचना और गुणवत्ता का पता लगाया जा सके।
गमले और इंटरलॉकिंग के नाम पर खरीदता था सीमेंट
पुलिस के मुताबिक, निशांत ने पूछताछ में बताया कि वह गमले बनाने, इंटरलॉकिंग ईंट तैयार करने, ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ंजों की भरान और मकानों की चिनाई जैसे कामों के लिए भी सीमेंट खरीदता था। इसी तरह वह गुप्ता बंधुओं को सीमेंट की सप्लाई करता था।
हालांकि, पुलिस का आरोप है कि गुप्ता बंधु इस सीमेंट को कानपुर और आसपास के जिलों में बेचने के साथ सरकारी निर्माण परियोजनाओं तक पहुंचाते थे। सीएम ग्रिड के तहत बनने वाली सड़कों, पुलों और पुलियों सहित अन्य परियोजनाओं में कथित तौर पर इस सीमेंट के इस्तेमाल की बात सामने आई है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस संबंधित निर्माण कार्यों और सप्लाई रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
14 अक्टूबर को फैक्ट्री में हुई थी छापेमारी
अडानी ग्रुप की कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस ने 14 अक्टूबर को पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापेमारी की थी। यहां एसीसी और अंबुजा के नाम से नकली सीमेंट तैयार किए जाने का आरोप सामने आया था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक हजार से अधिक भरी सीमेंट की बोरियां, तीन हजार से अधिक खाली बोरियां और बड़ी मात्रा में खुली सीमेंट बरामद की थी। इस मामले में फैक्ट्री में काम करने वाले मुंशी राहुल को भी गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने नीरज और धीरज गुप्ता को फैक्ट्री का संचालक बताया था।
पिता को भगाने में मदद का आरोप, दिल्ली के कारोबारी का नाम भी आया
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई थीं। एक टीम मेरठ भेजी गई, जहां से पुलिस ने 19 अक्टूबर की रात निशांत मित्तल को गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि निशांत ने अपने पिता सुनील मित्तल को फरार होने में मदद की थी। पूछताछ के दौरान निशांत ने दिल्ली के पीतमपुरा निवासी पवन गोयल का नाम भी बताया। पुलिस के अनुसार, निशांत ने दावा किया कि पवन गोयल भी उसकी तरह नकली सीमेंट की ट्रेडिंग का काम करता था। इसके बाद पुलिस निशांत को लेकर पवन गोयल की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली रवाना हुई, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा।
कोर्ट ने निशांत को दी जमानत, गुप्ता बंधुओं की तलाश जारी

आरोपी निशांत मित्तल
निशांत को कानपुर लाने के बाद 20 अक्टूबर को अदालत में पेश किया गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने आरोपी को पेश करने में हुई देरी को लेकर पुलिस से सवाल किए। पुलिस की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने निशांत को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। इस कारण उसे जेल नहीं भेजा गया।
उधर, फैक्ट्री संचालक बताए जा रहे नीरज और धीरज गुप्ता फरार हैं। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, उनकी तलाश में आठ टीमें लगाई गई हैं। पुलिस को उनकी आखिरी लोकेशन नेपाल सीमा के आसपास के क्षेत्रों में मिलने की बात कही गई है। उनके नेपाल भागने की आशंका भी जताई गई है। पुलिस को यह भी संदेह है कि दोनों अग्रिम जमानत लेने की कोशिश कर रहे हैं।
आईआईटी कानपुर या एचबीटीयू भेजे जाएंगे नमूने
पुलिस अब मामले में पुख्ता साक्ष्य जुटाने के लिए बरामद नकली सीमेंट के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने की तैयारी में है। इसके लिए नमूने आईआईटी कानपुर या हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) भेजे जा सकते हैं। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, एसीसी कंपनी की विजिलेंस टीम को भी बुलाया गया है। टीम की मौजूदगी में सीमेंट और फर्जी ट्रेडमार्क वाली बोरियों के नमूने लिए जाने की तैयारी है। जांच रिपोर्ट से सीमेंट की गुणवत्ता, उसमें मिलाए गए पदार्थों और कथित नकली उत्पाद की प्रकृति का पता लगाने में मदद मिलेगी। फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र नकली सीमेंट की सप्लाई का पूरा नेटवर्क, सरकारी निर्माण परियोजनाओं में इसके कथित इस्तेमाल और फरार आरोपियों की भूमिका है।


