यूपी : गांवों को शहरों से जोड़ने के लिए रोडवेज को नहीं मिल रही बसें

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लखनऊ,29 मई। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम(रोडवेज) को शहरों से गांवों को जोड़ने के लिए बसें नहीं मिल रही है, इसलिए यह योजना अभी फेल होती नजर आ रही है।

रोडवेज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर सोमवार को बताया कि शहरों से गांवों को जोड़ने के लिए परिवहन निगम को बसें ही नहीं मिल रही हैं। निजी बस ऑपरेटर बसें अनुबंधत करने से दूर भाग रहे हैं। यहीं वजह है कि 30 मई तक प्रदेश भर में पांच हजार बसें अनुबंध करने की तैयारी में  अभी तक  मात्र 100 बसें अनुबंध करने के टेंडर फार्म ही बिके हैं।
ऐसे में 100 दिन के अंदर गांव-गांव बस सेवा शुरू करने के लक्ष्य उम्मीद से कोसों दूर जाता नजर आ रहा है। गांव में रहने वाली जनता को उम्मीद थी कि 100 दिन के अंदर उन्हें परिवहन सेवा की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए लखनऊ जिला मुख्यालय से 17 गांव चिन्हित भी किए जा चुके हैं। इन गांवों तक 30 जून तक बसें पहुंचाने का लक्ष्य है। मगर यह लक्ष्य पूरा होना नजर नहीं आ रहा है।

परिवहन निगम के अफसरों ने अनुबंधित बस जोड़ने की योजना तो बना ली है मगर इस योजना में बसें अनुबंध करने की जो शर्ते है उसे देखकर निजी बस ऑपरेटर दूर भाग रहे हैं। अनुबंधित बस ऑपरेटर बतातें हैं कि गांव-गांव बस पहुंचाने की योजना मात्र दिखावा है। निगम के पास पैसें हैं ही  नहीं कि नई बसें खरीद सके। ऐसे में पांच हजार बसें अनुबंध करना दूर की कोड़ी साबित हो रही है। अब 15 जून तक बसों का अनुबंध होगा और गांव-गांव बस पहुंचाने के लिए निजी बसों को 30 मई तक जोड़ने की तारीख तय की गई है।

इस तारीख तक चंद बसों के ही टेंडर फार्म बिक सके। ऐसे में निगम मुख्यालय ने बस अनुबंध करने के टेंडर फार्म को 15 जून तक खरीदने की तारीख को बढ़ाना पड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि  प्राइवेट बसें अनुबंध होने की योजना में जो प्राशसनिक शुल्क की दरें तय की गई है, वह गांवकृ गांव बस जोड़ने की योजना के मुताबिक अधिक है। यही वजह है कि निजी बस ऑपरेटर बसें अनुबंध करने से पीछे हट रहे हैं। उदाहरण स्वरूप ए क्लास रूट पर अगर अनुबंधित बस 300 किलोमीटर की दूरी रोजाना तय करती है तो बस मालिक को 18 सौ रुपए प्राशसनिक शुल्क के तौर पर परिवहन निगम को देना होगा।

गौरतलब है कि राजधानी सहित प्रदेश भर में एक लाख आठ हजार गांव है। इनमें से 68 हजार गांव तक बसें पहुंच रही हैं। बाकी 40 हजार गांव तक बसें पहुंचाने के लिए परिवहन निगम को आठ हजार बसों की जरूरत पड़ेगी। इन गांव तक अगले पांच साल में बसें पहुंचाने का वादा निगम प्रबंधन ने किया है।

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