डीलरशिप की आड़ में बना रहे थे नकली सीमेंट, एयरपोर्ट और सड़कों तक सप्लाई

डीलरशिप की आड़ में बना रहे थे नकली सीमेंट, एयरपोर्ट और सड़कों तक सप्लाई

एसीसी-अंबुजा के नाम पर हर महीने 30 हजार से ज्यादा बोरियां खपाने का आरोप, आठ से 10 जिलों में फैला था नेटवर्क

कानपुर। अदाणी ग्रुप की एसीसी और अंबुजा सीमेंट की डीलरशिप लेकर उसकी आड़ में नकली सीमेंट बनाने और सप्लाई करने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में आरोप है कि पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में नकली सीमेंट तैयार कर लखनऊ एयरपोर्ट, सीएम ग्रिड की सड़कों और मकानों के निर्माण कार्यों तक पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह हर महीने 30 हजार से अधिक नकली सीमेंट की बोरियां सप्लाई करता था। छापेमारी में फैक्ट्री से सीमेंट से भरी एक हजार से अधिक और तीन हजार से ज्यादा खाली बोरियां बरामद की गई हैं। पुलिस ने फैक्ट्री के मुंशी राहुल को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया। वहीं, फैक्ट्री संचालक दो भाइयों समेत चार साझेदारों की तलाश की जा रही है।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, अदाणी ग्रुप के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि डीलरशिप की आड़ में नकली सीमेंट तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा था। लखनऊ एयरपोर्ट पर नकली सीमेंट मिलने की जानकारी के बाद जांच शुरू कराई गई। इसके बाद पुलिस ने पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापा मारा। जांच में निर्माण सामग्री की सप्लाई से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

तीन साल पहले मिली थी बिक्री की अनुमति

अदाणी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक ने बताया कि कंपनी की बिजनेस टीम को पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में एसीसी और अंबुजा ब्रांड के नाम पर नकली सीमेंट बनाने और बेचने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस आयुक्त से शिकायत की गई।

पुलिस आयुक्त के अनुसार, कानपुर में सीमेंट के तीन बड़े डीलरों में नीरज गुप्ता और उसके भाई धीरज गुप्ता को करीब तीन साल पहले बिक्री के लिए पांच टन माल अधिकृत किया गया था। अन्य दो डीलरों को 15 और 25 टन माल बेचने की अनुमति दी गई थी। पुलिस का आरोप है कि नीरज और धीरज ने इसी व्यवस्था की आड़ में अंबुजा सीमेंट के नाम पर नकली माल तैयार कर सप्लाई शुरू कर दी।

एक्सपायरी सीमेंट खरीदकर तैयार करते थे नकली माल

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार मुंशी राहुल ने पूछताछ में बताया कि फैक्ट्री नीरज और धीरज अपने मेरठ निवासी साथियों सुनील मित्तल और निशांत मित्तल के साथ संचालित करते थे। आरोप है कि ये लोग झांसी, ललितपुर और आसपास के क्षेत्रों के सीमेंट गोदामों से एक्सपायरी सीमेंट नीलामी में बेहद कम कीमत पर खरीदते थे। यह सीमेंट 10 से 20 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से मिल जाता था।

इसके बाद सीमेंट को फैक्ट्री में लाकर मिक्सर मशीन से पिसवाया जाता था और नामी कंपनियों की बोरियों में भरकर बाजार में सप्लाई किया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपित आठ से 10 जिलों में नकली सीमेंट खपा रहे थे।

छह रुपये में तैयार होती थी बोरी की छपाई

जांच में सामने आया कि नामी कंपनियों के ब्रांड और नाम वाली सीमेंट की बोरियों की छपाई एक प्रिंटिंग प्रेस से कराई जाती थी। एक सादी बोरी खरीदने और उस पर प्रिंटिंग कराने में करीब छह रुपये खर्च होते थे। इसके बाद तैयार बोरी को 250 से 280 रुपये तक में बेचा जाता था।

पुलिस के मुताबिक, मामले में सीएम ग्रिड की सड़कों और एयरपोर्ट के निर्माण कार्यों के अलावा बड़े ठेकेदारों से संपर्क होने की जानकारी भी मिली है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली सीमेंट किन-किन परियोजनाओं और निर्माण स्थलों पर सप्लाई किया गया। फैक्ट्री संचालकों और अन्य साझेदारों की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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