एमएसएमई को ग्लोबल बाजार से जोड़ने पर जोर, विशेषज्ञों ने बताए कारोबार बढ़ाने के गुर
एमएसएमई को ग्लोबल बाजार से जोड़ने पर जोर, विशेषज्ञों ने बताए कारोबार बढ़ाने के गुर
निर्यात, GeM, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, गुणवत्ता और वित्तीय सुविधाओं पर हुई चर्चा
कानपुर। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार से जोड़ने और कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को एचबीटीयू कैंपस स्थित क्षेत्रीय उद्योग कार्यालय सभागार में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर की ओर से उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में 200 से अधिक एमएसएमई इकाइयों और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में उद्यमियों को निर्यात, अंतरराष्ट्रीय बाजार, सरकारी खरीद, GeM पोर्टल, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, गुणवत्ता, पैकेजिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार और वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाकर कारोबार का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक कानपुर आलोक द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। पारंपरिक हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो उत्पाद और एमएसएमई उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बढ़ी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश ने पहली बार 2.01 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार किया है। देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 5.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
संयुक्त आयुक्त उद्योग कानपुर मंडल सुनील कुमार ने कहा कि कानपुर मंडल प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और रक्षा उत्पादन में यहां व्यापक संभावनाएं हैं। सरकारी नीतियों और सुविधाओं का लाभ लेकर उद्यमी उत्पादन और निर्यात को और बढ़ा सकते हैं।
GeM से 55 हजार करोड़ से अधिक की खरीद
GeM कंसल्टेंट प्रियंवदा अग्रवाल ने सरकारी खरीद में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के विभागों और निकायों द्वारा GeM के माध्यम से 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की जा चुकी है। GeM पर होने वाली कुल खरीद में एमएसएमई की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने पंजीकरण और सरकारी ऑर्डर हासिल करने की प्रक्रिया भी समझाई।
निर्यात जोखिम और वित्तीय सुविधाओं की जानकारी
तकनीकी सत्र में DGFT के एसके निराला ने आयात-निर्यात नीति, FIEO के आलोक श्रीवास्तव ने व्यापार संवर्धन संगठनों की भूमिका और एक्जिम बैंक के ए.के. सोनी ने निर्यात के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। ECGC के शाहिद अहमद ने निर्यात बीमा और विदेशी खरीदारों से जुड़े जोखिमों को कम करने के उपाय बताए। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के गौरव कुमार मौर्य ने प्रदेश की निर्यात नीति की जानकारी दी।
वॉलमार्ट वृद्धि की जोनल मोबिलाइजेशन मैनेजर अंशुल गुप्ता ने डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स के जरिए उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के तरीके बताए।
गुणवत्ता और पैकेजिंग पर जोर
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के डॉ. अंशुमान श्रीवास्तव ने आधुनिक पैकेजिंग की जानकारी देते हुए कहा कि आकर्षक और प्रभावी पैकेजिंग उत्पाद की बाजार स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल की प्रीति गंगवार ने एमएसएमई लीन योजना, वाटर ऑडिट और एनर्जी ऑडिट के लाभ बताए। BIS के आशुतोष राय ने वैश्विक बाजार में प्रवेश के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी बताया।
कार्यशाला में एमएसएमई पॉलिसी-2022, लेदर पॉलिसी समेत प्रदेश सरकार की विभिन्न औद्योगिक नीतियों पर भी चर्चा हुई। ट्रेडमार्क एवं पेटेंट अटॉर्नी नवदीप श्रीधर ने ट्रेडमार्क, पेटेंट और डिजाइन के जरिए उत्पादों एवं ब्रांड को सुरक्षित रखने की जानकारी दी।
TReDS से जल्द भुगतान पर चर्चा
SIDBI के महाप्रबंधक जेके गुप्ता ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। RXIL-TReDS के संकल्प त्रिपाठी और अरूर्वे गैरोला ने TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े उपक्रमों को आपूर्ति के बाद बिल डिस्काउंटिंग कर जल्द भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। बैंक ऑफ बड़ौदा के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर आदित्य चंद्र ने बैंकिंग सुविधाओं और एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय विकल्पों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ एमएसएमई-विकास कार्यालय के निदेशक विष्णु कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उद्यमियों को नीतिगत, वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यशाला का समन्वय सहायक निदेशक अमित बाजपेयी ने किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के सवालों और समस्याओं का समाधान भी किया।

