एलएसी पर चीन को पीछे हटाने पड़े सैनिक, भारतीय सेना की आक्रामक घेराबंदी के बाद ड्रैगन के तेवर ढीले
रक्षा मंत्रालय का खुलासा, भारतीय सेना की आक्रामक घेराबंदी और 10 कंबाइंड आम्र्स ब्रिगेड की तैनाती के बाद ड्रैगन के तेवर ढीले
नई दिल्ली। गलवान घाटी में हुई हिंसा के करीब सात साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता के बाद अब एलएसी से भारत के लिए बेहद अहम खबर सामने आई है। रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना की आक्रामक घेराबंदी और 10 कंबाइंड आम्र्स ब्रिगेड की तैनाती के बाद चीन के तेवर ढीले पड़ गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की घेराबंदी के बाद अब चीनी सेना ने अपने सैनिकों को पीछे खींच लिया है। यह खुलासा रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की ताजा रिपोर्ट में हुए हैं।
इसके मुताबिक उत्तरी सीमाओं पर चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपने सैनिकों की तैनाती में भारी कटौती की है। यह इसीलिए भी अहम है कि क्योंकि हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे थे। इस दौरान पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। यह जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद दोनों की पहली द्विपक्षीय वार्ता थी।
रिपोर्ट में सेना का जलवा
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने एलएसी पर 10 ऐसी विशेष ब्रिगेड तैनात की हैं, जो एक साथ कई मोर्चों पर हमला करने में सक्षम हैं। एक ब्रिगेड में करीब 3,000 जवान होते हैं। इस विशेष कंबाइंड आम्र्स यूनिट में सैनिक, टैंक, तोप और एयर डिफेंस एक ही कमान के तहत काम करते हैं। सेना की इस घेराबंदी के बाद चीन को एलएसी और अपने पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों से सैनिक पीछे हटाने पर मजबूर होना पड़ा है।
कूटनीति भी आई काम
रिपोर्ट में बताया गया है कि सीमा पर सैन्य मजबूती के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत से भी हालात सुधरे हैं। दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की सीधी वार्ता हुई है। वहीं अगस्त 2025 में चीन में शंघाई सहयोग संगठन में शीर्ष नेताओं की मुलाकातों से संबंधों में जमी बर्फ पिघली है। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि एलएसी के सभी सेक्टर में सेना किसी भी चुनौती से निपटने को तैयार है।

