ककवन में जलभराव से 180 बच्चों की पढ़ाई ठप, स्कूल छोड़ दूसरी जगह बैठने को मजबूर
तालाब से पानी निकासी का रास्ता बंद होने का आरोप, शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं; हर बारिश में दोबारा पैदा हो रही समस्या
कानपुर। ककवन कस्बे में जलभराव के कारण एक उच्च प्राथमिक विद्यालय और दो आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। तालाब के किनारे बने विद्यालय परिसर में बारिश का पानी भरने से 180 से अधिक बच्चों को दूसरे स्थानों पर बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब से पानी निकलने का रास्ता अतिक्रमण के कारण बंद है। इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर बार बारिश के बाद पानी निकालने की अस्थायी व्यवस्था की जाती है और कुछ दिन बाद समस्या फिर खड़ी हो जाती है।
तालाब किनारे बना है विद्यालय परिसर
मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर ककवन कस्बे के दक्षिणी छोर पर तालाब के किनारे उच्च प्राथमिक विद्यालय बना है। इसी परिसर में दो आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होते हैं। विद्यालय में प्रधानाचार्य अजीत सिंह के साथ सुनीता यादव और जगत सिंह समेत तीन शिक्षक तैनात हैं। स्कूल की तीन कक्षाओं में 89 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं, दोनों आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रमशः 46 और 45 बच्चे दर्ज हैं। इस तरह कुल 180 बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियां जलभराव से प्रभावित हो रही हैं।
कहीं प्राथमिक विद्यालय, तो कहीं बरामदे में चल रहीं कक्षाएं
बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए विद्यालय की कक्षाएं गांव के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में संचालित करनी पड़ीं। वहीं, पहले आंगनबाड़ी केंद्र को पशु अस्पताल और दूसरे केंद्र को उत्तम के निजी मकान के बाहर बने बरामदे में चलाना पड़ा। यानी जिन भवनों को बच्चों की पढ़ाई और शुरुआती शिक्षा के लिए बनाया गया, उन्हें छोड़कर दूसरी जगहों पर व्यवस्था करनी पड़ी।
इंजन से पानी निकाला, चार-पांच दिन बाद फिर भर गया परिसर
जलभराव की समस्या सामने आने के करीब दो सप्ताह बाद प्रशासनिक स्तर पर पंपिंग सेट लगाकर पानी निकलवाया गया। इसके बाद विद्यालय में परीक्षाएं और आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियां दोबारा शुरू हो सकीं। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। एक और दो अक्टूबर को हुई लगातार बारिश के बाद परिसर फिर पानी से भर गया और बच्चों को दोबारा वैकल्पिक स्थानों पर भेजना पड़ा।
अधिकारियों के निर्देश के बाद भी स्थायी समाधान नहीं
तहसीलदार अभिनव चंद्रा ने बताया कि खंड विकास अधिकारी को जल निकासी का अवरुद्ध रास्ता खुलवाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, बीडीओ नेमचंद्र के अनुसार, ग्राम प्रधान राजू स्वर्णकार और पंचायत सचिव बाबू सिंह को पानी निकलवाने और सफाई कराने के लिए कहा गया है।
प्रधान बोले- अतिक्रमण के कारण बार-बार भरता है पानी
ग्राम प्रधान राजू स्वर्णकार ने बताया कि नाले पर निर्माण कर अवैध अतिक्रमण किए जाने के कारण विद्यालय परिसर में बार-बार जलभराव हो रहा है। इस संबंध में एसडीएम से शिकायत कर अतिक्रमण हटवाने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंजन लगवाकर पानी निकलवाने का काम शुरू कराया जाएगा। पंचायत सचिव ने भी जल निकासी के लिए निर्देश मिलने और इंजन की व्यवस्था किए जाने की बात कही है।
सवाल यही—आखिर कब तक दूसरी जगह पढ़ेंगे बच्चे?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जलभराव की समस्या अधिकारियों, पंचायत और विद्यालय प्रबंधन की जानकारी में है, तो स्थायी समाधान में देरी क्यों हो रही है? हर बार बारिश के बाद इंजन लगवाकर पानी निकालना और फिर परिसर में पानी भरने पर बच्चों को दूसरी जगह भेज देना आखिर कब तक चलेगा?
विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पढ़ाई, देखभाल और शुरुआती शिक्षा के लिए बनाए गए हैं। लेकिन ककवन में जल निकासी की समस्या के चलते बच्चे अपने ही केंद्रों में बैठने से वंचित हैं। अब जरूरत केवल पानी निकलवाने की नहीं, बल्कि जल निकासी का अवरुद्ध रास्ता खुलवाकर समस्या का स्थायी समाधान करने की है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हर बारिश के साथ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा बना रहेगा।


