कानपुर :नारी को बड़प्पन देने वाले संत साहित्य के एकमात्र संत थे गुरूनानक 

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कानपुर, 03 नवम्बर। नानक सर्वेश्वरवादी थे, मूर्तिपूजा को उन्होंने निरर्थक माना। रूढिय़ों और कुसंस्कारों के विरोध में वे सदैव तीखे रहे। ईश्वर का साक्षात्कार उनके मतानुसार बाह्य साधनों से नहीं वरन् आंतरिक साधना से सम्भव है। उनके दर्शन में वैराग्य तो है ही साथ ही उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक स्थितियों पर भी नजर डाली है। संत साहित्य में नानक अकेले हैं, जिन्होंने नारी को बड़प्पन दिया है। यह बात गुरू सिंह सभा के प्रधान हरविंदर सिंह ने खास बाचतीत में कही। 
उन्होंने कहा कि सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी हैं। इनके अनुयायी इन्हें गुरु नानक, बाबा नानक और नानकशाह नामों से सम्बोधित करते हैं। गुरु नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु, सभी के गुण समेटे हुए थे। इनके उपदेश का सार यही होता था कि ईश्वर एक है उसकी उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिये है। मुर्तिपुजा, बहुदेवोपासना को ये अनावश्यक कहते थे।

 बताया कि गुरू नानक के 549वें प्रकाश उत्सव पर लंगर की तैयारियां शुरू हो गईं है। शनिवार को मोतीझील में लंगर का भव्य आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को सिख समाज के पुरूष व महिलाएं दिनभर तैयारी करते रहें। खासतौर सिख समाज की महिलाओं में लगंर की तैयारियों को लेकर सक्रियता देखते ही बन रही थी। बताया कि सिख समाज के सभी लोगों से कहा गया है कि लंगर के दिन सभी महिलाएं अपने-अपने घर से एक-एक किलो आटा लेकर आएंगी। बताया 60 कुंतल आटे से महाराज का लंगर शहर के करीब 60 लाख लोग चखेंगे।

 
10 सिद्धांत आज भी प्रासंगिक
बताया कि गुरू नानक देव या नानक देव सिखों के प्रथम गुरू थे। गुरु नानक देवजी का जन्म 15 अप्रैल 1469 ई. वैशाख सुदी 3, संवत 1526 में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ। गुरु नानक का प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। तलवंडी अब ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। तलवंडी पाकिस्तान के लाहौर जिले से 30 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बचपन से ही नानक के मन में आध्यात्मिक भावनाएं मौजूद थीं। गुरूनानक देव जी ने अपने अनुयायियों को जीवन के दस सिद्धांत दिए थे। यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है

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