कुर्सी पर बैठकर चेकिंग या हाईवे पर दरबार?
कानपुर-सागर हाईवे पर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली चर्चा में
कानपुर। कानपुर-सागर हाईवे पर बिधनू नहर के पास ट्रैफिक पुलिस की कथित चेकिंग का तरीका इन दिनों सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यहां तैनात टीएसआई साहब कुर्सी पर बैठकर बाहरी नंबरों वाले कॉमर्शियल वाहनों को रुकवाते हैं। इसके बाद वाहन चालकों से करीब आधे घंटे तक पूछताछ होती है। फिर एक गार्ड को साथ भेजकर ऑनलाइन कार्रवाई के समय मे 22 किलोमीटर दूर ट्रैफिक पुलिस लाइन में जाकर कार्यवाही की बात सामने आती है ।
रोजाना की इस पूरी प्रक्रिया को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह हाईवे पर यातायात व्यवस्था संभालने की ड्यूटी है या कुर्सी पर बैठकर चलने वाला कोई दरबार? वाहन रोकने से लेकर कार्रवाई पूरी करने तक के तरीके को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं सूत्रों के मुताबिक, बाहरी नंबरों वाले व्यावसायिक वाहन चेकिंग के दौरान रोके जाते हैं। इसके बाद चालक से लंबी पूछताछ की जाती है। करीब आधे घंटे तक चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद गार्ड को साथ भेजकर ऑनलाइन कार्रवाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि यातायात नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई की प्रक्रिया तुरन्त क्यो नही की जाती है ।
वसूली की चर्चा, लेकिन जांच जरूरी

इस कथित चेकिंग प्रक्रिया को लेकर वसूली की आशंका भी जताई जा रही है, लेकिन अभी तक इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वाहनों को किस आधार पर रोका जा रहा है और ऑनलाइन कार्रवाई किन नियमों के तहत की जा रही है।
ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी सड़क पर यातायात को सुचारु बनाए रखना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना है। ऐसे में चेकिंग की प्रक्रिया पारदर्शी होना भी जरूरी है, ताकि किसी वाहन चालक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


