कानपुर बन रहा बॉलीवुड का नया हब ;-
Kanpur:-उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर कानपुर अब केवल व्यापार और शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि तेजी से उभरते फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है, और इसी बदलती तस्वीर के बीच हमारे संवाददाता मनोज शुक्ला ने कानपुर और मुंबई के बीच सक्रिय रूप से कार्य कर रहे प्रख्यात डॉक्टर, फिल्म प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और राइटर डॉ. गौरव वर्मा से विशेष बातचीत की, जो अपने प्रोडक्शन हाउस KG Motion Pictures के माध्यम से शहर को नई रचनात्मक दिशा देने में जुटे हैं!
हाल के वर्षों में कानपुर की गलियों, ऐतिहासिक इमारतों, औद्योगिक बैकड्रॉप और आधुनिक लोकेशनों पर लगातार हो रही फिल्मों, शॉर्ट फिल्मों और म्यूजिक एल्बम की शूटिंग ने यह संकेत दे दिया है कि यह शहर अब ‘मिनी बॉलीवुड’ बनने की ओर अग्रसर है, और डॉ. गौरव वर्मा जैसे रचनाकार इस परिवर्तन के केंद्र में हैं, जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अगर कहानी सशक्त हो और इरादे मजबूत हों तो किसी भी शहर को फिल्म इंडस्ट्री का केंद्र बनाया जा सकता है”; डॉ. वर्मा का व्यक्तित्व बहुआयामी है—वे पिछले पंद्रह वर्षों से ड्रग डी-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में निःशुल्क सेवा दे रहे हैं, जहां नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं का इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास किया जाता है, और इसी सामाजिक सरोकार ने उनके भीतर के लेखक और फिल्मकार को जन्म दिया, क्योंकि उनके अनुसार सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को आईना दिखाने और सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त उपकरण है; उन्होंने बताया कि रिहैबिलिटेशन सेंटर में काम करते हुए उन्हें अनगिनत ऐसी वास्तविक कहानियां देखने और सुनने को मिलीं, जिन्होंने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, और इन्हीं अनुभवों के आधार पर उन्होंने अपनी आगामी पुस्तक “नशा नहीं, निश्चय छोड़ता है” लिखी है, जो मार्च 2026 में प्रकाशित होने जा रही है, इस पुस्तक में नशे से जूझ रहे युवाओं की मानसिक स्थिति, परिवारों की पीड़ा, पुनर्वास की कठिन प्रक्रिया और दृढ़ निश्चय की शक्ति को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि यह किताब युवाओं, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी; फिल्मी सफर की बात करें तो डॉ. वर्मा ने अपने बैनर के तहत कई विषयप्रधान और कंटेंट-ड्रिवन प्रोजेक्ट्स का निर्माण और निर्देशन किया है, जिनमें महिला सशक्तिकरण पर आधारित फिल्म अदिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो एक ऐसी महिला की कहानी कहती है जो सामाजिक बंधनों और मानसिक दबावों को तोड़ते हुए आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की राह चुनती है, यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म और उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है तथा वर्ष 2026 के शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में भी भेजी जाने की तैयारी में है; इसके अतिरिक्त उनकी आगामी फिल्म Wait List भी चर्चा में है, जो नवयुवतियों को भावनात्मक शोषण और तथाकथित प्रेम-जाल से सावधान रहने का संदेश देती है, और जिसे वे सामाजिक जागरूकता के साथ व्यावसायिक स्तर की प्रस्तुति देने का प्रयास बता रहे हैं; डॉ. वर्मा के अन्य प्रोजेक्ट्स में Door Bell, Breakup Reunion, Anda-e-Ishq और Haunting Connection जैसी फिल्में शामिल हैं, जिनमें रोमांस, थ्रिलर, सामाजिक सरोकार और समकालीन रिश्तों की जटिलताओं को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया है; उन्होंने यह भी बताया कि उनका उद्देश्य केवल फिल्म बनाना नहीं, बल्कि कानपुर के स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, लेखकों और युवाओं को मंच प्रदान करना है, ताकि उन्हें मुंबई जाने की अनिवार्यता कम हो और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण सिनेमा का निर्माण हो सके, उनके अनुसार कानपुर में लोकेशन वैरायटी, किफायती प्रोडक्शन लागत और प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो केवल सुव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सहयोग की, और यदि यह सहयोग मिला तो आने वाले वर्षों में कानपुर उत्तर भारत का प्रमुख शूटिंग हब बन सकता है; डॉ. वर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि वे अपनी फिल्मों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, नशा मुक्ति, पारिवारिक मूल्यों और युवा चेतना जैसे विषयों को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सिनेमा का प्रभाव समाज पर गहरा और दीर्घकालिक होता है, इसलिए फिल्मकार की जिम्मेदारी केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं होनी चाहिए; बातचीत के दौरान उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि “सपना देखने से बड़ा है उसे पूरा करने का साहस, और यह साहस तभी आता है जब व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार हो,” उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवाओं को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और OTT के माध्यम से अभूतपूर्व अवसर मिल रहे हैं, और यदि वे अपने हुनर को निखारें तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना संभव है; वर्तमान समय में जब कानपुर में लगातार फिल्मी गतिविधियां बढ़ रही हैं, स्टूडियो, आउटडोर शूटिंग और म्यूजिक वीडियो निर्माण की रफ्तार तेज हुई है, तब डॉ. गौरव वर्मा जैसे फिल्मकारों की पहल शहर को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि वे एक ओर चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं तो दूसरी ओर सिनेमा के माध्यम से संवेदनशील और जागरूक समाज की परिकल्पना कर रहे हैं, और यही द्वंद्व—सेवा और सृजन का—उन्हें विशिष्ट बनाता है; कुल मिलाकर, कानपुर का फिल्मी परिदृश्य अब परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, और यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे तो वह दिन दूर नहीं जब यह शहर केवल औद्योगिक नहीं बल्कि रचनात्मक राजधानी के रूप में भी जाना जाएगा, जहां कैमरे की चमक, कहानी की ताकत और सामाजिक सरोकार एक साथ मिलकर नए युग की पटकथा लिखेंगे।

