मांगें पूरी न होने पर तीसरे सप्ताह भी वकीलों का न्यायिक कार्य बहिष्कार
कानपुर। सात सूत्रीय मांगें पूरी न होने तक सप्ताह में एक दिन हड़ताल की घोषणा के बाद बुधवार को कानपुर कचहरी में लगातार तीसरे सप्ताह भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 10 और 11 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन में मांगें पूरी न होने तक प्रत्येक बुधवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया था।

इसी के तहत बुधवार 30 सितंबर को कानपुर समेत कई जिलों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। कचहरी की अदालतों में सन्नाटा छाया रहा। मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होने के कारण वादकारियों को तारीख लेकर वापस लौटना पड़ा। टाइपिस्ट, स्टांप वेंडर और फोटोकॉपी की ज्यादातर दुकानें भी बंद रहीं।
सुबह से ही बार एसोसिएशन कार्यालय के बाहर अधिवक्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। अधिवक्ताओं ने ‘अधिवक्ता एकता जिंदाबाद’ और ‘हमारी मांगें पूरी करो’ जैसे नारे लगाकर अपनी एकजुटता दिखाई। इसके बाद वकीलों ने अलग-अलग समूह बनाए। एक समूह तहसील, दूसरा अदालतों और तीसरा रजिस्ट्री कार्यालय की ओर रवाना हुआ।
अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर घूमकर नारेबाजी की और अन्य अधिवक्ताओं से भी न्यायिक कार्य से विरत रहने की अपील की। इसके बाद वकीलों ने शताब्दी गेट पर मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
बार एसोसिएशन के महामंत्री विनय मिश्रा और लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि आंदोलन को आगे तेज करने के लिए जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और न्यायिक अधिकारियों की ओर से अधिवक्ताओं की मांगों पर अभी कोई ठोस विचार नहीं किया गया है। जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

