काशी के मां कालरात्रि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, भोर से लगी कतारें; सुरक्षा में रात तीन बजे से तैनात रही पुलिस
वाराणसी। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर शनिवार को काशी के प्राचीन मां कालरात्रि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कालका गली स्थित मंदिर में भोर से ही भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। मां के दर्शन की अभिलाषा में श्रद्धालु संकरी गलियों से होकर मंदिर तक पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों ने मां को गुड़हल के फूल, लाल चुनरी, नारियल, फल, मिष्ठान, सिंदूर और इत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और संकटों से मुक्ति की कामना की। सप्तमी के अवसर पर मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा तथा भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए। मंदिर तक पहुंचने वाले संकरे रास्तों पर आवागमन व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मी रात तीन बजे से ही तैनात रहे।
भोर से ही दर्शन के लिए पहुंचने लगे श्रद्धालु
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी आस्था के साथ सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। भक्तों ने मां के चरणों में शीश झुकाकर अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की। कई श्रद्धालुओं ने पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित कर देवी से जीवन की परेशानियां दूर करने और सुखमय भविष्य का आशीर्वाद मांगा। मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला लगातार चलता रहा। गलियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के कारण प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। पुलिसकर्मी भक्तों को सुचारु रूप से आगे बढ़ने में सहयोग करते रहे, जिससे संकरी गलियों में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
संकट हरने वाली देवी मानी जाती हैं मां कालरात्रि
मंदिर के प्रधान महंत पं. सुरेंद्र तिवारी ने मां कालरात्रि की धार्मिक महिमा बताते हुए कहा कि देवी का यह स्वरूप भक्तों के लिए कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं को साहस, शक्ति और शुभ फल की प्राप्ति होती है। मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र और रौद्र बताया गया है, लेकिन वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी हैं। इसी कारण उन्हें शुभंकरी नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र की सप्तमी पर उनकी पूजा कर श्रद्धालु जीवन की बाधाओं से मुक्ति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। काशी की धार्मिक परंपरा में मां कालरात्रि के मंदिर का विशेष स्थान है और नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
रात तीन बजे से सुरक्षा व्यवस्था में जुटा रहा प्रशासन
कालका गली स्थित प्राचीन मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते संकरे हैं। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण इन रास्तों पर भीड़ को व्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन और दशाश्वमेध थाने की पुलिस रात तीन बजे से ही व्यवस्था संभालने में जुट गई। पुलिसकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य मंदिर तक आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखना और भीड़ के दबाव को नियंत्रित करना था। सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्तों ने मां के दर्शन किए। प्रशासन ने संकरी गलियों में व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए सतर्कता बरती।
मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के भी विग्रह
प्राचीन मां कालरात्रि मंदिर परिसर में गौरी केदारेश्वर सहित अन्य देवी-देवताओं के विग्रह भी स्थापित हैं। धार्मिक आस्था से जुड़े इस मंदिर में नवरात्र के दिनों में विशेष चहल-पहल रहती है। सप्तमी के अवसर पर दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की। काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला यह मंदिर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। मां कालरात्रि के दरबार में उमड़ी भीड़ ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। भक्तों ने श्रद्धा के साथ पूजा कर सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की।


