कानपुर : जानिए कहां है ये रहस्यों से भरा शिव मंदिर

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सत्यम शुक्ला/ ऋषि श्रीवास्तव

वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस न्यूज

 कानपुर : क्या ऐसा भी हो सकता है कि मंदिर के पट बंद हो और जब पुजारी द्वारा पट खोले जाये तो वहां पर पहले से ही शिवलिंग पर जल अर्पित किया हुआ मिले सुनने में ये आश्चर्यजनक है लेकिन यह पूर्ण सत्य है और आज तक ये एक रहस्य बनकर ही रह गया है .

कहां है ये शिव मंदिर

घाटमपुर इलाके के भीतरगॉव ब्लॉक में रिंद नदी के किनारे स्थित करचुलीपुर गॉव में बने औलियासुर शिव मंदिर कब बना और किसने बनाया इसका कोई भी प्रमाणिक लेख या इतिहास अभी तक नही मिला है पुरात्तव विभाग के अधीन इस शिव मंदिर महाभारत काल के समय के आस आस की मानी जाती है मंदिर के मुख्य द्वारा पर लिखे हुए मन्त्रों को आज तक कोई नही पढ़ पाया है .


आज भी अश्वत्थामा करते है भगवान शिव की पूजा

भक्तों का कहना है महाभारत काल में कौरवों व् पांड्वो के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा सबसे पहले औलियासुर मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा करते आ रहे है वहीं बड़े बुजुर्गो की माने तो सैकड़ो वर्षो पहले गॉव के ही जमीदारों की गाय नदी किनारे चरने आया करती थी और जब गाय वापस घर लौटती तो गाय एक भी बूंद दूध नही देती थी।

 जब जमींदारों ने चरवाहों पर दूध चोरी का इल्जाम लगाया तो चरवाहों ने गायों पर नजर रखनी शुरू कर दी और देखा की जंगल में झाड़ियों के पास गाय पहुंचती है और गाय के चारों थनों से स्वत; दूध जमीन पर गिरने लगता है और जब इसकी जानकारी चरवाहे जमींदार को देते है तो जमींदार वहां पहुंचते है जब झाड़ियों को हटाया जाता है तो वहां पर शिवलिंग मिलता है .उसके बाद मंदिर का निर्माण होता है .


एक रहस्य है ये भी

मंदिर परिसर में एक कुआं भी है बाताया जाता है कि यदि गर्मियों में कुँए का पानी कम हो जाता है तो अचानक बिना बारिश के ही कुँए का पानी अपने आप ही बढ़ता जाता है और आज तक कभी भी ये कुआं नही सुखा है .

सावन में लगता है मेला तो शिवरात्रि में चढ़ती है कावंर

औलियासुर मंदिर में सावन में लगातार मेले का आयोजन होता है जिसमें दूर दूर से भक्त आते है और भगवान शिव के दर्शन करते है वहीं महाशिवरात्रि पर भक्त द्वारा कावंर भी चढाई जाती है .

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