कानपुर:मंदिर के खजाने पर आत्माओं का वास, अंग्रेज भी हो गये थे बदहवास

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Mohit varma

कानपुर, 07 जून । भारत के मंदिरों के खजाने को लूटने का काम बाहरी अक्रान्ताओं ने बखूबी से किया। चाहे वह मुस्लिम अक्रान्ता रहे हों या व्यापार करने आए अंग्रेज। लेकिन कानपुर के ऐतिहासिक मंदिर के खजाने पर अंग्रेजों की एक न चली, जहां पर आत्माओं का वास हो चुका था। थक हारकर जब बदहवास हो गये तो खिसियाकर मंदिर में ताला जड़ दिया। जिसके बाद से इस मंदिर में आज तक न पूजा होती है और न ही रात कोई यहां रूकता है। 
 शहर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर घाटमपुर तहसील में ईंटों का बना हुआ गुप्त कालीन प्राचीन मंदिर है। जिसे इतिहास में भीतरगांव मंदिर के नाम से जाना जाता है। 

यह भारत का एकमात्र मंदिर है जो ईटों से बना हुआ है। यह मंदिर ऐतिहासिकता के साथ यहां पर दबे खजाने को लेकर भी विख्यात है। ग्रामीणों की माने तो मंदिर में बहुत बड़ा खजाना है। जिसकी जानकारी मुस्लिम अक्रांताओं को तो नहीं हो सकी थी पर व्यापार करने आये अंग्रेज जान गये थे। जिसके चलते अंग्रेजों ने कई बार खजाने को लूटने का प्रयास किया लेकिन हर बार उन्हे असफलता ही मिली। गांव के बुजुर्ग रामखेलावन ने बताया कि हमारे पूर्वज बताते थे कि 1900 के आस-पास कानपुर के अंग्रेज अधिकारी करीब 40 लोग लेकर खजाने को खोदने आए थे। लेकिन ज्यों ही अधेंरा हुआ सभी बदहवास हो गये। जिससे अंग्रेज अधिकारी खिसियाकर मंदिर में ताला जड़वा दिया। जिसके बाद से आज तक मंदिर के गर्भगृह का ताला नहीं खुल सका। 

बंजारों की हुई थी दर्दनाक मौत
ग्रामीण शिवरतन ने बताया कि 1905 में यहां पर बंजारे आए हुए थे और मंदिर परिसर के पास डेरा जमा लिया। इसी दौरान गांववालों ने उन्हें खजाने के बारे में बताया तो करीब दो दर्जन बंजारे रात में उसे खोदने के लिए मंदिर के पास पहुंचे। लेकिन वे खजाना लूट पाते उससे पहले सभी की दर्दनाक मौत हो गई। बताया कि सुबह के वक्त हमारे बाबा और अन्य गांववाले मंदिर पर गए तो वहां पर बंजारों के क्षत-विक्षत हालात में शव पड़े मिले थे। 
पुरातत्व विभाग कर रहा देखरेख
पांचवी सदी का ईटों का बना यह गुप्त कालीन मंदिर अद्भुद प्राचीन कलाकृति का अनूठा नमूना है। पूरा मंदिर ईटों से बना हुआ है, पिरामिड आकार के इस मंदिर की उचाई 20 मीटर और चौड़ाई 70 मीटर है। मंदिर पर तराशी गई मूर्तियां व नक्काशी प्राचीन कलाकृति को दर्शाती हैं। मंदिर में एक विष्णु जी बावन अवतार वाली मूर्ति है, एक मूर्ति चार भुजाओं वाली दुर्गा जी की और गणेश भगवान की चार भुजाओं वाली मूर्ति है। पांचवी सदी के इस मंदिर की देखरेख इन दिनों पुरातत्व विभाग कर रहा है। पुरातत्व कर्मचारी सोहन लाल ने बताया कि यह मंदिर तभी खुलता है लखनऊ पुरातत्व विभाग से आदेश होता है।
आत्माओं का है राज
ग्रामीणों की मानें तो मंदिर के नीचे अथाह खजाना दबा हुआ है। जिस पर आत्माओं ने वास कर लिया है। जब भी कोई इस खजाने पर निगाहे टिकाता है उसका नुकसान हो जाता है। साथ ही अगर कोई यहां पर रात रूकता है तो उसकी जिंदा बचने की संभावना नहीं रहती। जिसके चलते जो व्यक्ति मंदिर के दर्शन करने आता है वह दिन में भी आता है और रात होते ही यहां पर कोई नहीं रूकता।

 गांव के जियाराम ने बताया कि रात के 12 बजते ही मंदिर परिसर पर चहल-कदमी शुरू हो जाती है। घुंघरू और ढोल के साथ ही शहनाई की धुनों की आवाजें सुनाई पड़ती है। इसी के चलते गांववाले रात में कभी मंदिर नहीं जाते और न ही दिन में यहां पर पूजा होती है। पुजारी ने बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर है बहुत लोग देखने आते हैं तो मुख्य दरबाजा दिन में खोल दिया जाता है

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