जी-20 में अमरीका-चीन जैसी सुपरपावर पर बरसे विदेश मंत्री जयशंकर
जंग कोई भी लड़े, भुगतते हैं गरीब देश
अटलांटा। अमरीका के अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के मंच से भारत ने दुनिया के बड़े युद्धों को रोकने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए जोरदार कूटनीतिक दखल दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमरीका और चीन जैसे बड़े देशों की मौजूदगी में साफ शब्दों में कहा कि अंतहीन जंग का खामियाजा केवल युद्धरत देश ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) भुगत रहे हैं। उन्होंने जी-20 देशों से अनुरोध किया है कि विभिन्न संघर्षों के समाधान का रास्ता डिप्लोमेसी यानी कूटनीति से निकाला जाए। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित होने से बचाने के लिए ठोस प्रयास करने का आग्रह किया है। जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत अपने प्रयासों में अमरीका के साथ तालमेल बिठा रहा है।
उन्होंने उत्पादन नेटवर्क को भौगोलिक रूप से और अधिक विविध बनाने पर भी जोर दिया और उम्मीद जताई कि दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले यह समूह किसी आम सहमति पर पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध को खत्म करने के लिए, अंतहीन युद्धों का सिलसिला रुकना चाहिए। रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत की पहल का ब्योरा देते हुए जयशंकर ने बताया कि भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू करना तथा ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों को रोकने की संभावनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस और यूरोपीय देशों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के सवाल को उन्होंने बातचीत का सबसे जटिल पहलू बताया।
क्वाड देशों के बीच साल की तीसरी बैठक
जी-20 बैठक से इतर भारत, अमरीका, जापान और आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी बैठक की। इस साल यह चारों देशों के विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी उनकी मुलाकात हुई थी। जयशंकर ने कहा कि चारों देशों ने माना कि क्वाड के कामकाज में आगे बढऩे के लिए उपयोगी प्रगति हुई है।


