कानपुर :आईआईटियन ने छोड़ी एक करोड़ की नौकरी, किसनों के लिए बनाया कृषि हब

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कानपुर, 24 नवम्बर । आजादी के सत्तर साल बाद देश ने कई आयाम गढ़े, पर अन्नदाता के हालात नहीं सुधरे। किसान प्राकृतिक आपदाओं के साथ सरकारों की उपेक्षा के चलते गर्त में चला गया। फसल बर्बाद होने के चलते हर वर्ष हजारों की संख्या में किसान खुदकुशी कर रहे हैं। इसी से आहत होकर एक कानपुर आईआईटी पासआउट स्टूडेंट्स ने एक करोड़ सालाना की नौकरी छोड़कर सबसे गरीब तबगे को अमीर बनाने के लिए जुट गया। इसके लिए कानपुर आईआईटी भी आगे आ गया। 
आईआईटियंस ने खराब सब्जी और फसल को बचाने के साथ ही उसका वाजिब दाम मिले इसके लिए एटार्टअप कृषि हब नामक कंपनी बनाई। यह कंपनी मोबाइल ऐप की मदद से किसानों को मौसम, जरूरत और कीमत आदि की जानकारी देकर वेस्ट यूपी के शहरों में 12 घंटे में सब्जियां सप्लाई कर रही है।

एप में किसान के दर्द की हर दवा मौजूद 
मेरठ के रहने वाले आईआईटी के स्टूडेंट्स रहे भूपेंद्र ने किसानों के दर्द को जाना और इसके निवारण के लिए जॉब छोड़ दिया। भूपेंद्र ने किसानों की फसलों को पृकतिक आपदाओं से बचाने के अलावा उनकी फसल का सही दाम मिले, इसके लिए एप के जरिए कृषि हब नामक कंपनी बनाई है। भूपेंद्र के सपने को साकार आईआईटी कानपुर के सिडबी इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेन्टर ने किया। सेंटर के एचओडी डॉक्टर अभिजीत साठे ने बताया भूपेंद्र वर्ष 2000 में भूपेंद्र ने इस प्रोजेक्ट के बारे में हम लोगों से संपर्क किया और अपने बिजनेस प्रोजेक्ट के विषय में बताया। आईआईटी की सिडबी विभाग को उनका प्रपोज़ल पसंद आया। आईआईटी प्रबंधक ने भूपेन्द्र को अपना प्रोजेक्ट लेकर कानपुर बुलाया। यहां उनके प्रोजेक्ट को देखा और मदद करनी का हामी भर दी। भूपेन्द्र का प्रपोज़ल स्वीकार करने के बाद आईआईटी कानपुर ने भूपेन्द्र को 30 लाख रूपए की फडिंग की, जिससे भूपेन्द्र ने कृषि हब नाम का मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया। 

फसल की बुआई से लेकर कटाई तक जानकारी 
डॉक्टर अभिजीत साठे ने बताया कि किसानों को भूपेंद्र के मोबाइल एप्लिकेशन कृषि हब के जरिए फसल की बुआई से लेकर उसके कटाई और रखरखाव के लिए सारी जानकारियां उपलब्ध हैं। किसानों को गेहूं से लेकर धान की बुआई के दौरान एक बीघे में कितना बीज, कितनी दफा पानी और खाद्य का उपयोग करना है उसकी विधिवत पूरी जानकारी मौजूद है। इस एप में वीडियों में पूरी जानकारी भी किसानों की दी जाती है। किसानों के लिए कम समय में जल्दी तैयार होने वाली फसलों के बारे में बताया गया है। अभिजीत साठे ने बताया कि किसान आज भी साल में दो फसलें ही उगाते हैं और बेमौसम बारिश सूखा पड़ जाने के बाद वो बर्बाद हो जाती है। एप में ऐसी कई फसलें हैं जो 30 से 45 दिन के अंदर तैयार हो जाती हैं। 

एप में फसल के दाम भी मौजूद 
भूपेंद्र के एप में किसानों की फसलों के सरकारी रेट भी उपलब्ध हैं। साथ ही सरकार की तरफ से दिए जाने वाली सब्सिडी और बीजों का पूरा विवरण मौजूद है। किसान एप के जरिए घर बैठे बीजे मंगवा सकते हैं। साथ ही उन्हें देश की सभी थोक बजारों का मंडियों के रेट भी एप् के जरिए देख सकते हैं और अपनी फसल को वहां ले जाकर बिक्री कर सकते हैं। डॉक्टर सेठ ने बताया कि अब बिचौलियों से किसानों को छुटकारा मिल गया है। अगर किसान घर बैठे ही फसल को बेचना चाहता है कि खरीदार उसके घर जाकर सही कीमत पर खरीदारी भी करेगा। आईआईटी कानपुर के सिडबी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर अभिजीज साठे ने बताया कि आईआईटी ने इसे सन 2000 में शुरू किया था और अब तक 65 कंपनियों के प्रपोजल आ चुके है जिनमे से 35 कम्प्लीट हो चुके हैं। 

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