कानपुर के 50 हजार व्यापारियों को मिलेगी राहत, ब्याज में 90% तक माफी
ब्याज और अर्थदंड माफी योजना 2026 से पुराने कर विवादों के निपटारे की तैयारी; जुर्माना पूरी तरह माफ करने का प्रस्ताव
कानपुर। वर्षों से पुराने कर निर्धारण, अपील और बकाया वसूली के मामलों में उलझे व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार ब्याज और अर्थदंड माफी योजना 2026 के जरिए जीएसटी लागू होने से पहले के बिक्री कर, व्यापार कर, वैट और अन्य वाणिज्यिक करों से जुड़े पुराने विवादों के निपटारे की तैयारी कर रही है। योजना से कानपुर और आसपास के करीब 50 हजार व्यापारियों को लाभ मिलने का अनुमान है। प्रदेश स्तर पर लगभग पांच लाख व्यापारियों को राहत मिलने और करीब 10 हजार करोड़ रुपये के ब्याज व अर्थदंड से छूट मिलने की संभावना जताई गई है।
योजना के तहत व्यापारियों को निर्धारित मूल कर जमा करना होगा। इसके बाद बकाया राशि के स्लैब के अनुसार ब्याज में 50 से 100 प्रतिशत तक छूट देने और अर्थदंड पूरी तरह माफ करने का प्रावधान प्रस्तावित है। इससे उन कारोबारियों को विशेष राहत मिल सकती है, जिन पर मूल कर से कई गुना अधिक ब्याज और जुर्माना लंबे समय से बकाया है।
बकाया राशि के आधार पर मिलेगी ब्याज में छूट
कर अधिवक्ता संतोष गुप्ता के अनुसार, प्रदेश के कर आयुक्त नितिन बंसल ने योजना शुरू करने की घोषणा की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणियों में बकाया राशि के आधार पर ब्याज में छूट दी जाएगी।
- 10 लाख रुपये तक के बकाये पर: ब्याज में 100 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान बताया गया है।
- 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक: ब्याज में 90 प्रतिशत छूट।
- एक करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक: ब्याज में 75 प्रतिशत छूट।
- पांच करोड़ रुपये से अधिक: ब्याज में 50 प्रतिशत छूट।
सभी श्रेणियों में अर्थदंड पूरी तरह माफ करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, योजना की अंतिम शर्तें और पात्रता सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार ही लागू होंगी।
छोटे कारोबारियों से लेकर उद्योगों तक को लाभ
पुराने कर विवादों के कारण लंबे समय से आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे व्यापारियों को इस योजना से राहत मिलने की उम्मीद है। ब्याज और जुर्माने का बोझ कम होने से कारोबारियों को बकाया निपटाने में मदद मिल सकती है। योजना से कर संबंधी मुकदमों में कमी आने और अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ घटने की भी संभावना है।
व्यापारियों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले भी सरकार ने इसी तरह की योजना लागू की थी, जिसका लाभ कारोबारियों को मिला था। अब नई योजना से छोटे व्यापारियों के साथ बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी पुराने मामलों के समाधान का अवसर मिल सकता है।
जीएसटी से पहले के कर मामलों पर रहेगा फोकस
योजना के दायरे में उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम-1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम-1995, प्रवेश कर अधिनियम-2007 और वैट अधिनियम-2008 समेत पुराने वाणिज्यिक कर कानूनों के तहत निर्धारित बकाये शामिल किए जाने की तैयारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक के बकायों को योजना में शामिल करने का प्रस्ताव है। योजना लागू होने के बाद पात्र व्यापारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर पुराने कर विवादों का निपटारा करा सकेंगे। इससे लंबे समय से लंबित बकाया वसूली के मामलों को भी गति मिलने की उम्मीद है।


