तूफान अर्नव ने करवाचौथ के चांद पर डाला पहरा, आसमान में छाए बादलों ने रोकी चांदनी, मोबाइल की स्क्रीन पर चंद्र दर्शन कर महिलाओं ने खोला व्रत

तूफान अर्नव ने करवाचौथ के चांद पर डाला पहरा, आसमान में छाए बादलों ने रोकी चांदनी, मोबाइल की स्क्रीन पर चंद्र दर्शन कर महिलाओं ने खोला व्रत

उत्तर प्रदेश। पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना के साथ महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रखा, लेकिन इस बार करवाचौथ की रात मौसम ने उनके इंतजार को लंबा कर दिया। तूफान अर्नव के प्रभाव से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आसमान पर बादलों का पहरा रहा। कहीं हल्की बारिश तो कहीं घने बादलों के चलते चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके। रात बढ़ती गई, लेकिन चांद बादलों की ओट से बाहर नहीं आया। ऐसे में दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को आखिरकार मोबाइल फोन का सहारा लेना पड़ा। महिलाओं ने मोबाइल पर चंद्रमा की तस्वीरें और वीडियो देखकर पूजा की और व्रत का पारण किया।

करवाचौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति और वैवाहिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के रहती हैं। दिनभर व्रत की तैयारियों के बाद शाम को सोलह शृंगार कर महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं और रात में चंद्रमा निकलने का बेसब्री से इंतजार करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने, छलनी से दर्शन करने और पति का चेहरा देखने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने करवाचौथ के सबसे खास पल को प्रभावित कर दिया।

घंटों छतों और बालकनियों में होता रहा चांद का इंतजार

करवाचौथ की शाम से ही महिलाओं ने पूजा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। घरों में पूजा की थालियां सजाई गईं। करवा, दीपक, मिठाई, फल और पूजा सामग्री के साथ महिलाओं ने विधि-विधान से करवा माता की पूजा की। इसके बाद सभी को चंद्रमा के निकलने का इंतजार था। निर्धारित समय के आसपास महिलाएं घरों की छतों, बालकनियों और खुले स्थानों पर पहुंच गईं। किसी की निगाह आसमान पर टिकी थी तो कोई बार-बार बादलों के हटने का इंतजार कर रहा था।

समय बीतने के साथ महिलाओं की उत्सुकता और बेचैनी बढ़ती गई। परिवार के सदस्य भी मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। कई जगह आसमान में घने बादल छाए रहे, जिससे चंद्रमा की रोशनी तक दिखाई नहीं दे रही थी। दिनभर भूखी-प्यासी रहने वाली महिलाओं के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि चंद्र दर्शन के बिना व्रत कैसे खोला जाए।

मोबाइल बना चांद का विकल्प, इंटरनेट पर तलाशती रहीं तस्वीरें

जब काफी देर तक आसमान साफ नहीं हुआ तो महिलाओं ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। मोबाइल फोन पर चंद्रमा की तस्वीरें और वीडियो खोजे जाने लगे। परिवार के सदस्यों ने इंटरनेट पर चांद की तस्वीरें दिखाईं। कई महिलाओं ने मोबाइल स्क्रीन पर चंद्रमा के दर्शन कर पूजा की रस्म पूरी की। इस तरह जिस चांद का इंतजार महिलाएं आसमान में कर रही थीं, उसके दर्शन उन्हें मोबाइल की स्क्रीन पर करने पड़े।

करवाचौथ की रात का यह नजारा आधुनिक तकनीक और पारंपरिक आस्था के अनोखे मेल के रूप में देखने को मिला। जिन घरों में चंद्रमा बादलों के कारण दिखाई नहीं दिया, वहां मोबाइल फोन ही चंद्र दर्शन का माध्यम बन गया। महिलाओं ने अपनी श्रद्धा और मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना की और व्रत खोला।

पति भी करते रहे चांद निकलने का इंतजार

करवाचौथ केवल महिलाओं के व्रत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इस दिन परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ इस विशेष अवसर को यादगार बनाने में जुटे रहते हैं। कई घरों में पति भी पत्नी के साथ छत पर खड़े होकर चांद निकलने का इंतजार करते नजर आए। कोई मौसम की जानकारी मोबाइल पर देख रहा था तो कोई आसमान में बादलों के हटने की उम्मीद लगाए बैठा था। चंद्रमा के दर्शन न होने पर पतियों ने भी मोबाइल के माध्यम से तस्वीरें दिखाकर अपनी पत्नियों की मदद की।

मौसम की बेरुखी ने फीकी की करवाचौथ की चांदनी

आमतौर पर करवाचौथ की रात चंद्रमा निकलते ही घरों की छतों पर रौनक दिखाई देती है। महिलाएं छलनी में चांद देखकर पति का चेहरा निहारती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। यह पल हर दंपती के लिए खास होता है। लेकिन इस बार तूफान अर्नव के प्रभाव और आसमान में छाए बादलों ने इस खूबसूरत परंपरा के सामने चुनौती खड़ी कर दी।

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में महिलाओं को चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सके। कहीं घंटों इंतजार के बाद भी आसमान साफ नहीं हुआ तो कहीं बादलों की आवाजाही के बीच चांद की एक झलक पाने की उम्मीद बनी रही। ऐसे में मोबाइल फोन ने महिलाओं को सहारा दिया।

आस्था के आगे मौसम भी नहीं रोक सका उत्साह

मौसम की खराबी के बावजूद महिलाओं के उत्साह और श्रद्धा में कमी नहीं दिखाई दी। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाओं ने अपनी परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार पूजा की। किसी ने परिवार के बुजुर्गों से सलाह ली तो किसी ने मोबाइल पर चंद्रमा की तस्वीर देखकर व्रत खोलने का निर्णय लिया। इस बार करवाचौथ की रात ने यह दिखा दिया कि बदलते समय में तकनीक लोगों के दैनिक जीवन के साथ धार्मिक और पारंपरिक अवसरों में भी अपनी जगह बना रही है।

तूफान अर्नव के कारण आसमान में छाए बादलों ने भले ही महिलाओं को चांद के प्रत्यक्ष दर्शन से वंचित कर दिया हो, लेकिन मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन ने उनके इंतजार को कुछ हद तक आसान बना दिया। करवाचौथ की यह रात महिलाओं के लिए एक अलग अनुभव बन गई, जहां आसमान में चांद भले ही नजर नहीं आया, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर उसके दर्शन कर सुहागिनों ने अपनी आस्था और परंपरा निभाई।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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