भतीजों की ‘नो-एंट्री’: आकाश और ईशान अध्याय का हुआ समापन
गौरतलब है कि कुछ साल पहले मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन उन पर उनका भरोसा ज्यादा दिन नहीं टिक सका। पिछले तीन सालों में आकाश को कई बार पदों से हटाया और बाहर किया गया। हाल ही में दूसरे भतीजे ईशान आनंद को भी नॉर्थ इंडिया का प्रभारी बनाकर राजनीति में एंट्री दी गई थी। लेकिन अब मायावती ने स्पष्ट रूप से प्रतिज्ञा ली है कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को अब बसपा में छोटे या बड़े किसी भी पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
कौन हैं दीपिका आनंद, जिन पर मायावती ने जताया है भरोसा?
22 वर्षीय कुमारी दीपिका आनंद, मायावती के सबसे छोटे भाई और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं। अब तक सार्वजनिक जीवन और राजनीति से पूरी तरह दूर रहीं दीपिका वर्तमान में लंदन में वकालत (लॉ) की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने साफ किया है कि आनंद कुमार अपनी राजनीतिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों में अब केवल अपनी बेटी दीपिका की ही मदद ले सकेंगे। उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्य क्षमता को परखने के बाद भविष्य में उन्हें पार्टी में अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस घोषणा के साथ ही दीपिका आनंद रातों-रात यूपी की सियासत के केंद्र में आ गई हैं।
मायावती का संकल्प: “मोह में पड़कर पार्टी का नुकसान नहीं होने दूंगी”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा और भावुक पोस्ट करते हुए मायावती ने अपनी मजबूरियां और इस फैसले की वजह बताई। उन्होंने कहा कि उनके अविवाहित होने के कारण उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। आनंद लंबे समय से उनकी देखभाल के साथ-साथ पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। लेकिन, मायावती ने साफ किया कि उनके भाई के परिवार के अन्य सदस्य इसका बेजा राजनीतिक लाभ उठाएं, यह पार्टी और मूवमेंट के हित में नहीं है।
उन्होंने बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम जी का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा परिवारवाद के खिलाफ थे। मायावती ने दृढ़ता से कहा कि उनकी शिष्या होने के नाते वह भी किसी परिवार मोह में पड़कर पार्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचने देंगी।
2027 यूपी चुनाव और बसपा का भविष्य
दीपिका आनंद की इस ‘सरप्राइज एंट्री’ को आगामी 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। मायावती ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में दीपिका आनंद इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार को पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य समर्पित मिशनरी कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंपनी होगी। बसपा अब पार्टी में ‘जेन-जी’ (Gen-Z) यानी युवाओं की 50 फीसदी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही है।
फिलहाल, मायावती के इस कड़े और स्पष्ट फैसले से बसपा के भीतर खलबली मच गई है। भतीजों की विदाई और लंदन में लॉ की पढ़ाई कर रही युवा भतीजी दीपिका आनंद की संभावित ताजपोशी ने बहुजन समाज पार्टी के भविष्य को एक नई दिशा दे दी है।


