महिला की 100 अश्लील फोटो बनाईं, 10 अकाउंट से वायरल
कपड़े हटाने वाले टूल मुफ्त, चीन-हॉन्गकॉन्ग से चल रहा नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में रहने वाले 27 साल के सुमित शर्मा ने सोशल मीडिया पर अहमदाबाद की 24 साल की महिला को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। महिला ने रिस्पॉन्स नहीं दिया। सुमित ने महिला के सोशल मीडिया अकाउंट से फोटो डाउनलोड कीं और फ्री AI टूल्स से अश्लील तस्वीरों में बदल दिया। 100 से भी ज्यादा अश्लील फोटो 8 से 10 फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स से अपलोड कर दीं। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने सुमित शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
सुमित की तरह तमाम ऐसे केस हैं, जिनमें फ्री AI टूल्स से किसी महिला की अश्लील फोटो–वीडियो बना दिए गए। 4 फरवरी 2026 को यूनीसेफ, ECPAT इंटरनेशनल और इंटरपोल ने 11 देशों में किए सर्वे के बाद बताया कि कम से कम 12 लाख बच्चों ने कहा कि पिछले एक साल में उनकी तस्वीरों को बदलकर सेक्शुअल डीपफेक बनाया गया।
कौन–कौन हिस्सेदार, रोकने की जिम्मेदारी किसकी
AI टूल डेवलपर: अश्लील फोटो बनाने वाले मॉडल और टूल तैयार करते हैं।
वेबसाइट/बॉट ऑपरेटर: टूल चलाते हैं और यूजर्स से कमाई करते हैं।
प्रमोटर और रेफरल नेटवर्क: सोशल मीडिया पर टूल के लिंक फैलाते और यूजर जुटाते हैं।
टूल इस्तेमाल करने वाले: फोटो बनाकर पीड़ितों को निशाना बनाते हैं।
पेमेंट और होस्टिंग सर्विसेज: पैसे के लेन-देन और डिजिटल ढांचे की कड़ियां हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म: यहीं से कंटेंट वायरल होता है।
पुलिस और साइबर सेल: डिजिटल सबूत जुटाकर आरोपियों की पहचान और जांच करते हैं।
पीड़ित और सहायता संगठन: शिकायत, कंटेंट हटाने और कानूनी मदद के लिए काम करते हैं।
टेलीग्राम एआई के जरिए अश्लील कंटेंट तैयार करने का सबसे बड़ा अड्डा है। आसान की-वर्ड सर्चिंग से हमें ऐसे एआई बॉट मिले, जिनके जरिए फ्री में किसी भी फोटो या वीडियो को अश्लील डीपफेक में बदला जा सकता है। हमने 9 ऐसे बॉट-वेबसाइट आइडेंटिफाई कीं, जिनमें ऐसी सर्विसेज के ऑफर दिए जा रहे हैं।
चीन-हॉन्गकॉन्ग से चल रहे प्लेटफॉर्म्स
टेलीग्राम पर चलने वाले इन बॉट्स को कौन और कहां से ऑपरेट कर रहा है, ये पता करना मुश्किल है। हमने एंटी साइबरक्राइम स्ट्रैटजिस्ट और एआई सायबर साइकोलॉजिस्ट के साथ इनका बैकएंड खंगाला। पता चला कि टेलीग्राम पर दिखने वाला बॉट असल में इंटरफेस की तरह होता है। यूजर बॉट को मैसेज भेजता है, तो टेलीग्राम का सिस्टम वह मैसेज बॉट के पीछे काम कर रहे सर्वर तक पहुंचाता है। यह काम टेलीग्राम की आधिकारिक Bot API के जरिए होता है। आसान भाषा में कहें तो बॉट सामने की दुकान है और उसका सर्वर पीछे का पूरा सिस्टम। यूजर को बॉट टेलीग्राम पर दिखाई देता है, लेकिन उसके निर्देशों के मुताबिक काम करने वाला असली सिस्टम किसी दूसरे सर्वर पर चल रहा होता है। इससे किसी बॉट को कौन चला रहा है, यह पता करना मुश्किल हो जाता है। इन सभी चैनल्स को पुलिस के साथ शेयर किया गया। जांच में पता चला कि ये एआई बेस्ड प्लेटफॉर्म्स हैं, और इन्हें चीन–हॉन्गकॉन्ग में बनाया गया है। वहीं से ऑपरेट किया जा रहा है। कौन ऑपरेट कर रहा है, ये पता नहीं चल सका।
अश्लील फोटो–वीडियो की बिक्री भी हो रही, 20 रुपए में एक फोटो
एआई के जरिए तैयार हो रहे इन फोटो-वीडियो से सिर्फ लड़कियों को ब्लैकमेल ही नहीं किया जा रहा बल्कि इन्हें बेचा भी जा रहा है। मुंबई स्थित रति फाउंडेशन इंटरनेट पर होने वाली हिंसा के पीड़ितों की मदद करता है। फाउंडेशन के को-फाउंडर सिद्धार्थ सोमनाथ पिल्लई ने बताया कि दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान एक लड़की की अश्लील फोटो वायरल की गई। संस्था के पास केस आने के बाद हमने उसकी जांच की। फोटो AI के जरिए बनाई गई थी। तस्वीर के सोर्स तक पहुंचने पर पता चला कि संबंधित यूजर लड़कियों की नाभि दिखाने वाली AI फोटो बनाकर 20-20 रुपए में बेचता था। हमने इस चैनल पर मैसेज भेजा, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।
एक वीडियो के पीछे मल्टीलेयर लिंक, इसलिए रिपोर्ट करना भी मुश्किल
करीब 10% केस अश्लील डीपफेक के आ रहे हैं। इनकी जांच करने पर वीडियो या फोटो से जुड़े 50-100 या उससे भी ज्यादा लिंक रिपोर्ट करना पड़ते हैं। कुछ मामलों में एक ही क्लाइंट के लिए 100 से ज्यादा लिंक हटाना या रिपोर्ट करना पड़ता है। ‘AI टूल्स ने इस तरह की तस्वीरें बनाना बहुत आसान कर दिया है। कई वेबसाइटों पर फोटो अपलोड करने के बाद तीन-चार फोटो मुफ्त में बना सकते हैं। इसके लिए किसी खास तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती। अलग-अलग अकाउंट बनाकर और रेफरल कोड इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में फोटो बनाई जा सकती हैं। कुछ टूल ओपन सोर्स भी हैं, जिन्हें डाउनलोड करके लैपटॉप पर चलाया जा सकता है।’ कुछ वेबसाइटों पर विदेशी भाषा जैसे रशियन बॉट भी दिखे। कई वेबसाइट विदेश में रजिस्टर्ड होने के बावजूद भारत में आसानी से इस्तेमाल की जा सकती हैं। वहीं, भारत में यूट्यूब पर भी ऐसे टूल इस्तेमाल करने के तरीके बताए जाते हैं, भले ही उन्हें खुले तौर पर गलत काम के रूप में पेश न किया जाए।
कई लेयर में काम, सबको काम अलग-अलग
‘AI से अश्लील फोटो बनाने का नेटवर्क कई लेवल पर काम करता है। कुछ लोग AI मॉडल तैयार करते हैं, कुछ वेबसाइट या टेलीग्राम बॉट के जरिए उन्हें उपलब्ध कराते हैं। दूसरे लोग इन टूल का प्रचार करते हैं, रेफरल से नए यूजर जोड़ते हैं या क्रेडिट और सब्सक्रिप्शन बेचते हैं। इसके बाद कुछ यूजर तैयार फोटो को सोशल मीडिया पर फैलाते हैं या पैसे लेकर बेचते हैं।’ ‘फोटो बनाने वाला व्यक्ति भारत में हो सकता है, जबकि वेबसाइट का ऑपरेटर या सर्वर किसी दूसरे देश में हो। इससे आरोपी की पहचान और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटानी पड़ सकती है।’ ‘दूसरी मुश्किल यह है कि एक बॉट बंद होने के बाद उसी तकनीकी ढांचे से दूसरी सेवा शुरू हो सकती है। नकली अकाउंट के जरिए कंटेंट फैलने और एक ही तस्वीर के कई लिंक बनने से भी किसी पर एक्शन मुश्किल हो जाता है।’


