ब्रेक लगाते ही बिजली बनाएगी आगरा मेट्रो, ऊर्जा की बचत के लिए अपनाई गई आधुनिक तकनीक

ब्रेक लगाते ही बिजली बनाएगी आगरा मेट्रो, ऊर्जा की बचत के लिए अपनाई गई आधुनिक तकनीक

आगरा। आगरा मेट्रो को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेट्रो ट्रेन में ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली में बदलकर दोबारा उपयोग किया जाएगा। इसके लिए रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली अपनाई जा रही है। इस तकनीक से बिजली की खपत कम करने में मदद मिलेगी और ट्रेन के संचालन में ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। इसी दिशा में दूसरे कॉरिडोर में डिपो से सदर तक थर्ड रेल बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक प्रस्तावित दूसरे कॉरिडोर के स्टेशनों का निर्माण भी जारी है।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर और डिपो परिसर में थर्ड रेल प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। यह व्यवस्था पारंपरिक बिजली के तारों से अलग है। सामान्य तौर पर कई रेल प्रणालियों में ट्रेन के ऊपर बिजली के तार लगाए जाते हैं, लेकिन थर्ड रेल प्रणाली में पटरियों के समानांतर एक अतिरिक्त रेल बिछाई जाती है। इसी के माध्यम से ट्रेन को बिजली की आपूर्ति की जाती है। आगरा मेट्रो की ट्रेनें 750 वोल्ट डीसी बिजली से संचालित होंगी।

थर्ड रेल प्रणाली के तहत बिजली की आपूर्ति के लिए अलग-अलग स्तर पर सब स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इससे ट्रेन संचालन के साथ स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाओं के लिए जरूरी बिजली भी उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और ऊर्जा बचत की व्यवस्था से मेट्रो संचालन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा का होगा दोबारा इस्तेमाल

मेट्रो ट्रेन जब चलती है, तो उसमें गति के कारण ऊर्जा मौजूद रहती है। सामान्य ब्रेकिंग व्यवस्था में ट्रेन की गति कम करने पर इस ऊर्जा का बड़ा हिस्सा घर्षण के कारण गर्मी के रूप में निकल जाता है। इसके विपरीत रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक में इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से ट्रेन की गति कम करते समय बिजली पैदा की जाती है। इस बिजली का दोबारा उपयोग ट्रेन के विभिन्न सिस्टम चलाने में किया जा सकता है। इससे ऊर्जा की बर्बादी कम होगी और बाहरी बिजली आपूर्ति पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। मेट्रो जैसी नियमित रूप से रुकने और चलने वाली परिवहन व्यवस्था में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी है।

तीन रिसीविंग सब स्टेशन से होगी बिजली की आपूर्ति

आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 29.4 किलोमीटर है। इनके संचालन के लिए तीन रिसीविंग सब स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें एक सब स्टेशन डिपो परिसर में और दूसरा आईएसबीटी के पास बनाया गया है, जबकि तीसरे सब स्टेशन का निर्माण जारी है। इन सब स्टेशनों के जरिए ग्रिड से मिलने वाली बिजली को मेट्रो की जरूरत के अनुसार अलग-अलग चरणों में बदला जाएगा।

ग्रिड से 132 किलोवोल्ट की बिजली रिसीविंग सब स्टेशन तक पहुंचेगी। यहां इसे 33 किलोवोल्ट में परिवर्तित किया जाएगा। इसके बाद ट्रैक्शन सब स्टेशन में बिजली को 750 वोल्ट डीसी में बदलकर ट्रेन संचालन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था से मेट्रो ट्रेनों को आवश्यक वोल्टेज पर बिजली मिलेगी और संचालन के लिए व्यवस्थित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

स्टेशनों की सुविधाओं के लिए अलग व्यवस्था

मेट्रो में बिजली का उपयोग केवल ट्रेनों को चलाने के लिए ही नहीं होगा, बल्कि यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी किया जाएगा। स्टेशनों पर लगी लिफ्ट, एस्केलेटर, रोशनी और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों को चलाने के लिए बिजली की जरूरत होती है। इसके लिए 33 किलोवोल्ट की बिजली को परिवर्तित कर 440 वोल्ट पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्टेशन परिसर में जरूरी उपकरणों का संचालन किया जा सकेगा।

आगरा मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर में डिपो से सदर तक थर्ड रेल बिछाने का काम पूरा होना परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण कदम है। आगे स्टेशनों के निर्माण और अन्य जरूरी कार्यों के पूरा होने के साथ इस कॉरिडोर की संचालन संबंधी तैयारियां आगे बढ़ेंगी। ऊर्जा की बचत के लिए रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग और थर्ड रेल जैसी तकनीकों का इस्तेमाल मेट्रो प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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