होमगार्ड भर्ती घूसकांड: बीमारी का हवाला देकर अस्पताल में भर्ती हुए डॉक्टर, जांच में फिट मिले तो भेजे गए जेल

होमगार्ड भर्ती घूसकांड: बीमारी का हवाला देकर अस्पताल में भर्ती हुए डॉक्टर, जांच में फिट मिले तो भेजे गए जेल

कानपुर। होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण कुमार और डॉ. महेश कुमार द्विवेदी को शनिवार देर रात जेल भेज दिया गया। जेल जाने से बचने के लिए दोनों डॉक्टरों ने बीमारी का हवाला देकर उर्सला अस्पताल में भर्ती होने के साथ एक महीने के बेडरेस्ट की सलाह भी हासिल कर ली थी। हालांकि, पुलिस दोनों को इलाज के लिए हैलट अस्पताल लेकर पहुंची तो वहां जांच की गई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए ड्राइवर अजीत कुमार को न्यायिक रिमांड नहीं मिलने से उसे जेल नहीं भेजा जा सका। पुलिस की जांच में भर्ती स्थल पर उसकी मौजूदगी और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई।

बीमारी का हवाला देकर अस्पताल में हुए भर्ती

होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी और उनके ड्राइवर अजीत कुमार को गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को पुलिस तीनों का मेडिकल परीक्षण कराने उर्सला अस्पताल पहुंची तो उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की बात कही। डॉ. प्रवीण ने एंजाइना की समस्या, डॉ. महेश ने सर्वाइकल की परेशानी और अजीत ने सिर में चोट होने का हवाला दिया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद तीनों को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।

इस बीच शुक्रवार देर शाम दोनों डॉक्टरों का 14 दिन का न्यायिक रिमांड मंजूर हो गया, जबकि ड्राइवर अजीत के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पुलिस पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस कारण उसका न्यायिक रिमांड मंजूर नहीं हुआ।

हैलट में जांच के बाद जेल भेजे गए डॉक्टर

शनिवार को उर्सला अस्पताल की निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. प्रवीण को एंजाइना की गंभीर समस्या होने के कारण कार्डियोलॉजी भेजा गया है। वहीं, डॉ. महेश को रीढ़ संबंधी परेशानी और अजीत को सिर में चोट के चलते हैलट अस्पताल रेफर किया गया था।

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, डॉ. प्रवीण का इलाज उर्सला में डॉ. सपन गुप्ता कर रहे थे। उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट में डॉ. प्रवीण की स्थिति गंभीर बताते हुए मूवमेंट करने पर जान का खतरा होने की बात कही थी। साथ ही एक महीने तक बेडरेस्ट की सलाह दी थी।

शनिवार रात करीब 11 बजे पुलिस दोनों डॉक्टरों को आगे की जांच और इलाज के लिए हैलट अस्पताल लेकर पहुंची। वहां चिकित्सकों ने उनकी जांच की। पुलिस के अनुसार, जांच में दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई। इसके बाद रात करीब 11:40 बजे दोनों डॉक्टरों को जेल भेज दिया गया।

मेडिकल पास कराने के नाम पर मांगी जा रही थी रकम

होमगार्ड भर्ती के लिए 15 अक्टूबर को कानपुर पुलिस लाइन में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच और मेडिकल परीक्षण किया जा रहा था। पहले दिन करीब 200 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। मेडिकल परीक्षण के लिए सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी की ओर से चार-चार डॉक्टरों के दो पैनल गठित किए गए थे। इनमें डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी और डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत भी शामिल थे।

आरोप है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को नाक टेढ़ी होने या आंखों में परेशानी बताकर अनफिट किया जा रहा था। इसके बाद उन्हें फिट करने के नाम पर रुपये मांगे जा रहे थे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि नाक टेढ़ी बताकर 10 से 15 हजार रुपये और आंखों में परेशानी बताने पर 50 हजार रुपये तक मांगे गए।

बताया गया कि मेडिकल परीक्षण सुबह नौ बजे शुरू होना था, लेकिन डॉ. प्रवीण दोपहर करीब एक बजे के बाद पहुंचे। इसके बाद परीक्षण शुरू हुआ। पहले दिन 200 अभ्यर्थियों में से 180 का परीक्षण किया गया। आरोप है कि शुरुआती करीब 20 अभ्यर्थियों की जांच के बाद कई अभ्यर्थियों को नाक और आंखों में दिक्कत बताकर अनफिट किया जाने लगा। करीब 70 अभ्यर्थियों को फेल किए जाने का दावा किया गया।

दो भाइयों के मेडिकल परीक्षण के दौरान खुला मामला

मामले का खुलासा दो भाइयों के मेडिकल परीक्षण के दौरान हुआ। दोनों का होमगार्ड भर्ती में चयन हुआ था। आरोप है कि रुपये देने के बाद एक भाई को मेडिकल परीक्षण में फिट घोषित कर दिया गया। इसके बाद दूसरा भाई भी कथित एजेंट को रुपये देकर पहुंचा। वहां पहले से अभ्यर्थियों की लाइन लगी थी। जब उसने पहले अपना मेडिकल कराने की बात कही तो दूसरे अभ्यर्थियों ने विरोध किया।

इस पर उसने कहा कि उसने रुपये दिए हैं, इसलिए पहले उसका मेडिकल होना चाहिए। दूसरे अभ्यर्थियों ने उससे रुपये लेने वाले के बारे में पूछा तो उसने डॉ. प्रवीण का नाम लिया। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित वसूली की बात सामने आई और अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

हंगामे के दौरान डॉ. प्रवीण के ड्राइवर अजीत कुमार की अभ्यर्थियों ने पिटाई कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। मामले में होमगार्ड इंस्पेक्टर सुधांशु सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने अजीत कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी, डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

यूपीआई से रकम लेने के साक्ष्य मिलने का दावा

पुलिस की जांच में सामने आया कि डॉ. प्रवीण के ड्राइवर अजीत के माध्यम से अभ्यर्थियों से रुपये लिए जाने का आरोप है। पुलिस को कई यूपीआई ट्रांजेक्शन आईडी और फोन-पे के जरिए रकम भेजे जाने से संबंधित साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, करीब 40 अभ्यर्थियों ने रुपये देने का आरोप लगाया है। इनमें से 22 अभ्यर्थियों के संबंध में तीन लाख रुपये से अधिक की वसूली के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।

एसीपी कोतवाली अमित पांडेय के मुताबिक, मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों के बैग और मोबाइल फोन जमा कराए गए थे। हालांकि, एक चपरासी के कहने पर अभ्यर्थियों को उनके बैग वापस दे दिए गए। इसके बाद मोबाइल के माध्यम से लेनदेन किए जाने की बात सामने आई। कुछ अभ्यर्थियों ने अपने परिजनों को फोन कर रुपये लेकर बुलाया था।

ड्राइवर को रिमांड नहीं, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

मामले में ड्राइवर अजीत कुमार को जेल भेजने की पुलिस की कोशिश सफल नहीं हो सकी। अभ्यर्थियों ने उस पर नकदी लेने के आरोप लगाए थे, लेकिन पुलिस उसके पास से रकम बरामद नहीं कर सकी। साथ ही, पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि वह भर्ती स्थल पर मौजूद था। इन परिस्थितियों में उसका न्यायिक रिमांड मंजूर नहीं हुआ।

वहीं, दोनों आरोपी डॉक्टरों को न्यायिक रिमांड मिलने के बाद जेल भेज दिया गया। भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित वसूली के इस मामले ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस की जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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