कानपुर जू में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी, मादा जेब्रा ने मृत बच्चे को दिया जन्म

कानपुर जू में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी, मादा जेब्रा ने मृत बच्चे को दिया जन्म

पहले बायसन और काले हिरणों की हो चुकी है मौत, पिछले साल जन्मे जेब्रा के बच्चे ने भी कुछ दिन बाद तोड़ दिया था दम; वन्यजीवों की देखरेख पर उठ रहे सवाल

कानपुर। नवाबगंज स्थित कानपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले आपसी संघर्ष में बायसन की मौत के बाद अब मादा जेब्रा ने रविवार को एक बच्चे को जन्म दिया, जिसकी मौत हो गई। चिड़ियाघर प्रशासन का दावा है कि बच्चे की जन्म के समय ही मौत हो चुकी थी। वहीं, चिड़ियाघर परिसर में बच्चे की देखभाल में कथित लापरवाही को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, बच्चे के जन्म की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों को तत्काल सूचना दी गई। कानपुर जू के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान ने बताया कि चौकीदार से सूचना मिलते ही अधिकारियों और डॉक्टरों को मौके पर भेजा गया। चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. नितेश कटिहार ने जांच के बाद बताया कि ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चे की जन्म लेते ही मौत हो गई थी।

हालांकि, इस घटना ने चिड़ियाघर में वन्यजीवों की देखभाल और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिसर में यह भी चर्चा है कि बच्चा जन्म के समय जीवित था और समय पर देखभाल नहीं मिलने से उसकी मौत हुई। इस दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और चिकित्सकीय तथ्यों का सामने आना जरूरी है।

पिछले साल भी जन्मे जेब्रा के बच्चे की हुई थी मौत

करीब तीन साल पहले कानपुर चिड़ियाघर में जेब्रा का एक जोड़ा लाया गया था। पिछले साल भी मादा जेब्रा ने एक बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। अब दूसरे बच्चे की मौत के बाद जेब्रा के प्रजनन और नवजात की देखभाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पिछले और इस मामले में मौत के कारणों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

टैबनिड मक्खी के संक्रमण से पांच से अधिक काले हिरणों की मौत

कानपुर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत का मामला नया नहीं है। करीब एक माह पहले अचानक तीन काले हिरणों की मौत हो गई थी। इसके बाद हुई जांच में टैबनिड मक्खी से संक्रमण फैलने की आशंका सामने आई थी। बताया गया था कि संक्रमण के कारण हिरणों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। बाद में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के विशेषज्ञ भी जांच के लिए चिड़ियाघर पहुंचे थे। इस दौरान भी एक हिरण की मौत होने की बात सामने आई थी। इसके बाद एक-दो अन्य हिरणों की मौत की भी सूचना मिली थी।

लगातार हो रही मौतों के कारण चिड़ियाघर में वन्यजीवों के स्वास्थ्य, संक्रमण की रोकथाम और समय पर उपचार की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।

झील में हजारों मछलियों की मौत से भी उठे थे सवाल

अगस्त में कानपुर चिड़ियाघर की झील में हजारों मछलियों की मौत का मामला भी सामने आया था। इस घटना ने जल की गुणवत्ता, जलीय जीवों के संरक्षण और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। अब बायसन, काले हिरणों और जेब्रा के बच्चे की मौत की घटनाओं के बाद चिड़ियाघर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

कानपुर जू के निदेशक कन्हैया पटेल ने पहले कहा था कि वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि नवजात जेब्रा की मौत के मामले में क्या जांच कराई जाती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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