लखनऊ में हॉस्पिटल डूबा, इकाना तक पहुंची गोमती
आज इंडिया का मैच, 35 हजार दर्शकों के पहुंचने से पहले सड़क पर पानी भरा

लखनऊ। लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए हैं। फैजुल्लागंज का 100 बेड का 4 मंजिला अस्पताल डूब चुका है। लाचार डॉक्टर नाले के किनारे बैठकर संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। एरिया के स्कूल बंद हैं। डरे-सहमे लोगों ने अपने परिवार को रिश्तेदारों के घर भेज दिया है। खुद घरों की रखवाली कर रहे हैं। लोग नाव पर घर का बचा हुआ राशन और सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हुए दिखते हैं। यहां से करीब 21 किमी दूर इकाना स्टेडियम तक गोमती नदी का पानी पहुंच चुका है। आज यहां इंडिया और वेस्टइंडीज के बीच T-20 मैच होना है। इसमें 30 से 35 हजार लोग पहुंचने की संभावना है। व्यवस्थाओं को लेकर लखनऊ प्रशासन 1 दिन पहले मुस्तैद दिखा। सर्विस लेन में भरे पानी को दिनभर निकाला जाता रहा।
इकाना स्टेडियम के गेट नंबर- 1 से करीब 100 मीटर दूर तक नदी का पानी पहुंच गया है। कुछ दिन पहले ही स्टेडियम से कुछ दूर पर बाउंड्री बनाई गई थी। अब पानी उसी बाउंड्री को टच कर रहा है। हालांकि, स्टेडियम ऊंचाई पर है। इसलिए वहां तक पानी पहुंचने की अभी संभावना नहीं है। लेकिन, इस खतरे को भांपते हुए अब नदी के किनारे पक्के निर्माण की तैयारी है। इसलिए गेट नंबर- 1 के पास बड़े-बड़े बोल्डर गिराए गए हैं। इकाना स्टेडियम के ठीक सामने शहीद पथ गुजरा है और इसके दूसरी तरफ यूपी पुलिस मुख्यालय है। मुख्यालय के सामने जो सर्विस रोड है, उस पर इस वक्त 1 फीट तक पानी भर गया है। यहीं एक अंडरपास है, उसके अंदर 2 फीट तक पानी भर गया है। पुलिसकर्मी उसके अंदर से बाइक की आवाजाही को रोक रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पानी गोमती नदी का नहीं है। बल्कि गोमती नदी में जो पानी जाता है, उसे रोक दिया गया है। इसलिए वह सड़कों पर ही फैल गया है।
सड़कों पर नाव, डूबे घरों में चोरियां हो रहीं
फैजुल्लागंज इलाके में दाउदनगर चौराहे पर चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा। सड़क पर 6 से 8 फीट तक पानी है। नाव से ही लोग आ-जा रहे हैं। 2022 में यहां 100 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया गया था। 4 फ्लोर के इस हॉस्पिटल में पहला फ्लोर अब डूब गया है। यहां तैनात डॉक्टरों को अब अलग-अलग जगह ड्यूटी लगाई गई है। हॉस्पिटल से ही जुड़े कुछ अन्य लोग अब हॉस्पिटल से थोड़ी दूर पर नाले के ऊपर बैठकर लोगों को दवाएं दे रहे हैं।
2008 में बाढ़ आई, तब यहां मैदान था…
लोग बोले- पिछली बार 2008 में बाढ़ आई थी। उस वक्त यहां इतने घर नहीं बने थे। तब यहां गांव था, मैदान थे, इसलिए बाढ़ इतनी खतरनाक नहीं हुई थी। आज तो स्थिति एकदम अलग हो गई है। इस वक्त लोगों के 1-1 मंजिला मकान डूब गए हैं। लोग अब अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। घरों में कोई नहीं रह रहा, इसलिए चोरियां भी बढ़ गई हैं। कल हम लोगों ने ऐसे ही एक व्यक्ति को पकड़ा था। लेकिन करते क्या, इसलिए बाद में छोड़ दिया।
महिला बोली- मेरा पति बाढ़ के बीच छत पर फंसा है
बाढ़ के बीच हमें 60 साल की वृद्ध मिलीं और रोने लगीं। कहने लगीं- हमारा आधा सामान किसी तरह से बच गया और उसे हमने निकाल लिया। अब हमारा पति बाढ़ के बीच छत पर फंसा हुआ है। कैसे भी करके हमें उनके पास पहुंचा दीजिए। हमारे पति बीमार हैं, उनके पास हमारा पहुंचना जरूरी है। तब प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचा दिया और वहां से नाव के जरिए वह अपने पति के पास तक चली गईं।
महिलाएं बोलीं- जो डूबे नहीं, उन्हें मदद दे रहे अधिकारी
यहीं हमें महिलाओं का एक समूह मिला। प्रशासन की व्यवस्थाओं से एकदम खफा था। महिलाएं आरोप लगाती हैं कि प्रशासन की तरफ से मदद, उन्हें मिल रही है जो प्रभावित नहीं हैं। हम लोगों पर बाढ़ का असर है, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं। हमारे पूरे घर में पानी भर गया है। छत पर बिजली की एक मोटर लगी थी, वह भी चोरी हो गई। जो अधिकारी आ रहे हैं, वो हॉस्पिटल तक नाव लेकर जाते हैं और उसके बाद वापस चले आते हैं। हमारे गांव तक जाते ही नहीं। ये महिलाएं कहती हैं कि कहीं भी राहत शिविर नहीं बनाया गया है। आखिर हम कहां जाएं? क्या खाएं? हमारा कोई इंतजाम नहीं है। सड़क पर अब नाव चल रही है। यही एक जरिया बचा है, जिससे लोग एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं।
सड़क पर अब नाव चल रही है।
सिविल डिफेंस ने कहा- लोग डूबे घर छोड़ना नहीं चाहते
राहत शिविर केंद्र में हमें नागरिक सुरक्षा के सुनील तिवारी ने बताया- हमारे तमाम वार्डन इस मुसीबत के बीच लोगों की मदद कर रहे हैं। हर नाव पर हमारे लोग हैं, क्योंकि कई जगहों पर लोग जबरन नाव रोक ले रहे हैं। हम चाहते हैं कि ऐसा न हो। इलाके में अंदर की स्थिति इस वक्त खराब हो गई है। कई जगहों पर बहुत ज्यादा पानी भर गया है। लोग इस स्थिति में भी घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि उन्हें डर है कि अगर इलाका खाली हो गया, तो उनके की ऊपर की मंजिल पर रखा सामान चोरी हो जाएगा।
लोग बोले- गोमती की सहायक नदियों में आए बारिश के पानी से हालात बिगाड़े हैं। यह पानी निकलने में वक्त लेगा। ऐसा माना जा रहा है कि 5 दिन बाद जलस्तर कम होने लगेगा। अभी की स्थिति देखने पर लगता है कि अगले 7-8 दिन बाद ही राहत मिल सकेगी।
‘प्रशासन की तैयारी नहीं, पानी पहुंचाने के लिए नाव तक नहीं दे रहे’
इस बाढ़ के बीच तमाम समाजसेवी पहुंचकर अपनी तरफ से मदद कर रहे हैं। इन्हीं में एक रविकांत भी हैं। अपने ट्रैक्टर के जरिए लोगों तक पीने के पानी पहुंचा रहे हैं। वह कहते हैं- यहां प्रशासन की कोई तैयारी नहीं है। नाव की व्यवस्था बहुत सीमित है। हमने इनसे नाव मांगी कि अंदर पानी पहुंचाया जा सके, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब हम ट्रैक्टर के जरिए जहां तक मदद पहुंचाई जा सकती है, वहां तक जा रहे हैं। यही हमारा पूरे दिन का शेड्यूल है।

