लखनऊ : लोकसभा में पेश तीन तलाक बिल का मुस्लिम महिलाओं ने किया स्वागत

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लखनऊ, 28 दिसम्बर । केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को लोकसभा में पेश किये गए तीन तलाक विधेयक का कुछ मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे हैं तो कांग्रेस, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस बिल को लाने के लिए सरकार के कदम का स्वागत किया है। मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाईस्ता अम्बर ने तीन तलाक पर केन्द्र सरकार के फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक बिल मुस्लिम महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाने का काम करेगी।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच अवध प्रान्त की संयोजिका डॉ. शबाना आजमी ने कहा कि सरकार का यह सराहनीय कदम है। इससे लाखों मुस्लिम औरतों को जुल्म और ज्यादती से छुटकारा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मुहम्मद साहब ने औरतों की हिफाजत के लिए तीन तलाक बनाया था। मुल्ला मौलवी इसका आज गलत इस्तेमाल करते हैं।
शबाना ने कहा,‘केन्द्र सरकार ने तीन तलाक के विधेयक को संसद में पेश किया, लेकिन हम महिलाओं का कहना है कि इस पर ऐसा कानून बने जो पीड़ित महिलाओं के लिये पूर्ण सकारात्मक हो। तीन तलाक के आरोपी हों या सहयोगी दोनों को 10 साल की सजा होनी चाहिए। सभी की गिरफ्तारी अनिवार्य हो और गैर जमानती होनी चाहिए। तीन तलाक से सम्बन्धित जितने पुराने मुकदमे चल रहे हो उन पर नये कानून द्वारा कानूनी कार्यवाही और सजा होनी चाहिए।’

आजमी कहा कि मुस्लिम महिलाओं को चल और अचल में सम्पत्ति में कुरान के अनुसार हिस्सा देने का प्रावधान किया जाये। हलाला जैसी कुरीति, बहुविवाह पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगना चाहिए। तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को बच्चो पर पूरा अधिकार देना होगा और उनके पालन पोषण के लिये आर्थिक मदद की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट की एडवोकेट साईमा खॉन ने कहा, ‘यह जरूरी नहीं है कि महिला सशक्तिकरण में महिलाओं को पुरूष से अधिक अधिकार मिलें । बल्कि उसे पुरूषों के बराबर का अधिकार मिलना चाहिए।’

कांग्रेस पार्टी ने भी तीन तलाक पर इस बिल का समर्थन किया है। कांग्रेस की प्रवक्ता शुचि विश्वास का कहना है कि तीन तलाक पर कानून बनना चाहिए। सरकार के फैसले का हम समर्थन करते हैं लेकिन सरकार को एक वर्ग विशेष की महिलाओं की ही चिंता क्यों है। अन्य समाज में भी महिलाओं के साथ ज्यादती होती है। उनको भी न्याय दिलाना सरकार का कर्तव्य है।
सामाजिक कार्यकर्ता नाईस हसन ने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि केन्द्र सरकार का यह क्रान्तिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि हमारे हिसाब से तलाक देने पर सजा का जो प्रावधान है वह कम होना चाहिए और सुलह समझौते का वक्त देना चाहिए।

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